By, Shrikant Pratyush
News 24X7 Hour

सात लाख रुपये खर्च कर इंफाल से दुमका पहुंचे प्रवासी श्रमिक

;

- sponsored -

लॉकडाउन-4 पहुंचते-पहुंचते तक लोगों के सब्र का बांध टूट चुका है। अपने गांव-शहर को छोड़ कर रोजगार की तलाश में हजारों किलोमीटर दूर दूसरे शहरों में गये लाखों लोगों का रोजगार छीन चुका है और इस संकट की घड़ी में रेल और हवाई सेवा बंद होने के कारण बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिक पैदल, साईकिल या मालवाहक वाहनों से अपने घर वापस लौटने की कोशिश में जुटे है।

-sponsored-

-sponsored-

सिटी पोस्ट लाइव, दुमका: लॉकडाउन-4 पहुंचते-पहुंचते तक लोगों के सब्र का बांध टूट चुका है। अपने गांव-शहर को छोड़ कर रोजगार की तलाश में हजारों किलोमीटर दूर दूसरे शहरों में गये लाखों लोगों का रोजगार छीन चुका है और इस संकट की घड़ी में रेल और हवाई सेवा बंद होने के कारण बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिक पैदल, साईकिल या मालवाहक वाहनों से अपने घर वापस लौटने की कोशिश में जुटे है। इस क्रम में बेवश प्रवासी कामगारों से मालवाहक वाहन मालिकों द्वारा भारी रकम की वसूली की जा रही है। ट्रक, कंटनेर और अन्य मालवाहक वाहनों से घर वापस लौट रहे प्रवासी श्रमिकों ने बताया कि उन्हें अपनी मातृभूमि वापस लौटने में इस संकट की घड़ी में हवाई जहाज के टिकट से अधिक का किराया भुगतान करना पड़ा।

उत्तर-पूर्व इंफाल से दुमका जिले के रामगढ़ और गोपीकांदर प्रखंड के रहने वाले 96 प्रवासी श्रमिकों ने घर वापस लौटने पर बताया कि बसों से लौटने के लिए इन्हें सात लाख रुप्ये भाड़े पर खर्च करना पड़ा। उन्होंने बताया कि लॉकडाउन प्रारंभ होने के साथ ही उनलोगों ने राज्य सरकार के एप पर ऑनलाइन फॉर्म भरे अधिकारियों और नेताओं को फोन कर गुहार लगायी, कोई रास्ता नहीं निकला, फिर भाड़े पर बस लेकर वापस लौटे। घर वापस लौटे प्रवासी श्रमिकों ने बताया कि लॉकडाउन के चलते काम बंद हो गया है, वहां रहने में कोई परेशानी नहीं थी, लेकिन हाथ धरे कब तक बैठते, झारखंड में भी कोरोना का संक्रमण फैल रहा है, इसे लेकर घर-परिवार की चिंता अलग सताने लगी और घर वापस लौटने के बाद अब उन लोगों ने खुद को क्वारंटाइन में रखने का फैसला लिया है।
वहीं 41 प्रवासी मजदूरों का एक और जत्था असम के सिल्चर से 2.35लाख रुपये खर्च कर बस से दुमका वापस लौटा।

दुमका के रामगढ़ प्रखंड अंतर्गत चिंहुटिया और शंकपुर गांव के प्रवासी मजदूर फूलचंदर ने बताया कि वे सभी इंफान में भवन निर्माण का कार्य करते थे, लॉकडाउन में काम बंद हो गया, जिसके कारण वापस लौटने का निर्णय लिया। वहीं असम के सिल्चर से 2.35लाख रुपये में बस भाड़ा देकर वापस लौटे सुसनियां गांव के रहने वाले संजय कुमार, भरत कुमार और निरंजन समेत कई मजदूरों ने बताया कि वे लोग असम में सड़क निर्माण कंपनी में मजदूरी करते थे। इन मजदूरों ने भी अपनी जेब से पैसे खर्च कर बस भाड़ा पर लेकर घर वापसी का निर्णय लिया। दूसरी तरफ ट्रक और मालवाहक वाहनों से राज्य के पलामू, गढ़वा, गिरिडीह चतरा और लातेहार जिले के वाले मजदूरों ने बताया कि उन्हें महाराष्ट्र और गुजरात से लौटने में प्रति व्यक्ति आठ से दस हजार रुपये खर्च करना पड़ा, सामान्य दिनों में इतनी राशि खर्च करने पर वे हवाई मार्ग से भी अपने गृह राज्य लौट सकते थे, लेकिन संकट के इस दौरान उन्हें कई परेशानियों से गुजरना पड़ा।

Also Read
[pro_ad_display_adzone id="49171"]

-sponsored-

-sponsered-

;

-sponsored-

Comments are closed.