By, Shrikant Pratyush
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जेएमएम के सांसद ने झारखंड की अस्मिता को 2 करोड़ में बेचा और कांग्रेस ने खरीदा : रघुवर दास

कांग्रेस-जेएमएम का याराना पुराना, इनका उद्देश्य झारखंड को लूटना है

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मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा के सांसद ने झारखंड की अस्मिता को दो करोड़ रुपए में बेचने का और कांग्रेस ने उसे खरीदने का काम किया। 1993 में ही झारखंड अलग राज्य बन जाता, लेकिन इनकी नीयत साफ नहीं थी।

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जेएमएम के सांसद ने झारखंड की अस्मिता को 2 करोड़ में बेचा और कांग्रेस ने खरीदा : रघुवर दास
सिटी पोस्ट लाइव, रांची: मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा के सांसद ने झारखंड की अस्मिता को दो करोड़ रुपए में बेचने का और कांग्रेस ने उसे खरीदने का काम किया। 1993 में ही झारखंड अलग राज्य बन जाता, लेकिन इनकी नीयत साफ नहीं थी। झारखंड मुक्ति मोर्चा के सांसद ने ऐसा नहीं किया और सांसद रिश्वत कांड देश के सामने आया। कांग्रेस और जेएमएम की दोस्ती पुरानी है, क्योंकि उनका उद्देश्य एक ही है। सिर्फ और सिर्फ झारखंड को लूटना। मुझे कोल्हान की गरीबी देखकर पीड़ा होती है। आजादी और अलग राज्य गठन के बाद इन्हें क्या मिला। आदिवासियों के नाम पर राजनीति करने वाले जेएमएम के लोग तो खुद अमीर हुए, लेकिन जिनके नाम पर राजनीति की, जिनके नाम पर घड़ियाली आंसू बहाए उन्हें उनके ही हाल पर छोड़ दिया। रविवार को मुख्यमंत्री दास जोहार जन आशीर्वाद यात्रा के तहत चक्रधरपुर में आयोजित जनसभा को संबोधित कर रहे थे।
बहुमत मिला तो चक्रधरपुर बनेगा अलग जिला
रघुवर दास ने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा की वजह से 1993 में झारखंड अलग राज्य नहीं बन पाया, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने झारखंड से किये गये वादे को निभाया और झारखंड को अलग राज्य का दर्जा दिया। भाजपा की सोच है छोटा राज्य होगा तब समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की किरण पहुंचेगी। कोल्हान जैसे पहाड़ी क्षेत्र जहां प्रखंड दूर-दूर हैं, इसे ध्यान में रखते हुए मैं वादा करता हूं कि अगर भाजपा को बहुत मिलती है और सरकार का गठन होता है तो फरवरी 2020 में चक्रधरपुर को अलग जिला का दर्जा दिया जाएगा।
सोरेन परिवार की तरह वंशवाद से नहीं आए हैं मोदी
रघुवर दास ने कहा कि सोरेन परिवार की तरह वंशवाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नहीं आए हैं। उन्होंने एक चाय की दुकान से प्रधानमंत्री तक का सफर तय किया है। देश की करोड़ों जनता ने वंशवाद की राजनीति को नकारते हुए दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत का उन्हें प्रधानमंत्री बनाया। जब एक गरीब व्यक्ति प्रधानमंत्री बनता है तो उसका परिणाम होता है गरीबों को समर्पित योजनाएं, कुशासन को समाप्त करना और सुशासन को आरूढ़ करना। यही काम 2014 के बाद से लगातार हो रहा है।

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