By, Shrikant Pratyush
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बड़गॉंव छठ मेले को राजकीय दर्जा मिलने के बाद भी नहीं मिल रही सुविधाएं

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नालंदा के बड़गॉंव छठ मेला को इस वर्ष बिहार सरकार ने राजकीय मेला का दर्जा दे दिया है बाबजूद इसके यहां आने वाले श्रद्धालुओ को किसी भी प्रकार की सुविधा मुहैय्या नहीं कराई गयी है |

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बड़गॉंव छठ मेले को राजकीय दर्जा मिलने के बाद भी नहीं मिल रही सुविधाएं

 सिटी पोस्ट लाइव – नालंदा के बड़गॉंव छठ मेला को इस वर्ष बिहार सरकार ने राजकीय मेला का दर्जा दे दिया है बाबजूद इसके यहां आने वाले श्रद्धालुओ को किसी भी प्रकार की सुविधा मुहैय्या नहीं कराई गयी है | जबकि आज से ही देश के विभिन्न क्षेत्रो से छठ व्रत धारियों का आगमन शुरू हो गया है |

छठ व्रतधारियों का कहना है की यहां न तो पेयजल सुविधा है और न ही महिलाओं के लिए कपड़े बदलने की व्यवस्था है | जबकि जिला प्रशासन के द्वारा श्रद्धालूओ को हर प्रकार की सुविधा मुहैय्या कराये जाने का प्रावधान है | वहीं  पूर्व जिला परिषद सदस्य सुधीर कुमार का कहना है इस वर्ष बिहार सरकार ने इस मेले को राजकीय मेला का दर्जा दे दिया बावजूद इसके यात्रियों को जो  सुविधाएँ मिलनी चाहिए वह नहीं मिल पाया है |

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उनका कहना है की सूर्य मंदिर तालाब का पानी पूरी तरह दूषित और गंदा हो चुका है  | उन्होंने जिलाधिकारी से इस सूर्य मंदिर तालाब की सफाई कराने का अनुरोध किया बावजूद इसके तालाब की सफाई नहीं की गयी है जबकि इसी तालाब में लोग स्नान करते हैं और इसी जल से छठ का प्रसाद भी बनाया जाता है |

इधर जब हमने प्रशासनिक तैयारी के बारे में राजगीर अनुमंडल पदाधिकारी से बात करनी चाही तो उन्होंने मीटिंग में होने का हवाला देते हुए सिलाव प्रखंड विकास पदाधिकारी से बात करने को कहा जब मैंने प्रखंड विकास पदाधिकारी को फोन किया तो उन्होंने ने भी मीटिंग में होने की बात कहते हुए फोन काट दिया |

 बड़गांव सूर्य का मंदिर देश के प्रमुख सूर्योपासना केन्द्रो में से एक है ऐसी मान्यता  हैं कि यहां छठ  व्रत करने से मनोवांक्षित फल की प्राप्ति  होती है। यही कारण है कि देश के कोने-कोने से श्रद्धालु यहां चैत और  कार्तिक महिने में चार दिनों तक प्रवास कर छठ व्रत करते  हैं। बावजूद इसके इस मेले को राजकीय मेले  का दर्जा दिया जाना दिखावा साबित  हो रहा है |

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