सिटी पोस्ट लाइव : आरजेडी के ‘बाहुबली विधायक रीतलाल यादव के साथ रंगदारी को लेकर एक बिल्डर से हुए विवाद के बाद एक से एक बड़े खुलासे हो रहे हैं.बिल्डर के अनुसार दानापुर एरिया में घर बनाना है तो गुंडा टैक्स देना होगा. टैक्स नहीं दोगे तब जान देनी होगी. टैक्स को प्रॉपर स्टांप पेपर पर उधारी का शक्ल देकर लिखवाया जाता है. घर बनाने का सारा सामान रीतलाल यादव के परिजनों से खरीदना होगा. वे दो ट्रक गिराएंगे, 4 ट्रक का पैसा देना होगा. जो वे कहेंगे, ये मानना होगा.’
बिल्डर के अनुसार विधायक ने 2024 में 50 लाख रुपए मांगे थे. 30 लाख रुपए पर डील डन हुई थी. 4 लाख रुपए दिया भी था. वे एक साथ 30 लाख रुपए मांग रहे थे, लेकिन हम उसमें सक्षम नहीं इस मामले में रीतलाल यादव की गिरफ्तारी के बाद परिवार में डर का माहौल है. मां, बच्चे सभी डरे हुए हैं. सब मुझसे बोल रहे हैं कि ये करने की क्या जरूरत थी.लेकिन शिकायत करना हमारी मजबूरी हो गई थी.विधायक जी लगातार दबाव बना रहे थे कि पैसा दो… पैसा दो… हमारे पास फंड नहीं था, इसलिए हम नहीं दे पा रहे थे. आगे हमारे नेक्स्ट प्रोजेक्ट में भी अड़ंगा लगाया जा रहा था. इसलिए मजबूरी में परेशान होकर हमलोग पुलिस के पास गए.
बिल्डर के अनुसार 2022 में इस प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी. 2022 में हमलोग कोथवा (रीतलाल यादव का गांव) में काम करने आए थे. इससे पहले हमलोग आरपीएस, आरके पुरम और सगुना मोड़ के इलाके में काम कर रहे थे. वहां जब हमारा प्रोजेक्ट शुरू हुआ तो मालूम हुआ कि हमलोगों को इन्हें गुंडा टैक्स देना होगा. गुंडा टैक्स देंगे तभी हम काम कर पाएंगे.हमें पहला कॉल 2022 में पिंकू यादव का आया था, तब उन्होंने कहा था कि सारा मटेरियल हमसे लेना होगा. इसे हमलोगों ने एडजस्ट कर लिया था कि मटेरियल उन्हीं से खरीदा जाए.इसके बाद 2024 में विधायक जी का फोन आया कि पर फ्लैट पैसा देना होगा. कुल 50 लाख रुपए की डिमांड की गई. इसके बाद 30 लाख रुपए में हमलोगों ने फाइनल सेटलमेंट किया था.
विधायक रंगदारी की तय रकम स्टांप पेपर पर लिखवाते हैं. वे 1000 रुपए के स्टांप पेपर पर लिखवाए थे कि हमने अपने निजी कार्यों के लिए उनसे 30 लाख रुपए कर्ज लिया था. ये पैसा एक निश्चित तारिख को उन्हें लौटाएंगे.कोथवां में 38 फ्लैट बना रहे हैं. बहुत नेगोशिएट करने पर प्रति फ्लैट एक लाख रुपए पर बात बनी थी.सारा मटेरियल उन्हीं से लेते हैं. इसका वे मार्केट प्राइस से डेढ़ गुणा ज्यादा दाम लेते हैं. उनकी कोई तय कीमत नहीं होती थी. जितना वे लिख देते थे, उतना हमें देना होता था.उनकी मनमानी इस कदर थी कि वे गिराते थे दो गाड़ी और बोलते थे 4 गाड़ी. हम कुछ नहीं बोल पाते थे, हमें चुपचाप उनकी बात माननी होती थी. उनके साथ कोई बहस नहीं कर सकते थे.