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माता-पिता की मौत के बाद अनाथ बने बच्चों के लिये अभिभावक बने कोडरमा डीसी

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सिटी पोस्ट लाइव, कोडरमा: जिला मुख्यालय स्थित छोटकी बागी, वार्ड नंबर 1 अंतर्गत एक निर्धन परिवार के घर मातम छाया हुआ है, जिसे देखकर किसी की भी रूह कांप जाए। कोडरमा में विधवा मालती देवी की मृत्यु के बाद अनाथ बने 5 बच्चों के लिये उपायुक्त रमेश घोलप ने संवेदनशीलता दिखाते हुये पहल की है। मंगलवार को उपायुक्त को सूचना मिली कि दो दिन पूर्व कोडरमा के छोटकी बागी निवासी एक विधवा महिला की मृत्यु होने के उपरांत उनके पांच बच्चों का जीवन अंधकारमय हो गया है, उनके समक्ष रोजी रोटी और संरक्षण का भी सवाल खड़ा हो गया है। पिता का साया पांच वर्ष पहले ही ईश्वर ने छीन लिया था उस परिवार में एक मात्र सहारा मां थी, वो परिवार की गाड़ी को जंगल से लकड़ियाँ चुनकर जीवन यापन कर रही थी। उस मां को पहले तो लकवा ने शिकार बनाया और जब इलाज के लिए रिम्स ले जाया जा रहा था तो उसने रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। परिवार के बचे तीनों बच्चियाँ, एक 18 वर्ष का लड़का वह भी मानसिक रूप से अपंग, एक 9 वर्ष का बच्चा के जीवन में अंधकार की काली छाया के अलावा कुछ भी नहीं बच गया था।

परिवार में कोई अभिभावक नहीं बचने के कारण बच्चियों की सुरक्षा से लेकर भविष्य की चिन्ता खड़ी हो गयी थी। इस घटना की सूचना के 24 घंटे के अंदर उस असहाय परिवार का सहारा बनकर पहल करते हुए डीसी रमेज़ह घोलप जिले के आला अधिकारियों के साथ सांत्वना और मदद के उददेश्य से मर्माहत परिवार के घर पहुंचे। मौके पर डीडीसी आलोक त्रिवेदी, निदेशक डीआरडीए नेल्सन बागे, अपर समाहर्ता अनिल तिर्की, जिला शिक्षा पदाधिकारी समेत जिला एवं प्रखंड के पदाधिकारी मौजूद थे।
उपायुक्त रमेश घोलप ने अभिभावक बन परिवार के तीनों बच्चियों काजल कुमारी उम्र 15 वर्ष, सुनीता कुमारी उम्र 13 वर्ष, अनिता कुमारी उम्र 11 वर्ष के घर पर जाकर कस्तूरबा बालिका आवासीय विद्यालय में नामांकन करवाया और अपने हाथ से रजिस्टर में नाम दर्ज करवाकर अभिभावक के रूप में हस्ताक्षरभी किया। उन बच्चियों को निशुल्क ड्रेस, किताब, कॉपी तथा दैनिक उपयोग की सामग्री के साथ समुचित सुविधा देते हुए शिक्षा प्रदान की जाएगी। साथ ही विकास कुमार उम्र 9 वर्ष का नामांकन समर्थ विद्यालय में कराया गया जहाँ बच्चों को निशुल्क रहने, खाने की व्यवस्था दी जाएगी। इससे बच्चों के अंधकारमयी जीवन में सुरक्षा और शिक्षा की रोशनी आयी है। जिला प्रशासन द्वारा 24 घंटे के अंदर प्रक्रिया पूरी कराते हुये राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ की स्वीकृति दी गई। जिसके तहत 20 हजार की राशि डीबीटी के माध्यम से उनके खाते में दी जाएगी। वहीं समेकित बाल संरक्षण योजना के तहत परिवार के तीन बच्चों को (दो बालिका एवं एक बालक) वित्तीय सहायता के रूप में प्रतिमाह 2 हजार प्रति बच्चे को 3 वर्ष तक दिये जाने का स्वीकृति पत्र भी उपायुक्त ने बच्चों को सौंपा।
इस योजना के तहत मिलनेवाली राशि को 3 सालके उपरांत बच्चों की उम्र 18 साल होने तक बढाया जा सकेगा। इस संबंध में उपायुक्त ने संबंधित पदाधिकारी को निर्देश दिये है। इस आपदा के समय में जिले में स्थापित फूड बैंक से बच्चों को तत्काल 40 किलोग्राम चावल, 40 किलोग्राम आंटा, 8 लीटर तेल, 15 किलोग्राम दाल, 4 किलोग्राम नमक, पर्याप्त मसाला, 8 किलोग्राम सोयाबीन, साबुन व मास्क इत्यादि दिया गया। इसके अलावा जिला प्रशासन के पदाधिकारियों द्वारा नगद राशि की मदद निजी तौर पर फ़िलहाल 10 हजार की नगद राशि बच्चों को दिया गया। उपायुक्त ने बच्चों को कोरोना से संबंधित बचाव के उपाय बताते हुये उन्हे विटामिन सी की टैबलेट और 20 मास्क दिये तथा साबुन से सतत् हाथ धोने की सलाह देते हुये 10 साबुन भी दिये।

 

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