By, Shrikant Pratyush
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भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा कल, मेला में सुरक्षा की कमान संभालेंगी आरएसएस

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रांची में ऐतिहासिक भगवान जगन्नाथ  रथयात्रा गुरुवार को धूमधाम के साथ निकलेगी। भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के विग्रहों को रथ में सवार कर मौसीबाड़ी ले जाया जायेगा, जहां से नौ दिनों के बाद भगवान को पुनः धुर्वा स्थित मुख्य मंदिर वापस लाया जायेगा।

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भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा कल, मेला में सुरक्षा की कमान संभालेंगी आरएसएस

सिटी पोस्ट लाइव, रांची: रांची में ऐतिहासिक भगवान जगन्नाथ रथयात्रा गुरुवार को धूमधाम के साथ निकलेगी। भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के विग्रहों को रथ में सवार कर मौसीबाड़ी ले जाया जायेगा, जहां से नौ दिनों के बाद भगवान को पुनः धुर्वा स्थित मुख्य मंदिर वापस लाया जायेगा। रथ यात्रा के लिए तीन विशाल रथ तैयार किये गये हैं। सबसे पहले रथ पर बलभद्र, दूसरे पर बहन सुभद्रा तथा पिछले रथ पर भगवान जगन्नाथ सवार होंगे। इससे पूर्व सुबह पांच बजे विधि विधान पूर्वक पूजा अर्चना कर मंदिर का दरवाजा श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा। बुधवार को सुबह भगवान श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए सर्वसुलभ हो गये। भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा भाई बलभद्र को भात , दाल व सब्जी विशेष प्रिय है। इसलिए भगवान को इन्हीं चीजों की भोग चढ़ाई जाती है।

इसलिए एकांतवास में रहते हैं भगवान जगन्नाथ

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जगन्नाथ रथ यात्रा का शुभारंभ ज्येष्ट मास की देव स्नान पूर्णिमा को यानी 17 जून को स्नान यात्रा से हो गया था। स्नान यात्रा के दौरान अत्याधिक स्नान के कारण भगवान जगन्नाथ और दोनों भाई बहन बीमार हो गए थे। इस कारण से उनको एकांतवास में रखा गया था। एकांतवास के दौरान मंदिर में कोई पूजा नहीं होती है। 15 दिनों तक आराम के बाद भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहन का बुधवार को दिव्य श्रृंगार किया गया। बीते 17 जून यानी ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन एकांतवास में जाने के बाद भगवान जगन्‍नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के साथ  चार जुलाई को मौसीबाड़ी के लिए प्रस्‍थान करेंगे। भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के दौरान करीब 10 दिनों तक विशाल मेला लगता है। जगन्नाथ मेला के मद्देनजर मेले में दुकाने सज गयी हैं। मेले में आने वाले लोगों के मनोरंजन के लिए झूले लग चुके हैं और मेले की विशेष मिठाई भी बनने लगी है। मेले में राज्य के बाहर से भी व्यापारी आते हैं। तरह-तरह के खेल और जरूरी सामानों के साथ- साथ तलवार और लोहे के सामान खूब बिकते हैं। ग्रामीणों के लिए यह मेला विशेष आकर्षण का केंद्र होता है। यहां उन्हें कृषि का सामान और मछली पकड़ने का जाल भी मिलता है। जगन्नाथपुर मंदिर का कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड पडेगा। रथ खींचने के लिए दूर-दराज से लोग आते हैं। इसमें कई राजनेता भी शामिल होते हैं। आषाढ़ शुक्ल द्वितीया तिथि को कर्क राशि में आने वाले नक्षत्रों के राजा पुष्य में जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और बड़े भाई बलराम के रथ खींच कर भक्तगणों में पुण्य कमाने की होड़ देखने को मिलती है। मान्यता के अनुसार जगन्नाथ रथयात्रा में रथ को खींचने से जीवात्मा को मुक्ति मिल है। जगन्नाथ मेले में सुरक्षा के पुख्ता इतंजाम किये गये हैं। मेले को 16 जोन में बांटा गया है। 25 जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाये गये हैं। ड्रोन कैमरा से भी मेले में आने-जाने वालों पर नजर रखी जायेगी।

जगन्नाथपुर मेला में सुरक्षा की कमान संभालेंगे आरएसएस के स्वयंसेवक 

इस बार मेले की सुरक्षा व्यवस्था की कमान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक संभालेंगे।दर्शन में किसी को कोई परेशानी ना हो, कोई अव्यवस्था ना हो, इसका ध्यान रखने के लिए मंदिर प्रबंधन की ओर से आरएसएस के स्वयंसेवकों को जिम्मेदारी दी गयी है।उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सन् 2001 से ही ऐतिहासिक मेला में दर्शन व्यवस्था करते आ रहा है। पहले जगन्नाथपुर मेला में पंक्ति से दर्शन व्यवस्था नहीं होती थी। मंदिर प्रबंधन के आग्रह पर पहली बार सन् 2001 में आरएसएस ने दर्शन व्यवस्था संभाली और पहली बार पंक्ति से दर्शन प्रारम्भ हुआ। इस बार भी संघ के लगभग 250 स्वयंसेवक और राष्ट्र सेविका समिति की 30 बहनें व्यवस्था में सहयोग करेंगी। संघ के स्वयंसेवक गुरूवार को तड़के तीन बजे से ही अपने वेश में मंदिर परिसर में पहुंचने लगेंगे।

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