By, Shrikant Pratyush
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उलझ गया है बबीता मर्डर केस, ये ऑनर किलिंग है या बर्बर हत्या का मामला?

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उलझ गया है बबीता मर्डर केस, ये ऑनर किलिंग है या बर्बर हत्या का मामला?

सिटी पोस्ट लाइव : बिहार के गया जिले के बुनियादगंज स्थित पटवाटोली से बड़ी खबर आई है. एक बार फिर एक बेटी की अस्मत यहाँ सरेआम लूटी गई है.हद तो तब हो गई जब   आरोपियों ने दुष्कर्म के बाद उसके शरीर के कई टुकड़े कर दिए और फिर उसके शव को फेंककर आराम से फरार हो गए. इस विश्वास के साथ कि अब पुलिस उन तक कभी पहुंच नहीं पाएगी. हमेशा की तरह बिहार पुलिस अपने पुराने रवैये को अपनाते हुए  रटा-रटाया बयान दिया  कि मामले की जांच जारी है. फिलहाल कुछ लोग गिरफ्तार कर जेल भेज दिए गए हैं.पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद वस्तुस्थिति साफ हो पाएगी कि बच्ची के साथ रेप की घटना हुई थी या नहीं.

ये वहीँ पटवाटोली है, जहां से हर साल कई बच्चे आईआईटी पास कर बिहार का नाम रौशन करते हैं. लेकिन इसी जगह से बीते 28 दिसंबर को एक नाबालिग बच्ची (काल्पनिक नाम अस्मिता ) अचानक गायब हो गई. परिवार वालों ने दो दिनों तक काफी उसकी खोजबीन की और फिर अंत में थक हार कर गया पुलिस को इसकी सूचना दी. जांच शुरू होने से पहले ही बबीता का क्षत-विक्षत शव गया पुलिस ने बरामद कर लिया. बबीता का शव मिलते ही परिवार वाले आक्रोशित हो गए.

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 लोग भी गया पुलिस के ढुलमुल रवैये को लेकर अपनी गहरी नाराजगी जाहिर करने लगे. पुलिस ने अपने बचाव में बबीता के परिवार वालों को ही सवालों के कठघरे में खड़ा कर दिया.पुलिस ने बबीता के परिवार वालों पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि आखिर जब बबीता28 दिसबंर को गायब हुई थी तो परिजन दो दिन बीतने के बाद हमारे पास क्यों आए? जबकि उसके परिवार वालों का कहना है कि दो दिनों तक इन लोगों ने अपने स्तर पर उसे खोजने की पूरी कोशिश की, लेकिन जब बबीता नहीं मिली तो परिजन 30 दिसंबर को पुलिस के पास गए लेकिन पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करने के बजाए ढिलाई बरती.

पुलिस अपनी नाकामी छुपाने में जुटी है.पुलिस का  कहना है कि पूछताछ के दौरान लड़की की बहन ने पुलिस को बताया है कि 31 दिसंबर को लड़की घर आई थी.लेकिन  उसके माता-पिता ने उसे कहीं भेज दिया. फिर उसकी क्षत-विक्षत लाश मिली. इस बीच 7 दिन के बाद चार जनवरी को बबीता की गुमशुदगी की प्राथमिकी दर्ज की गई और फिर पुलिस ने अपनी थ्योरी के आधार पर उसके पिता के साथ-साथ बबीता के एक दोस्त को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. लेकिन अस्मिता  (काल्पनिक नाम) के परिवार वालों की मानें तो बदमाशों ने पहले अस्मिता  के साथ दुष्कर्म किया और फिर बेहरमी के साथ उसकी हत्या कर दी. गया पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आने के बाद सब कुछ साफ हो जाएगा.

इधर इस मामले को लेकर अब बिहार की राजनीति भी गरमा गई है. राजधानी पटना में भी विपक्ष ने इसको एक बड़ा मुद्दा बना दिया है.बामपंथी दलों ने शुक्रवार को कहा की उनकी एक टीम ने खुद मौका-ए-वारदात पर जाकर पूरे घटनाक्रम का जायजा लिया है. घटनाक्रम को देखने के बाद ऐसा लगता है कि गया पुलिस इस मामले में लीपापोती करने में जुटी है. पुलिस अपनी वर्दी की हनक दिखाकर मृतक बबीता के परिजनों को इस कांड में अभियुक्त बनाकर पूरे केस को रफा-दफा करना चाह रही है.

 राज्य महिला आयोग ने भी इस मामले की जांच शुरू कर दी है. राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष दिलमणि मिश्रा का कहना है कि गया पुलिस से इन्होंने चार दिन पहले इस पूरे मामले को लेकर रिपोर्ट तलब की थी. लेकिन अब तक गया पुलिस ने अपनी रिपोर्ट इनके पास नहीं भेजी है. दिलमणि मिश्रा यह भी कहती हैं कि महिला आयोग की एक टीम पटवाटोली के पावरलूम भी जाएगी और जांच के बाद दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले, इसको लेकर कदम उठाएगी.

लेकिन  जिस निर्ममता के साथ बबीता की हत्या की गई है उससे तो यहीं लगता है  कि आज भी बिहार में बेटियां महफूज नहीं हैं. अपराधी ऐसी वारदात को अंजाम देने से परहेज नहीं कर रहे.अपराधी तो बेख़ौफ़ है ही आम लोग भी पुलिस की हनक से बेपरवाह हैं.पुलिस का ईकबाल पूरी तरह से राज्य में खतम हो चूका है. राज्य सरकार की तमाम कोशिश के वावजूद अपराध पर नियंत्रण नहीं लग पा रहा है.

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