By, Shrikant Pratyush
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एक जिले से 34 सरकारी कार्यालय गायब, ढूंढने में जुटी बिहार सरकार

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अधिकारियों की जेब में सात वर्षों से चल रहे 34 कार्यालयों के लिए कई अभियंताओं (इंजीनियरों) ने कोषागार से हर महीने वेतन के नाम पर लाखों रुपये की निकासी की. जिसमें शिकायत के बाद 14 कार्यपालक अभियंताओं को दोषी माना गया है.जांच शुरू हो चुकी है.

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एक जिले से 34 सरकारी कार्यालय गायब, ढूंढने में जुटी बिहार सरकार

सिटी पोस्ट लाइव : सुपौल से एक बड़ी खबर आ रही है.खबर किसी इंसान के गायब या लापता होने की नहीं बल्कि सरकारी दफ्तरों के गायब हो जाने से सम्बंधित है. बिहार  के सुपौल  जिले से  ग्रामीण कार्य विभाग  के 34 कार्यालय ‘गायब’ हो गए हैं.सबसे ख़ास बात  इन लापता कार्यालयों के लिए कोषागार से हर महीने लाखों रुपए की निकासी भी हो रही है लेकिन कार्यालय कहाँ हैं, उनके कर्मचारी कहाँ हैं, किसी को पता नहीं है. मामला सामने आने के बाद अब इन कार्यालयों को सरकार ढूंढने में जुटी है.

 सुपौल ग्रामीण कार्य विभाग के 34 कार्यालय सात वर्षों से पेपर पर ही चल रहे हैं. आरटीआई एक्टिविस्ट अनिल कुमार सिंह की शिकायत पर जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने अंतरिम आदेश पारित कर 34 लापता कार्यालयों की जल्द से जल्द तलाश करने का निर्देश जारी कर दिया है. सात वर्षों से ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यालयों को ‘गायब’ करने के आरोपी 14 कार्यपालक अभियंताओं के विरुद्ध कार्रवाई करने की अनुशंसा भी ग्रामीण कार्य विभाग के सचिव एवं सुपौल के जिलाधिकारी से की गई है.

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सुपौल के 11 प्रखंड मुख्यालय में कार्य अवर प्रमंडल और 23 कार्य प्रशाखा खोलने के लिए सरकार ने निर्णय किया था. इसके तहत कार्य प्रशाखा कार्यालय के लिए सुपौल प्रखंड में तीन, किसनपुर प्रखंड में दो, निर्मली में एक, मरौना में दो, बसंतपुर में दो, राघोपुर में दो, प्रतापगंज में एक, सरायगढ़ भपटियाही में दो, छातापुर में तीन, त्रिवेणीगंज में तीन और पिपरा में दो कार्यालय खोलने का सरकारी निर्णय वर्ष 2012 में लिया गया था.ग्रामीण कार्य विभाग के सचिव ने सभी कार्यालयों को 1 अप्रैल, 2012 से अस्तित्व में आ जाने का निर्देश दिया था. इसके लिए सबंधित इलाके के कोषागार वेतन भुगतान होने का आदेश भी जारी किया था. लेकिन, अधिकारियों ने वेतन निकासी के लिए तीन कार्य प्रमंडल कार्यालय तो खोल दिए, लेकिन 11 कार्य अवर प्रमंडल और 23 कार्य प्रशाखा कार्यालय कागजों पर ही चलते रहे.

अधिकारियों की जेब में सात वर्षों से चल रहे 34 कार्यालयों के लिए कई अभियंताओं (इंजीनियरों) ने कोषागार से हर महीने वेतन के नाम पर लाखों रुपये की निकासी की. जिसमें शिकायत के बाद 14 कार्यपालक अभियंताओं को दोषी माना गया है.कार्यपालक अभियंता सुरेश कुमार सिंह के अनुसार कार्यालय आज तक नहीं खुल सके.इस कार्रवाई से नाराज अभियंताओं  का कहना है कि कार्यालय क्यों नहीं खुला इसके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है.

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