By, Shrikant Pratyush
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झारखंड विस का मानसून सत्र सोमवार से, हंगामेदार होने की संभावना

सरकार से 5 साल का हिसाब मांगेगा विपक्ष

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झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र सोमवार से शुरू होने जा रहा है। यह सत्र चतुर्थ झारखंड विधानसभा का संभवतः आखिरी सत्र होगा। इस सत्र के हंगामेदार होने की संभावना है। विस्थापन, वन अधिकार कानून में बदलाव, भूमि अधिग्रहण कानून को कथित रूप से कमजोर करने और राज्य में उत्पन्न सुखाड़ समेत अन्य ज्वलंत मुद्दों पर विपक्ष ने सरकार को सदन में घेरने की रणनीति बनायी है।

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झारखंड विस का मानसून सत्र सोमवार से, हंगामेदार होने की संभावना

सिटी पोस्ट लाइव, रांची: झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र सोमवार से शुरू होने जा रहा है। यह सत्र चतुर्थ झारखंड विधानसभा का संभवतः आखिरी सत्र होगा। इस सत्र के हंगामेदार होने की संभावना है। विस्थापन, वन अधिकार कानून में बदलाव, भूमि अधिग्रहण कानून को कथित रूप से कमजोर करने और राज्य में उत्पन्न सुखाड़ समेत अन्य ज्वलंत मुद्दों पर विपक्ष ने सरकार को सदन में घेरने की रणनीति बनायी है। वहीं सत्तापक्ष की ओर से विपक्ष के हर सवाल का जवाब देने और कई विधायी कार्य निपटाने की तैयारियां की गयी हैं। विपक्ष इससे पहले भी सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन की कोशिश और स्थानीयता नीति को लेकर आक्रमक रहा है, जिसके कारण पिछले दो वर्ष के दौरान सत्र में प्रश्नकाल की कार्यवाही अधिकांश समय तक बाधित रही। हालांकि इस दौरान सरकार वित्त विधेयक और अन्य विधायी कार्यों का निष्पादन कराने में सफल रही। लेकिन प्रश्नोत्तरकाल बाधित रहने के कारण जनता के कई ज्वलंत सवालों पर सदन में चर्चा नहीं हो सकी। विगत बजट सत्र के दौरान प्रश्नोत्तरकाल की कार्यवाही चली थी और इसबार भी उम्मीद की जा रही है कि पांच दिनों के छोटे सत्र में कई विधायी कार्य निपटाये जा सकेंगे। लोकसभा चुनाव के बाद हो रहे विधानसभा सत्र में मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी की जगह आजसू पार्टी कोटे से मंत्री बनाये गये रामचंद्र सहिस पेयजल एवं स्वच्छता विभाग से जुड़े सवालों का जवाब देंगे। वहीं लोकसभा चुनाव में विपक्ष की ओर से कई विधायक चुनाव मैदान में उतरे थे, लेकिन एक गीता कोड़ा को छोड़कर अन्य सभी विपक्षी विधायकों सुखदेव भगत, मनोज यादव, प्रदीप यादव, जगरनाथ महतो, चंपई सोरेन को करारी हार का सामना करना पड़ा। जिस कारण विपक्षी सदस्यों का मनोबल थोड़ा गिरा हुआ है। बहरहाल, विपक्षी दलों ने अपनी मंशा स्पष्ट कर दी है कि वे किसी भी हाल में सरकार को मॉब लिंचिंग, जमीन अधिग्रहण और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर नहीं बख्शेंगे। अभी हाल ही में सरायकेला मॉब लिंचिंग की घटना पर संसद में भी जबरदस्त बहस हुई थी। खुद प्रधानमंत्री को पूरे मामले पर बोलना पड़ा था। झारखंड सरकार के खिलाफ लगभग सभी विपक्षी पार्टियां लामबंद हैं। इसके अलावा राज्य से पलायन, स्कूल मर्जर, जमीन के मुद्दे, वनाधिकार कानून में छेड़छाड़, सुखाड़ की स्थिति पर सरकार को बैकफुट पर भेजने का विपक्ष का आखिरी मौका है। विपक्ष जनता के बीच यह संदेश देने की भरपूर कोशिश करेगा कि सरकार ने पिछले 5 सालों में राज्य के आदिवासियों, गरीबों, किसानों के लिए कुछ भी नहीं किया है। बेरोजगारी के मसले पर भी सरकार को घेरने की कोशिश की जाएगी। कांग्रेस की ओर से लगातार इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री रघुवर दास को कटघरे में खड़ा किया जाता रहा है। कांग्रेस यह आरोप लगाती रही है कि सरकारी खजाने से अरबों रुपए मोमेंटम झरखंड और स्किल डेवलपमेंट के नाम पर खर्च करने के बाद भी युवाओं को नौकरी के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। सरकारी नौकरियों की स्थिति तो और भी दयनीय है। राज्य के अधिकतर विभागों में पद खाली हैं लेकिन नई बहाली नहीं की जा रही है। पारा शिक्षकों की मांग भी अभीतक पूरी नहीं की गई है। सत्ता पक्ष के लिए यह सत्र कांटों भरा होगा जिसमें उसे विपक्ष के हमले का जबाव देना है। हर मोर्चे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। पिछले 5 सालों में राज्य के विकास के लिए किए गए कार्यों की पूरी रिपोर्ट सौंपनी होगी। एकबार फिर जनता के बीच जाना है तो सदन में विपक्षी हमलों का भी जबाव देना होगा।

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