By, Shrikant Pratyush
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कमलनाथ के बाद छत्तीसगढ़ में बघेल ने किसानों के कर्ज को किया माफ, कहीं यह घाघनीति का हिस्सा तो नहीं

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बघेल ने 16 लाख 65 हजार से ज्यादा किसानों का कर्जा माफ करने के साथ-साथ किसानों की चिरपरिचित मांग धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में भी बढ़ोतरी कर दी है। छत्तीसगढ़ के नव निर्वाचित मुख्यमंत्री ने शपथ ग्रहण के तुरंत बाद किसानों के ऋण की माफी की घोषणा की।

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कमलनाथ के बाद छत्तीसगढ़ में बघेल ने किसानों के कर्ज को किया माफ, कहीं यह घाघनीति का हिस्सा तो नहीं

सिटी पोस्ट लाइव “विशेष” : मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 31 मार्च 2018 तक के सभी कर्जदार किसानों के दो लाख तक के कर्जे को लिखित रूप से माफ कर दिया है। वाकई इसे नेक पहल की नजर से देखा जाना चाहिए। लेकिन किसी बात में जल्दबाजी, अच्छे संकेत के संवाहक नहीं होते हैं। कमलनाथ की तर्ज पर छत्तीसगढ़ के नव निर्वाचित मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी शपथ ग्रहण के तुरन्त बाद पहला काम किसानों के हित में ही किया। बघेल ने 16 लाख 65 हजार से ज्यादा किसानों का कर्जा माफ करने के साथ-साथ किसानों की चिरपरिचित मांग धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में भी बढ़ोतरी कर दी है। छत्तीसगढ़ के नव निर्वाचित मुख्यमंत्री ने शपथ ग्रहण के तुरंत बाद किसानों के ऋण की माफी की घोषणा की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ऐलान किया था कि कांग्रेस की सरकार बनने के 10 दिनों के अंदर किसानों का कर्जा माफ कर दिया जाएगा। हाईकमान के फरमान के मद्देनजर यह कठिन फैसला लिया गया है। बघेल ने ट्विटर पर ट्वीट कर अपने इस फैसले की जानकारी को साझा किया है।
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उन्होंने बताया कि 16 लाख 65 हजार से ज्यादा किसानों का 61,000 करोड़ रुपए का कर्जा माफ कर दिया गया है। इसी के साथ उन्होंने बताया है कि धान की एमएसपी 1700 रुपए प्रति क्विंटल से बढ़ा कर 2500 रुपए प्रति क्विंटल किए जाने का फैसला राज्य सरकार ने किया है। किसानों को यह सौगात देने के अलावा बघेल ने झीरम हमले के शहीदों को न्याय दिलाने के लिए एसआईटी गठन करने का भी ऐलान किया है। वाकई यह कदम सराहनीय और जनता के हित की तरफदारी करते दिख रहे हैं लेकिन बड़ा सवाल यह है कि राज्य सरकार कर्ज माफी के ये पैसे ला कहाँ से रही है? जनता के दिये टैक्स सहित अन्य मदों से जमा पैसों से किसानों का कर्ज माफ कर वाहवाही लूटने का सिर्फ मजा ना लें नवोदित मुख्यमंत्री। उन्हें जनता को बताना चाहिए कि कर्ज माफी की जुगत उन्होंने किस मद से की है। चूंकि थोड़े से लाभ से आम जनता हड़बड़ा जाती है और गुमराह हो जाती है। जनता को लगता है कि अब उनके सवाल पूछने का हक नहीं रहा। लेकिन ऐसा नहीं है।
कर्ज माफी का यह त्वरित तरीका आगामी 2019 में लोकसभा चुनाव में अप्रत्याशित सफलता के लिए अपनाया गया है। यह सारा खेल दिल्ली में कांग्रेस टीम के कप्तान के नेतृत्व में खेला जा रहा है ।नरेंद्र मोदी को 2019 में कैसे रोका जाए, इसके लिए कांग्रेस कई चमत्कारिक फैसले ले सकती है। वैसे हम यह चाहते हैं कि घोषणा के बाद किसी तरह पहले किसानों का कर्ज माफ हो जाये।आगे बहुतों काम हैं,जिसको लेकर जनता खुद सरकार से सवाल करेगी। वैसे किसानों के बीच फेंकी गई यह रेवड़ी, घाघनीति का हिस्सा है। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने किसानों के प्रति अपने रुख के पत्ते नहीं खोले हैं। लेकिन यह तय है कि वहां भी किसानों के हित में ही फैसले लिए जाएंगे। लेकिन दो राज्यों में किसानों के लिए बुलेट रफ्तार से फैसले लिए गए और राजस्थान में फैसले की रफ्तार आखिर इतनी धीमी क्यों है? कहीं अशोक गहलोत किसानों की कर्ज माफी के साथ किसानों को कोई अलग से बड़ा तोहफा देने का मन तो नहीं बना रहे हैं। आम जनता के साथ-साथ राजनीति के जानकारों की भी अब राजस्थान पर नजर टिकी है कि वहां से कैसे फैसले निकलकर आते हैं। आखिर में हम तो ताल ठोंककर कहेंगे कि अब राजनीति पर घाघनीति पूरी तरह से हावी है।

पीटीएन न्यूज मीडिया ग्रुप से सीनियर एडिटर मुकेश कुमार सिंह की “विशेष” रिपोर्ट

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