By, Shrikant Pratyush
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लौंडा नाच की परंपरा शुरु करने वाले रामचंद्र मांझी को मिला पद्मश्री सम्मान

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भोजपुरी के शेक्सपियर कहे जाने वाले भिखारी ठाकुर की टोली में रंगमंच पर नाट्य कला का जादू बिखेरने और लौंडा नाच की परंपरा शुरु करने वाले शख्स रामचंद्र मांझी की कला को सम्मान मिला है. 95 साल की उम्र में पद्मश्री सम्मान से नवाजे जायेंगे.

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सिटी पोस्ट लाइव : भोजपुरी के शेक्सपियर कहे जाने वाले भिखारी ठाकुर की टोली में रंगमंच पर नाट्य कला का जादू बिखेरने और लौंडा नाच की परंपरा शुरु करने वाले शख्स रामचंद्र मांझी की कला को सम्मान मिला है. 95 साल की उम्र में पद्मश्री सम्मान से नवाजे जायेंगे. बता दें प्रसिद्ध नाटककार स्वर्गीय भिखारी ठाकुर की परंपरा को जीवित रखने वाले रामचंद्र मांझी उन कलाकारों की एक आस बनें है जो सूचना और प्रौद्योगिकी के इस युग में खोती जा रही विधाओं के संरक्षण में दिन रात कार्यरत हैं.

लौंडा नाच के प्रसिद्ध कलाकार रामचंद्र मांझी सारण जिले के नगरा, तुजारपुर के रहने वाले हैं. रामचंद्र मांझी को संगीत नाटक अकादमी अवार्ड 2017 से नवाजा गया था. उन्हें राष्ट्रपति ने प्रशस्ति पत्र के साथ एक लाख रुपये की पुरस्कार राशि भेंट की थी. रामचंद्र मांझी 95 वर्ष के होने के बाद भी आज मंच पर जमकर थिरकते और अभिनय करते हैं.

रामचंद्र मांझी ने बताया कि उन्होंने  भिखारी ठाकुर के नाच दल में 10 वर्ष की उम्र से ही काम करते रहे. 1971 तक भिखारी ठाकुर के नेतृत्व में काम किया और उनके मरणोपरांत गौरीशंकर ठाकुर, शत्रुघ्न ठाकुर, दिनकर ठाकुर, रामदास राही और प्रभुनाथ ठाकुर के नेतृत्व में काम कर चुके हैं. इस पर उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उनके जैसे  कलाकार को सरकार ने बड़ा सम्मान दिया है. वे आज भिखारी ठाकुर रंगमंडल के सबसे बुजुर्ग सदस्य हैं.

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