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राजधानी पटना के एक निजी गर्ल्स हॉस्टल में नीट (NEET) की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस घटना से आक्रोशित बिहार राज्य महिला आयोग अब पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। आयोग ने राजधानी में कुकुरमुत्ते की तरह खुले निजी छात्रावासों की सुरक्षा और व्यवस्था पर कड़ा रुख अपनाते हुए पटना जिलाधिकारी (DM) से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
DM को पत्र: निबंधित और अनिबंधित हॉस्टलों की मांगी सूची
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष अश्वमेध देवी (अप्सरा) ने पटना के जिलाधिकारी डॉ. चंद्रशेखर सिंह को पत्र लिखकर जिले में बिना पंजीकरण चल रहे निजी छात्रावासों पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए एक सप्ताह के भीतर जिले के सभी निबंधित और अनिबंधित हॉस्टलों की संख्या, वहां सीसीटीवी व महिला गार्ड जैसे सुरक्षा मापदंडों की उपलब्धता तथा छात्राओं के खाने-पीने एवं स्वास्थ्य सुविधाओं की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत जवाब मांगा है।
सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल
हाल ही में जहानाबाद की रहने वाली एक छात्रा, जो पटना के शंभू पैलेस स्थित गर्ल्स हॉस्टल में रहकर नीट की तैयारी कर रही थी, की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। इस घटना ने हॉस्टल संचालकों की मनमानी और वहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने की पोल खोल दी है। महिला आयोग की अध्यक्ष ने चिंता जताते हुए कहा कि पटना के बोरिंग रोड, कंकड़बाग और राजीव नगर जैसे इलाकों में धड़ल्ले से निजी हॉस्टल खुल रहे हैं, लेकिन वहां छात्राओं की सुरक्षा और मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य (Mental Health) की भारी अनदेखी की जा रही है।
डिप्रेशन और गलत संगत को रोकने की कवायद
आयोग ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि हॉस्टलों में निगरानी की कमी के कारण छात्राएं अक्सर डिप्रेशन का शिकार हो रही हैं या गलत संगत में पड़ रही हैं। आयोग का मानना है कि हॉस्टलों के लिए एक सख्त गाइडलाइन का होना अनिवार्य है। डीएम की रिपोर्ट मिलने के बाद आयोग उन हॉस्टलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की सिफारिश करेगा जो मानकों को पूरा नहीं करते हैं।
इस सख्ती के बाद अब पटना के हॉस्टल संचालकों में हड़कंप मचा हुआ है। प्रशासन की इस कार्रवाई का उद्देश्य शिक्षा के केंद्र बन चुके पटना में राज्य के कोने-कोने से आने वाली बेटियों के लिए एक सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करना है।