By, Shrikant Pratyush
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टांगीनाथ धाम की है अनूठी धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और पुरातात्विक पहचानः महेश पोद्दार

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झारखंड के गुमला जिले के डुमरी प्रखंड अंतर्गत मंझगांव स्थित शिवधाम “टांगीनाथ धाम” शीघ्र ही देश और दुनिया के धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित होगा।यह उपलब्धि प्रायोजित नहीं होगी, बल्कि टांगीनाथ धाम की अनूठी धार्मिक, सांस्कृतिक,  सामाजिक और पुरातात्विक पहचान के कारण होगी।

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टांगीनाथ धाम की है अनूठी धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और पुरातात्विक पहचानः महेश पोद्दार

सिटी पोस्ट लाइव, रांची: झारखंड के गुमला जिले के डुमरी प्रखंड अंतर्गत मंझगांव स्थित शिवधाम टांगीनाथ धाम” शीघ्र ही देश और दुनिया के धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित होगा। यह उपलब्धि प्रायोजित नहीं होगी, बल्कि टांगीनाथ धाम की अनूठी धार्मिक, सांस्कृतिकसामाजिक और पुरातात्विक पहचान के कारण होगी। रांची से टांगीनाथ धाम की यात्रा पर गए सैकड़ों लोगों की यह अभिव्यक्ति बताती है कि झारखण्ड में काफी कुछ ऐसा हैजिसके बारे में देश और दुनिया को बताना बाकी रह गया हैदरअसल विगत 10 वर्षों से चुपचाप टांगीनाथ धाम से लोगों को जोड़ने का अभियान जारी है। राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार की पहल से शुरू हुए इस अभियान से सैकड़ों लोग जुड़े हैं और उनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। शुरुआत दो बसों से हुई थी और अभी झारखण्ड के विभिन्न जिलों से हर साल सावन महीने में 25–30 बसें श्रद्धालुओं को लेकर टांगीनाथ धाम पहुंचती हैं। रांची से भी दो बसों में सवार होकर करीब 150 श्रद्धालु टांगीनाथ धाम पहुंचे थे। रांची से श्रद्धालुओं का काफिला गुमला पहुंचा तो स्थानीय विधायक शिवशंकर उरांव ने उनका स्वागत कियाजलपान की व्यवस्था कीरांची से गुमला तक लगातार नयनाभिराम प्राकृतिक छटा देखते हुए यात्री टांगीनाथ धाम पहुंचे तो उनकी सारी थकान काफूर हो गयीचारों ओर उंची पहाड़ियों और हरियाली के बीच एक छोटी पहाड़ी पर अवस्थित बाबा टांगीनाथ धाम। सैकड़ों शिवलिंग कतारबद्धप्राचीन (संभवतः मौर्यकालीन) स्थापत्य के नमूने जहांतहां बिखरे हुए और इनके बीच स्थित विशाल त्रिशूल और परसु (फरसा)जिसके बारे में कहा जाता है कि इसमें कभी जंग नहीं लगता। पूजापाठअनुष्ठान सबकुछ आदिवासी पुजारी जिन्हें बैगा या पाहन कहते हैंकराते हैं। यहां कोई ब्राह्मण पुजारी नहीं है। बाबा टांगीनाथ जहां विराजते हैंउसी पहाड़ी के उपरी हिस्से पर एक छोर से अविरल जलधारा निकलती है। फिलहाल मंदिर प्रबंधन समिति ने पाइप के जरिये इस जलधारा को नीचे लाकर एक जलकुंड में संग्रहित करना और श्रधालुओं के स्नानध्यान के लिए उपलब्ध कराना शुरू कर दिया हैटांगीनाथ धाम में हालत कुछ हुआ हैबहुत कुछ बाकी है। सड़कपार्किंगविश्रामागाररेलिंगशेड, बिजलीदूरसंचार आदि सुविधाओं का विकास होना बाकी है। इसके लिए कोशिश जारी है। सबसे ज्यादा जरुरी है इसके धार्मिकसामाजिकपुरातात्विक महत्व को देशदुनिया के सामने लाना। यह काम भी धीरेधीरे हो रहा हैसांसद महेश पोद्दार बताते हैं कि पूर्व केंद्रीय मंत्री सुदर्शन भगतविधानसभाध्यक्ष दिनेश उरांवराज्यसभा सांसद समीर उरांवविधायक शिवशंकर उरांव सहित टांगीनाथ धाम के विकास के लिए प्रतिबद्ध लोगों का एक समूह निरंतर इसके विकास के लिए प्रयासरत है। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भी सकारात्मक रुख प्रदर्शित किया है। जल्दी हीटांगीनाथ धाम देश और दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर स्थापित होगा

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