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IPS आदित्य कुमार ने कई IPS अधिकारियों की उड़ा दी थी नींद.

अपराधी गोल्डन दास के जरिये पटना से दिल्ली तक पुलिस अफसरों की करवाता था कंप्लेन.

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सिटी पोस्ट लाइव : खाकी वर्दी वाले गुंडों की कहानी तो बिहार में अक्सर सामने आती रहती है.लेकिन जब IPS रैंक के अधिकारी भी अपराधी जैसा व्यवहार करने लगे,अपराधियों के साथ साठगांठ करने लगे तब तो बात बहुत गंभीर हो जाती है.निलंबित IPS अफसर आदित्य कुमार और अपराधियों के बीच साठगांठ का नया खुलासा हुआ है. जेल में बंद अपराधी गोल्डन कुमार दास उर्फ गोल्डन दास IPS आदित्य कुमार का खास आदमी था. वह आदित्य कुमार के इशारे पर गया के तत्कालीन आईजी अमित लोढ़ा, औरंगाबाद के SP कांतेश मिश्रा पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था.

गोल्डन के खिलाफ बिहार के औरंगाबाद, गया और झारखंड के पलामू में रंगदारी, आर्म्स एक्ट, धोखाधड़ी, हत्या के प्रयास और मारपीट के कुल 15 आपराधिक मामले दर्ज हैं. सूत्रों के अनुसार यह सब जानने के बावजूद गया में SSP रहते वक्त आदित्य कुमार ने गोल्डन दास को अपने नजदीक आने दिया.गोल्डन दास पिछले दो महीने से औरंगाबाद के जेल में बंद है. उसे नवीनगर थाना की पुलिस ने आपराधिक मामले में गिरफ्तार किया था. अपने शातिरगिरी के जरिए इसने औरंगाबाद जिले के साथ ही गया, भोजपुर, नवादा सहित कई जिलों में अपनी पैठ बना रखी थी. काम करने वाले कई पुलिस अफसरों के खिलाफ इसने जिला से लेकर पटना स्थित पुलिस मुख्यालय तक मोबाइल पर मैसेज और लेटर के जरिए कंप्लेन कर रखा था. इसमें कुछ इंस्पेक्टर, डीएसपी और IPS स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं.

सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर करीब तीन महीने पुराने कुछ वैसे वीडियो दिखे, जिसमें गोल्डन दास इंटरव्यू दे रहा है. पूरी वीडियो देखने पर यह स्पष्ट हुआ कि इसने खुद से IPS अधिकारियों को मन मुताबिक कैरेक्टर सर्टिफिकेट दे दिया. इसने गया के तत्कालीन IG अमित लोढ़ा को सबसे बड़ा भ्रष्टाचारी बताया तो मुख्यालय में बैठे ADG अनिल किशोर यादव को सबसे ईमानदार अधिकारी बताया. इसने चैलेंज कर दिया कि पूरे इंडिया में अनिल किशोर यादव से बेहतर कोई दूसरा IPS है ही नहीं.

इसने औरंगाबाद के SP कांतेश मिश्रा पर भी भ्रष्टाचार का आरोप लगाया. इसने हत्या के केस में गया की वर्तमान SSP हरप्रीत कौर के उपर भी 30 लाख रुपए लेने का गंभीर आरोप लगाया. इन सब के बारे में DGP से लेकर बिहार के चीफ सेक्रेटरी और यहां तक की केंद्र सरकार को भी इसने लेटर लिख डाला था. खास बात ये है कि उसी इंटरव्यू में गोल्डन दास ने फरार IPS आदित्य कुमार को एक ईमानदार और दबंग छवि का पुलिस अधिकारी होने का अपनी तरफ से तमगा भी दिया.

IPS आदित्य कुमार का अपने से सीनियर और जूनियर, मतलब कई अफसरों से उनकी बनती नहीं थी. वर्दीधारी और एक जिम्मेदार पद पर होने की वजह से वो सीधे तौर पर किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई कर नहीं सकते थे.इस कारण गोल्डन दास के जरिए उन्होंने एक लूप लाइन तैयार किया. फिर उसे अपना माध्यम बनाया. इसके जरिए ही गया के तत्कालीन IG अमित लोढ़ा हों या फिर कोई दूसरे पुलिस वाले, उनके खिलाफ पुलिस मुख्यालय में बैठे अधिकारियों के पास एक के बाद एक अलग-अलग कई कंप्लेन करवाए. आर्थिक अपराध इकाई में दर्ज FIR की वजह से आदित्य कुमार फरार चल रहे हैं. इस कारण इस मामले में उनसे उनका पक्ष नहीं लिया जा सका है.

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