By, Shrikant Pratyush
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74 हजार नियोजित शिक्षकों के फोल्डर गायब, जांच के घेरे में 22 DEO-DPO,156 BEO

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फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति में गड़बड़ी की जांच चल रही है .जांच के सिलसिले में 38 जिलों से नियोजन संबंधी रिकार्ड तलब किए गए थे. जांच के दौरान पता चला कि शिक्षकों के नियोजन इकाइयों ने बड़ा घालमेल किया गया है.इसी घालमेल को छुपाने के लिए 74000 नियोजित शिक्षकों का रिकॉर्ड गायब कर दिया गया है.

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74 हजार नियोजित शिक्षकों के फोल्डर गायब, जांच के घेरे में 22 DEO-DPO,156 BEO

सिटी पोस्ट लाइव : बिहार  के 74 हजार नियोजित शिक्षकों का फोल्डर गायब हो जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है. इस मामले को लेकर FIR दर्ज किया गया है. पुलिस अब इस बात की जांच में जुट गई है कि आखिर किसने फोल्डर गायब कर दिए? क्या है शिक्षकों के फोल्डर गायब करने की वजह? आखिरकार 74000 नियोजित शिक्षकों का नियोजन फोल्डर गायब होने का रहस्य क्या है, अभीतक किसी की समझ में नहीं आ रहा है.

गौरतलब है कि पटना उच्च न्यायालय के आदेश पर फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति में गड़बड़ी की जांच चल रही है .जांच के सिलसिले में 38 जिलों से नियोजन संबंधी रिकार्ड तलब किए गए थे. जांच के दौरान पता चला कि शिक्षकों के नियोजन इकाइयों ने बड़ा घालमेल किया गया है.इसी घालमेल को छुपाने के लिए 74000 नियोजित शिक्षकों का रिकॉर्ड गायब कर दिया गया है. मामले की जांच कर रही विजिलेंस की टीम शिक्षक नियोजन प्रक्रिया की फाइल के गायब होने से परेशान है.74000 नियोजित शिक्षकों का रिकॉर्ड उन्हें नहीं मिल रहा.

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पटना हाईकोर्ट के आदेश पर नियोजित शिक्षकों की बहाली की जांच कर रही निगरानी विभाग की जांच में 450 फर्जी नियोजित शिक्षकों के खिलाफ अबतक प्राथमिकी दर्ज की गई है. सबसे ज्यादा नवादा में 45 जहानाबाद में 42 बक्सर में 130 रोहतास में 29 भोजपुर में 16 पटना पूर्णिया अररिया मुजफ्फरपुर और मुंगेर में वही मधुबनी एवं दरभंगा में 11-11 शिक्षक शामिल हैं. करीब 234 मुखिया जिन्होंने  पंचायत नियोजन इकाई के अध्यक्ष की भूमिका निभाई है, जांच के घेरे में आ चुके हैं.उनकी गर्दन के ऊपर कार्रवाई की तलवार लटकी हुई है.

फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्त 74 हजार नियोजित शिक्षकों के रिकॉर्ड गायब मामले में विजिलेंस ब्यूरो की टीम ने बाईस जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी और 156 से भी ज्यादा प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को अपने जांच की जद में रखा है ,क्योंकि नियोजन प्रक्रिया में इनकी भूमिका अहम होती है.विजिलेंस ब्यूरो को इन अधिकारियों के द्वारा कहीं न कहीं नियोजन प्रक्रिया में घालमेल करने का शक नजर आ रहा है.

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