By, Shrikant Pratyush
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कई लोगों ने अपना रोजगार बदला, सब्जी और फल बेचकर कर रहे गुजारा

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वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण ने  दो महीने के लॉकडाउन में प्रतिदिन कमाने-खाने वाले मेहनतकशों की जिदगी में भी धीरे-धीरे बदलाव लाना शुरू कर दिया है।

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सिटी पोस्ट लाइव, कोडरमा: वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण ने  दो महीने के लॉकडाउन में प्रतिदिन कमाने-खाने वाले मेहनतकशों की जिदगी में भी धीरे-धीरे बदलाव लाना शुरू कर दिया है। कोडरमा नगर पंचायत के सड़क के किनारे ठेले पर अलग-अलग तरह की दुकानदारी व फेरी कर अपना परिवार चलानेवाले ऐसे लोगों की ज़िंदगी  उनकी प्रतिदिन की आमदनी पर चलती थी। यह तबका ऐसा है जो ना तो हाथ फैलाकर किसी से मांग सकता है और ना ही इनके पास राशन-पानी आदि देने के लिए कोई आता है। ऐसे में जमा पूंजी से दो-चार दिन  का खर्चा चल जाए तो बहुत है  ऐसे में कोई चारा न देख ऐसे दर्जनों लोगों ने अपने कारोबार को ही बदल डाला। बदले हालात में हर तरह का कारोबार करने की भी छूट नहीं है। ऐसे माहौल में सबसे आसान रास्ता हरी सब्जी व फलों का कारोबार है, सो अधिकतर लोग इसी धंधे में उतर गए। कोडरमा नगर पंचायत में वर्षों से साइकिल पर फेरी लगाकर कपड़ा बेचने वाले संदीप कुमार आजकल तरबूज और खीरा बेच रहे हैं। इनका कहना है कि लॉक डाउन के कारण फेरी लगाकर कपड़ा नहीं बेच पा रहे हैं। ऐसे में जो सामान बेचने की अनुमति सरकार ने दे रखी है उसी कारोबार को अपनाकर अपने और अपने परिवार का पेट पाल रहे हैं ।

कोडरमा बाजार चौक मोड़ पर सालों से लिट्टी की फेमस दुकान चलाने वाले भोला राम ने भी इस लॉक डाउन में अपना कारोबार बदल लिया है। इन दिनों ठेले में गलियों-मुहल्लों में हरी सब्जी बेचकर गुजारा कर रहे हैं। इनका कहना है कि घर की अर्थव्यवस्था ठीक रखने के लिए इन्होंने अपना कारोबार बदला है और जबतक लॉक डाउन रहेगा सब्जी बेचना मजबूरी है। इस धंधे में ज्यादा आमदनी तो नहीं हो पाती लेकिन तीन-चार घंटे में सौ-दो सौ रुपया की आमदनी हो जाती है। इसी से परिवार के आधा दर्जन सदस्यों का पेट भर पाते हैं। कोडरमा के ही दिलीप, बंशी, अमित कुमार आदि कई ऐसे युवक हैं जिन्होंने अपना रोजगार बदल लिया है और रेहड़ी लगाकर पूरे परिवार का जीविकोपार्जन चला रहे हैं।

 

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