By, Shrikant Pratyush
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खाकीवाले गुंडों के निशाने पर थे SSP मनु महाराज, 175 बवाली सिपाही हुए बर्खास्त

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खाकीवाले गुंडों के निशाने पर SSP मनु महाराज, उनको निशाना बनाने को हुआ था बवाल

सिटी पोस्ट लाइव : पटना पुलिस लाइन में बवाल मामले में रविवार को पुलिस मुख्यालय ने कड़ा एक्शन लिया है. इस मामले में 175 पुलिस कर्मियों को बर्खास्त कर दिया गया है. भारी संख्या में ट्रेनी कांस्ट्रबलों पर भी गाज गिरी है. उनकी नौकरी छीन ली गई है. पुलिस मुख्यालय के इस एक्शन से कर्मियों में हड़कंप मचा हुआ है. दरअसल, शुक्रवार को पटना पुलिस लाइन में जो कुछ हुआ, वह महज संयोग और अचानक पैदा हुआ आक्रोश नहीं था. वह एक सोची समझी साजिश थी. निशाने पर एसपी, डीएसपी नहीं बल्कि खुद पटना पुलिस के एसएसपी मनु महाराज थे. इस साजिश के खुलासे के बाद एकबार फिर ये सवाल लाजिमी है कि खाकी वर्दी में कहीं गुंडे पुलिस लाइन में तो नहीं रह रहे.दरअसल, जहाँ कहीं भी छोटी बड़ी घटना- दुर्घटना होती है, सबसे पहले एसएसपी ही पहुँचते हैं. साजिश रचनेवालों को पूरी उम्मीद थी कि पुलिस लाइन में हंगामा होने पर सबसे पहले वहीं पहुचेगें. उनके पहुँचते ही उनके ऊपर जानलेवा हमले की तैयारी थी.

गौरतलब है कि एसएसपी के पुलिस लाइन में देर से पहुँचने और काफी देर से पूरी तैयारी के साथ हेलमेट पहनकर पुलिस लाइन में घुसने को लेकर सवाल उठ रहे थे. दरअसल, एसएसपी को इस साजिश की भनक पहले ही लग गई थी. तैयारी ये थी कि महिला रंगरुटो को भड़कर ,उन्हें आगे कर एसएसपी पर जानलेवा हमला कर देना है.इसके पीछे पुलिस लाइन से जुड़े वैसे कुछ लोग हैं, जिन पर एसएसपी द्वारा पूर्व में सख्त कार्रवाई की गई थी. एसएसपी से खार खाए पुलिसकर्मी बदला लेने के रंगरूटों को अपना मोहरा बनाकर एसएसपी पर हमला करेवाले थे. लेकिन समय रहते एसएसपी को इसकी भनक लग गई और वो बेनकाब हो गए. लेकिन सबसे बड़ा सवाल- क्या पुलिस महकमा अब गुंडों की जमात बन गया है. क्या पुलिस में भी गैंग वार शुरू हो गया है. जब सिपाही और नीचे के अधिकारी ही अपने एसएसपी पर हमला की साजिश रचाने लगे हैं तो फिर बचा क्या है ?

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जांच चल रही है. 365 से ज्यादा पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज हो चूका है. सूत्रों के अनुसार  घटना के दिन सुबह 6 बजे से ही साजिश का ताना-बाना बुना जाने लगा था. रणनीतिकार अपने प्यादों को इसके लिए तैयार करने में जुटे थे. शुक्रवार की सुबह लगभग आठ -साढ़े आठ बजे जैसे ही मृतक महिला सिपाही सविता पाठक का शव पुलिस लाइन आया, वे लोग अपने मिशन पर लग गये. घटना की जानकारी मिलते ही कुछ मीडिया कर्मी भी पुलिस लाइन पहुंच चुके थे.

सुबह 9 बजे  मृतक सिपाही को गार्ड ऑफ ऑनर दिए जाने का  रिहर्सल चल रहा था. सब कुछ शांत था. गमगीन माहौल था. इसी बीच डीएसपी कार्यालय के पास एक पेड़ के पास कुर्ता-पायजामा पहने नेता टाइप 4 लोग पहुंचे . उनलोगों ने इशारा कर कुछ लोगों को वहां से बुलाया. इसके 15 मिनट बाद ही सविता के शव के पास कुछ लोग आकर रोने -धोने का नाटक करने लगे.  देखते ही देखते वहां अचानक 50 लोग पहुंच गये. उसमें से कुछ लोग रंगरूटों को उकसाने लगे. उनके बहकावे में आकर वे लोग सबसे पहले डीएसपी कार्यालय के अंदर घुसे और वहां हो-हल्ला करते हुए ऊपर से नीचे तक गये और फिर वापस लौट गये. इसके बाद उसी भीड़ में मौजूद कुछ लोगों के कहने पर वे लोग डीएसपी मसलेउद्दीन के आवास पर भी उनसे मिलने गये. कुछ देर बाद डीएसपी वहां से कार्यालय में पहुंचे. उनके पहुंचने के कुछ ही देर बाद 200 से अधिक की संख्या में लोग वहां आ धमके. आते ही वे लोग नारेबाजी करते हुए डीएसपी कार्यालय में घुस गये और तोड़-फोड़ शुरु कर दी. फिर सबकुछ तहस-नहस होते चला गया.फिर क्या डीएसपी ,एसपी जो भी वहां आया पिटा गया. लेकिन जिसका इंतज़ार था उपद्रवियों को वो नहीं आया.

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