By, Shrikant Pratyush
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झारखंड के सुदूर इलाके की बेटियों की नई उड़ान, दसवीं के इम्तिहान में लिखी सफलता की सुनहरी इबारत

एकलव्य मॉडल बालिका विद्यालय की 53 में से 51 छात्राएं फर्स्ट, दो छात्राएं सेकेंड डिविजन पास हुईं 

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झारखंड के सुदूर गांवों की आदिवासी बेटियों ने सफलता की एक लंबी लकीर खींच डाली। इनकी मेहनत ने रंग दिखाया और 10बीं बोर्ड की परीक्षा का परिणाम आया तो हौसलों के पंख निकल आये।

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झारखंड के सुदूर इलाके की बेटियों की नई उड़ान, दसवीं के इम्तिहान में लिखी सफलता की सुनहरी इबारत

सिटी पोस्ट लाइव, रांची: झारखंड के सुदूर गांवों की आदिवासी बेटियों ने सफलता की एक लंबी लकीर खींच डाली। इनकी मेहनत ने रंग दिखाया और 10बीं बोर्ड की परीक्षा का परिणाम आया तो हौसलों के पंख निकल आये। गरीबी और अभावों को इन लड़कियों ने पढ़ाई में आड़े आने नहीं दिया। चाईबासा जिले के खूंटपानी के तोरसिंदरी स्थित एकलव्य मॉडल बालिका विद्यालय की 53 में से 51 लड़कियां 10वीं बोर्ड की परीक्षा में फर्स्ट डिवीजन से पास हुई हैं। दो ने सेंकेड किया है। इन लड़कियों की सफलता पर गावों में भी खुशियां हैं। 91.2  फीसदी अंक के साथ लक्ष्मी मुंडा ने स्कूल में टॉप किया है। उसने गणित विषय में 98 और विज्ञान में 93 अंक हासिल किया है। जबकि इस स्कूल की 10 लड़कियों को गणित में 90 फीसदी से अधिक अंक मिले हैं। जबकि विज्ञान में 14 और सामाजिक विज्ञान में 7 छात्राओं ने 90 से अधिक अंक प्राप्त किये हैं। स्कूल की टॉपर लक्ष्मी सरायकेला खरसांवा जिले के घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र कुचाई के बिजार गांव के एक साधारण किसान की बेटी है। वह वैज्ञानिक बनना चाहती है। कहती हैं, मेहनत सारी लड़कियां करती रहीं। वक्त के हिसाब से कोई ज्यादा तो कोई कम, लेकिन सबका लक्ष्य एक ही था कि अच्छे नंबरों से पास होना है। कितना अच्छा होता कि सभी 53 फर्स्ट कर जातीं। रानी कुमारी, शबनम बोदरा और नेहा सरदार ने क्रमशः दूसरा, तीसरा और चौथा स्थान प्राप्त किया है। रानी और शबनम का सपना इंजीनियर बनना है। नेहा सरदार पुलिस सेवा में जाना चाहती है। 5वी टॉपर रविना तामसोय शिक्षा के क्षेत्र में करियर गढ़ना चाहती है। इससे पहले भी इस स्कूल की आदिवासी लड़कियां शानदार सफलता हासिल करती रही हैं। एकलव्य विद्यालय दूरदराज के इलाकों के आदिवासी बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए खोला गया है। खूंटपानी के इस स्कूल का संचालन गैर सरकारी संगठन आसरा के जिम्मे है। इस स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के लिए सरकार रहने, खाने और पढ़ाई का इंतजाम करती है।

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