By, Shrikant Pratyush
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गांधी के रचनात्मक कार्यों को आत्मसात करने की जरुरत : बलबीर दत्त

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महात्मा गांधी की 150वीं जयंती चल रही है। देश भर में आयोजन हो रहा है। किताबें भी आ रही हैं। गांधी पर लोग खूब बातें भी कर रहे हैं। पर जरुरत गांधी के रचनात्मक कार्यों को आत्मसात करने की है। सबसे दुखद पहलू यह है कि जो गांधी का नाम दिन भर जपते हैं, जो गांधी को ब्रांड के तौर पर इस्तेमाल करते हैं, वे भी गांधी के विचारों और रचनात्मक कामों से दूर हैं।

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गांधी के रचनात्मक कार्यों को आत्मसात करने की जरुरत : बलबीर दत्त

सिटी पोस्ट लाइव, रांची: महात्मा गांधी की 150वीं जयंती चल रही है। देश भर में आयोजन हो रहा है। किताबें भी आ रही हैं। गांधी पर लोग खूब बातें भी कर रहे हैं। पर जरुरत गांधी के रचनात्मक कार्यों को आत्मसात करने की है। सबसे दुखद पहलू यह है कि जो गांधी का नाम दिन भर जपते हैं, जो गांधी को ब्रांड के तौर पर इस्तेमाल करते हैं, वे भी गांधी के विचारों और रचनात्मक कामों से दूर हैं। वे गांधी का बस इस्तेमाल कर रहे हैं। ये बातें सोमवार को स्टेशन रोड स्थित प्रभात प्रकाशन के प्रतिष्ठान में ‘महात्मा गांधी चित्रावली’ का लोकार्पण के मौके पर वरिष्ठ पत्रकार पद्मश्री बलबीर दत्त ने कही। पुस्तक का लोकार्पण रांची दूरदर्शन के पूर्व निदेशक पीके झा, प्रभात प्रकाशन के डॉ पीयूष कुमार, राजेश शर्मा, डॉ हरेंद्र प्रसाद सिन्हा व नसीर अफसर ने किया। बलबीर दत्त ने कहा कि कांग्रेस ने गांधी को 70 साल पहले ही छोड़ दिया। उनके रचनात्मक कार्यों को कभी लागू ही नहीं किया। उनके 26 रचनात्मक कार्य थे। इनमें खादी, महिला सशक्तिकरण, शराबबंदी, स्वच्छता, स्वदेशी आदि अभियान थे। यह काम 70 साल बाद मोदी कर रहे हैं। वे स्वच्छता अभियान चला रहे हैं। खादी का प्रचार कर रहे हैं। यह काम 70 साल पहले कांग्रेस ने शुरू किए होते तो अपने देश की तस्वीर दूसरी होती। बलबीर दत्त ने गांधी के कर्म और जीवन के बारे में कह कि उन्होंने राजनीतिक शुचिता पर बल दिया। वे अहिंसा के पुजारी थे, लेकिन जब पाकिस्तान ने आक्रमण कर दिया तब लोग गांधी के पास गए कि क्या किया जाए, तब गांधी ने कहा, फौज भेजो। पुस्तक की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यह चित्रावली आज के समय में बच्चों के लिए बहुत जरूरी है। बच्चें चित्र के माध्यम से कम से कम गांधी को जानेंगे। आज के बच्चें तो मोबाइल में ही व्यस्त हैं। डॉ पीयूष कुमार ने चित्रावली के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि कलाम से लेकर भगत सिंह के जीवन पर चित्रावली प्रकाशित हो गई है। देश के कर्णधारों के जीवन को बच्चों की भाषा में ले आने का प्रयास किया जा रहा है। आज बाल साहित्य का अभाव है। इस अभाव की पूर्ति के लिए इस तरह की पुस्तकें लाई जा रही हैं। शायर नसीर अफसर ने कहा कि गांधी को समझने की जरूरत है। उनका व्यक्तित्व और चरित्र बहुत महान था। पुलवामा के शहीदों को नमन करते हुए कहा कि जिसने भाईचारा का पाठ पढ़ाया, उसके नाम पर दहशतगर्दी की जा रही है। जैश हमारे प्यारे नबी का नाम है, लेकिन आज देखिए, उनके नाम के साथ ये क्या कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज गांधी के विचारों की जरूरत है। पीके झा ने भी कहा कि आज गांधी पर दुनिया में शोध हो रहे हैं और गांधी को फिर से पढऩे की कोशिश की जा रही है। संचालन डा. हरेंद्र प्रसाद सिन्हा ने किया और आभार राजेश शर्मा ने व्यक्त किया। लोकार्पण समारोह में वीणा श्रीवास्तव, सुधा चौधरी, सुनीता अग्रवाल, डॉ सुनीता यादव सहित अन्य लोग मौजूद थे।

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