By, Shrikant Pratyush
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जनजातीय संघर्ष और प्रतिरोध की बातें लोककथाओं और मौखिक परंपराओं में जीवित: अर्जुन मुंडा

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जनजातीय मामलों के केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि झारखंड के जनजातीय संघर्ष और प्रतिरोध की बातें इतिहास के पन्नों में भले नहीं हो, लोककथाओं और मौखिक परंपराओं में जीवित है, आवश्यकता है इन बिखरे सूत्रों को मूत्र्त किया जाए। श्री मुंडा आजादी के आदिवासी महानायक विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार को संबोधित कर रहे थे।

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सिटी पोस्ट लाइव, रांची: जनजातीय मामलों के केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि झारखंड के जनजातीय संघर्ष और प्रतिरोध की बातें इतिहास के पन्नों में भले नहीं हो, लोककथाओं और मौखिक परंपराओं में जीवित है, आवश्यकता है इन बिखरे सूत्रों को मूत्र्त किया जाए। श्री मुंडा आजादी के आदिवासी महानायक विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार को संबोधित कर रहे थे।

 

कार्यक्रम का उदघाटन करते हुए रांची विश्वविद्यालय ने इतिहास के अनछुए पहलुओं को प्रकाशित करते हुए उन्हें पुस्तक के रूप में प्रकाशित करने का सुझाव दिया। जबकि विषय प्रवेश करते हुए रांची विश्वविद्यालय में इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅक्टर दिवाकर मिंज ने कहा कि अंग्रेजों के आगमन से लेकर स्वतंत्रता प्राप्त करने तक आदिवासी महानायकों के योगदान को भले ही अब तक इतिहास के मुख्य धारा में शामिल नहीं किया गया, लेकिन इन सेमिनारों के माध्यम से इस कमी को दूर किया जा सकता है।

 

इस वर्चुअल संवाद का आयोजन इतिहास संकलन समिति द्वारा भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद नई दिल्ली और रांची विश्वविद्यालय इतिहास विभाग, पुरातत्व एवं संग्रहालय रांची विश्वविद्यालय और आईक्यूएसी रांची विश्वविद्यालय के सहयोग से किया गया था।

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