By, Shrikant Pratyush
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खुलासा: रिमांड होम बन गए हैं अपराध का ट्रेनिंग सेंटर, यहाँ सुधरते कम बिगड़ते ज्यादा हैं!

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खुलासा: रिमांड होम बन गए हैं अपराध का ट्रेनिंग सेंटर, यहाँ सुधरते कम बिगड़ते ज्यादा हैं!

सिटी पोस्ट लाइव : जिस तरह से पूर्णिया रिमांड होम में बाल कैदियों ने फ़िल्मी अंदाज में शूटआउट की घटना को अंजाम दिया है और दो लोगों की हत्या कर पांच बाल कैदी फरार हुए हैं, कई सवाल खड़े हो रहे हैं. रिमांड होम में शूट आउट को अंजाम देनेवाले बाल कैदी वाकई बाल कैदी हैं या फिर वो व्यस्क और शातिर अपराधी हैं? रिमांड होम में उन्हें सुधारने का काम चल रहा है या शातिर बदमाश बनाने की ट्रेनिंग दी जा रही है ? रिमांड होम के बाल कैदियों के पास पिस्टल कैसे पहुंचा? बाल कैदियों को नशे की लत कौन लगा रहा था? कौन शराब की जगह उन्हें नशा के लिए कोरेक्स कफ सिरप रिमांड होम में पहुंचा रहा था?

भागनेवाले पांच बाल कैदियों में एक स्थानीय जेडीयू नेता का पुत्र भी शामिल है. अबतक सवाल ये उठाया जा रहा था कि कहीं इस खेल का सूत्रधार नेतापुत्र तो नहीं? पूर्णिया के रिमांड होम में दो लोगों की गोली मारकर हत्या मामले में आरोपी शुभम कुशवाहा के पिता जेडीयू के नगर महासचिव अमरेंद्र कुशवाहा को पुलिस ने हिरासत में लिया है. अमरेंद्र कुशवाहा ने कई खुलासे किए हैं. कुशवाहा ने कहा कि शुभम के साथ फरार आरोपी ब्रजेश ने उनसे एक दिन कहा था कि रिमांड होम के पूर्व हाउस फादर अमर कुमार ने रिमांड होम के जज और कुछ अन्य लोगों को मारने के लिए उनको डेढ़ लाख रुपए का प्रलोभन दिया था.जेडीयू नेता ने स्वीकार किया कि दस दिन पहले उसने दवा के साथ अपने बेटा को रिमांड होम में कोरेक्स भी पहुंचाया था. उन्होंने कहा कि अगर उनका बेटा इस हत्याकांड में शामिल है तो उन्हें आजीवन कारावास की सजा हो.

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लेकिन अब तो यह नेता ही जिला प्रशासन और रिमांड होम के अधिकारियों से सवाल पूछ रहा है- खबर है कि सभी बच्चे बाईक से भागे हैं. ये बाईक कहाँ से आया ? इन बच्चों के पास बन्दूक और रोज नशा के लिए कोरेक्स कफ सिरप खरीदने के लिए पैसा कहाँ से आता था? इस सवाल का जबाब अभीतक मिला नहीं है .फरार बाल कैदी का यह पिता कहा रहा है कि अगर उसका बच्चा दोषी है .हत्या जैसा अपराध किया है तो स्पीडी ट्रायल करा कर उसे आजीवन कारावास की सजा दिलवाए प्रशासन .

न यह सवाल बड़ा संदेह पैदा करता है. इस रिमांड होम में बच्चों को सुधारने की जगह अपराध करने की ट्रेनिंग दिए जाने का संदेह पैदा होता है. यह संदेह भी स्वभाविक है कि ईन बाल कैदियों को भगाने के पीछे कहीं किसी बड़े अपराधिक गैंग का हाथ तो नहीं जो, इन बाल कैदियों का इस्तेमाल बड़े अपराधिक वारदातों को अंजाम देने के लिए करनेवाला है.स्थानीय लोगों का कहना है कि पूर्णिया रिमांड होम के अन्दर जाना और अंदर से बाहर जाना बेहद आसान है.

स्थानीय लोगों के अनुसार रिमांड होम में सुरक्षा नाम की कोई चीज नहीं है. अक्सर रिमांड होम के बाल कैदी बाहर घूमते नजर आते रहे हैं. इस रिमांड होम के फादर पर भी पैसे लेकर बच्चों को बाहर घुमाए जाने का आरोप लग चूका है. कुछ महीने पहले ही इस आरोप में उसे हटाया भी गया था.संभव है रिमांड होम के कर्मचारी ही बच्चों तक नशे के लिए कोरेक्स कफ सिरप और हथियार भी पैसे की लालच में पहुंचाते हों. इतना ही नहीं, खबर ये भी आ रही है कि रिमांड होम में नाबालिग बच्चों को ही रखे जाने का नियम है. लेकिन यहाँ तो १८ साल से ज्यादा उम्र के लोग भी रखे गए हैं ,जिन्हें कायदे से किसी जेल में होना चाहिए था. नाबालिग बच्चों के साथ किसी व्यस्क अपराधी को रखना तो बच्चों को अपराध का ट्रेनर उपलब्ध कराने जैसा है.

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