By, Shrikant Pratyush
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सहरसा पुलिस ने तेवर किये तल्ख, मगर काम करने के सलीके को अभी भी लगे हैं घुन्न

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दिन हो या रात सदर एसडीपीओ प्रभाकर तिवारी, मुख्यालय डीएसपी गणपति ठाकुर और सदर एसएचओ आर.के.सिंह जिला मुख्यालय के विभिन्य हिस्सों में पुलिसिंग करते नजर आ रहे हैं। खासकर प्रभाकर तिवारी पुलिसिया रंग में नजर आते हैं।

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सहरसा पुलिस ने तेवर किये तल्ख, मगर काम करने के सलीके को अभी भी लगे हैं घुन्न

सिटी पोस्ट लाइव : लगातार कई हत्याओं और आपराधिक वारदातों से हलकान और परेशानहाल सहरसा पुलिस अधिकारियों ने ना केवल अपने तेवर तल्ख किये हैं बल्कि उनकी गश्ती भी अब जनता को दिख रही है। दिन हो या रात सदर एसडीपीओ प्रभाकर तिवारी, मुख्यालय डीएसपी गणपति ठाकुर और सदर एसएचओ आर.के.सिंह जिला मुख्यालय के विभिन्य हिस्सों में पुलिसिंग करते नजर आ रहे हैं। खासकर प्रभाकर तिवारी पुलिसिया रंग में नजर आते हैं। जगह-जगह पर सभी तरह के वाहनों की चेकिंग करी जा रही है। लेकिन हम चेकिंग के तरीके से इत्तफाक नहीं रखते हैं। पुलिस अधिकारी दो पहिया वाहन पर ट्रिपल लोडिंग, हेलमेट और जूते चेक कर रहे हैं।

जबकि बाईक सवार के पूरे जिश्म और डिक्की सहित पूरी गाड़ी की चेकिंग जरूरी है। क्रिमिनल जब बाईक पर घूमते हैं, तो वे सारी तैयारी के साथ होते हैं। हेलमेट, जूता और गाड़ी के सारे कागजात उनके पास होते हैं। दिन से लेकर रात में चेकिंग के दौरान हेलमेटधारियों की चेकिंग भी जरूरी है। लेकिन सहरसा पुलिस इस काम में फिसल रही है। यही नहीं वैसे चौक-चौराहे जो पहले से खासे बदनाम रहे हैं,वहां पर दबिश बनाने की जगह पुलिस को नए ठिकाने की जानकारी हासिल कर वहां शख्ती दिखाने की जरूरत है। वाहन अधिनियम के अंतर्गत जुर्माना लगाने के लिए पुलिस की जगह अलग से डीटीओ, आरटीओ और एभीआई हैं।

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एसडीपीओ प्रभाकर तिवारी को चौकीदार तंत्र को मजबूत करने के साथ-साथ अपना खुफिया तंत्र विकसित करना चाहिए, जो समय-समय पर उन्हें अपराधियों से मुतल्लिक सूचनाएं दें। पुलिस का सूचना तंत्र बेहद कमजोर और फिसड्डी है। सहरसा में बढ़ता अपराध। पुलिस के सभी वरीय अधिकारियों के लिए एक बड़ी चुनौती है। एसडीपीओ प्रभाकर तिवारी कान के पतले अधिकारी हैं। उन्हें अपने विवेक का इस्तेमाल करना चाहिए। सुनी-सुनाई बातों को तवज्जो देने की जगह उन्हें आत्ममंथन करना चाहिए। वैसे तीन-चार दिनों से सहरसा जिला मुख्यालय में लोगों को जागती और काम करती पुलिस दिख रही है। यह मुस्तैदी वक्ती तौर पर ना होकर लगातार दिखनी चाहिए।

पीटीएन न्यूज मीडिया ग्रुप के सीनियर एडिटर मुकेश कुमार सिंह की रिपोर्ट

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