By, Shrikant Pratyush
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बेगूसराय में आज राजकीय सम्मान के साथ सांसद भोला सिंह का अंतिम संस्कार

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बेगूसराय में आज राजकीय सम्मान के साथ सांसद भोला सिंह का अंतिम संस्कार

सिटी पोस्ट लाइव : बेगूसराय से लोकसभा सांसद और बिहार में बीजेपी के कद्दावर नेता भोला सिंह का शुक्रवार शाम को निधन हो गया. वह 79 वर्ष के थे. दिल्ली के आरएमएल अस्पताल में भर्ती थे. भोला सिंह के निधन की खबर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई बड़े नेताओं ने शोक जताया है. दिल्ली में श्रद्धांजलि सभा के बाद बीजेपी सांसद भोला सिंह का पर्थिव शरीर बेगूसराय पहुँच गया है.

बेगूसराय DM  राहुल कुमार ने कहा कि भोला बाबू को राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्टि की जाएगी. शनिवार को दोपहर  2 बजे उनका पार्थिव शरीर पटना एयरपोर्ट पहुंचा.3 बजे विधानसभा, 4 बजे बीजेपी प्रदेश कार्यालय, 5 बजे पटना से बाढ़ होते हुए बेगूसराय के गढ़पुरा प्रखंड अंतर्गत उनके पैतृक गांव दुनही लाया गया.गावं में उनके अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पडी है. आज 21 अक्टूबर को सुबह 7 बजे दुनही से उनका शव यात्रा चल कर 8.30 बजे बेगूसराय शहर स्थित आवास, 9 बजे गांधी स्टेडियम में उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है. फिर 12:15 बजे अंतिम संस्कार के लिए सिमरिया घाट के लिए प्रस्थान करने का कार्यक्रम है.

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बेगूसराय जिलान्तर्गत गढ़पुरा प्रखंड के दुनही गांव में 3 जनवरी 1939 में मध्यम वर्गीय किसान राम प्रताप सिंह के वे बड़े पुत्र थे. उनकी  प्रारंभिक पढ़ाई गांव से 12 किलोमीटर दूर जयमंगला उच्च विद्यालय मंझौल में हुई. इसी दौरान उनके पिता ने 21 जुलाई 1953 को मोहनपुर के सावित्री देवी से कर दी. दाम्पत्य जीवन में बंधने के बाद उच्च शिक्षा के लिए 1961 में भागलपुर विश्वविद्यालय से स्नातक में टॉपर और पीजी की पढ़ाई पटना विश्वविद्यालय से की. 1963 में भागलपुर के T. N. B कॉलेज में प्रध्यापक और 1966 में बेगूसराय के जी.डी. कॉलेज में प्रोफेसर रहे .बाद में MA से PHD भी किया.

बेगूसराय विधानसभा से 1967 में निर्दलीय चुनाव लड़े और जीत दर्ज की और लगातार जीतते ही रह गए. अपने राजनीतिक कैरियर में वे निर्दलीय, कम्युनिस्ट, कांग्रेस, राजद और बीजेपी से ताल्लुक रखे. संसदीय राजनीति में 1967-69, 1972-90, 2000-2008 तक विधानसभा के सदस्य रहे और 2009 में नवादा एवं 2014 में बेगूसराय से लोकसभा सांसद बने. भोला सिंह 1984 से 1985 तक बिहार के गृह राज्यमंत्री, 1988 से 1989 तक शिक्षा राज्यमंत्री, 2003 से 2005 तक बिहार विधानसभा के उपाध्यक्ष एवं 2008 से 2009 तक बिहार के नगर विकास मंत्री भी रहे.

भोला बाबू को लोग प्यार से दादा और उनकी पत्नी सावित्री देवी को दैया के नाम से पुकारते थे. उनके सफल राजनीतिक जीवन में दैया ने भरपूर साथ दिया. दैया ने पारिवारिक जिम्मेदारी खुद निभाई और राजनीति के लिए भोला बाबू को हमेशा परिवार की जिम्मेवारी से मुक्त रखा. दैया के कारण परिवार के सदस्य भी भोला सिंह को कभी रोका टोका नहीं. बल्कि उन्हें भरपूर सहयोग किया.

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