By, Shrikant Pratyush
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मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस : फिर नीतीश सरकार को SC ने लगाई फटकार, कहा-बहुत हो गया

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आप इस तरीके की चीजों की इजाजत नहीं दे सकते. सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए दो बजे तक सारे सवालों के जवाब देने को कहा है. चीफ जस्टिस ने कहा कि दिल्ली से पटना दो घंटे का रास्ता है. हम चीफ सेक्रेट्री को भी यहां खड़ा कर सकते हैं.

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मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस : फिर नीतीश सरकार को SC ने लगाई फटकार, कहा-बहुत हो गया

सिटी पोस्ट लाइव : मुजफ्फरपुर के बहुचर्चित बालिका गृहकांड मामले से जुड़ी बड़ी खबर सामने आ रही है. खबर है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को फिर फटकार लगायी है. सुप्रीम कोर्ट ने घटना को शर्मनाक और अमानवीय बताते हुए बिहार सरकार से पूछा है कि आखिर इस मामले में सरकार क्या कर रही है. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि आप बच्चों के साथ इस तरह का बर्ताव करते हैं. आप इस तरीके की चीजों की इजाजत नहीं दे सकते. सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए दो बजे तक सारे सवालों के जवाब देने को कहा है. चीफ जस्टिस ने कहा कि दिल्ली से पटना दो घंटे का रास्ता है. हम चीफ सेक्रेट्री को भी यहां खड़ा कर सकते हैं.

साथ ही चीफ जस्टिस ने बिहार सरकार के वकील से कहा कि अगर सारी जानकारी नहीं दे सकते हैं तो किसी अफसर को बुलाइए अब बहुत हो गया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम सरकार नहीं चला रहे हैं लेकिन हम आपसे ये जानना चाहते हैं कि आप कैसे सरकार चला रहे हैं? सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा कि आप कुछ कठिन सवालों के जवाब देने के लिए तैयार रहिये. इस फटकार के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के सभी मामलों को दिल्ली ट्रांसफर कर दिया. कोर्ट के इस फैसले के बाद सभी आरोपियों का ट्रायल भी अब दिल्ली में ही चलेगा. इसके लिए कोर्ट ने दिल्ली के साकेत कोर्ट को चुना है. मालूम हो कि बिहार के इस बहुचर्चित केस की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट कर रही है.

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बता दें इससे पहले भी कोर्ट ने बिहार सरकार और जांच एजेंसी को फटकार लगा चुकी है. कोर्ट ने बिहार सरकार से पूछा था कि आखिर क्यों नहीं इन बाल गृहों की पहले जांच की गई. सुप्रीम कोर्ट ने नीतीश सरकार को फटकारते हुए कहा था कि ‘राज्य सरकार 2004 से तमाम शेल्टर होम को पैसा दे रही है, लेकिन उनको पता ही नहीं है कि वहां क्या हो रहा है. उन्होंने कभी वहां निरीक्षण करने की भी जरूरत नही समझी. ऐसा लगता है कि ये गतिविधियां राज्य प्रायोजित हैं. यह सोचने का विषय है. सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए यह भी कहा था कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी अधिकारियों ने जांच देर से शुरू की.

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