By, Shrikant Pratyush
News 24X7 Hour

“विशेष समाचार विश्लेषण” : बिहार महागठबंधन में राजद और कांग्रेस के बीच तल्खी बढ़ी

;

- sponsored -

बिहार महागठबन्धन में बड़े भाई की भूमिका निभा रहा राजद और कांग्रेस के बीच की तल्खी और रार काफी बढ़ गया है। सीट बंटवारे से पहले कांग्रेस 11 सीट से चुनाव लड़ने की जिद पर अड़ी थी लेकिन राजद के तेजस्वी यादव ने कांग्रेस को 9 सीट देकर उसके मुंह को बन्द कर दिया।

-sponsored-

-sponsored-

“विशेष समाचार विश्लेषण” : बिहार महागठबंधन में राजद और कांग्रेस के बीच तल्खी बढ़ी

सिटी पोस्ट लाइव “विशेष समाचार विश्लेषण” : बिहार महागठबंधन में बड़े भाई की भूमिका निभा रहा राजद और कांग्रेस के बीच की तल्खी और रार काफी बढ़ गया है। सीट बंटवारे से पहले कांग्रेस 11 सीट से चुनाव लड़ने की जिद पर अड़ी थी लेकिन राजद के तेजस्वी यादव ने कांग्रेस को 9 सीट देकर उसके मुंह को बन्द कर दिया। अब हाथ आयी इस 9 सीट में कांग्रेस शिवहर से बाहुबली पूर्व सांसद आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद को चुनाव लड़ाना चाहती थी। बताना लाजिमी है कि कुछ समय पहले ही लवली आनंद ने जीतनराम मांझी की पार्टी “हम” से नाता तोड़कर कांग्रेस का दामन थामा था। बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा और बिहार कांग्रेस चुनाव प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल ने लवली आनंद को शिवहर सीट से कांग्रेस से टिकट देने का वादा और करार किया था। लेकिन तेजस्वी यादव की जिद और अकड़ की वजह से कांग्रेस लवली आनंद को शिवहर से टिकट देने में अक्षम साबित हुई। अब दो सीटें दरभंगा और सुपौल, कांग्रेस के गले की हड्डी बन रही है। दरभंगा के बीजेपी सिटिंग एम. पी.कीर्ति झा आजाद ने भाजपा से अपने निजी कारणों से नाता तोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया था।

कीर्ति आजाद ने कांग्रेस में शामिल होते हुए यह कहा था कि उनके पिता भागवत झा आजाद विशुद्ध कांग्रेसी थे और बिहार के मुख्यमंत्री भी रहे थे। सही मायने में,यह उनकी घर वापसी हुई है। दरभंगा में कीर्ति झा आजाद का बढ़िया जनाधार और खासी लोकप्रियता भी है। लेकिन तेजस्वी यादव कीर्ति झा आजाद को दरभंगा की जगह बेतिया से चुनाव लड़वाना चाहते हैं। इसको लेकर कांग्रेस काफी बिदकी हुई है। सबसे अधिक रार और तनाव अब सुपौल सीट को लेकर है,जहां रंजीता रंजन कांग्रेस की सिटिंग एम.पी. हैं। कांग्रेस ने रंजीता रंजन को सुपौल से टिकट कन्फर्म कर दिया है लेकिन सुपौल राजद रंजीता रंजन को अपना उम्मीदवार मानने से साफ इंकार कर दिया है। सुपौल के सभी राजद के बड़े नेता एक सूर में कह रहे हैं कि राजद किसी भी रूप में रंजीता रंजन को अपना उम्मीदवार नहीं स्वीकार करेगा।

Also Read
[pro_ad_display_adzone id="49171"]

-sponsored-

राजद विधायक यदुवंश यादव के नेतृत्व में राजद ने रंजीता भगाओ के नारे के साथ,आंदोलन छेड़ दिया है। राजद के नेताओं का कहना है कि रंजीता रंजन और उनके पति जाप सुप्रीमो पप्पू यादव ने मिलकर कोसी इलाके में राजद को भारी नुकसान पहुंचाया है। यानि सुपौल सीट अभी बिहार की सबसे ज्यादा गर्म सीट बनी हुई है। इधर राजद के द्वारा पप्पू यादव के लिए महागठबन्धन के द्वारा नो एंट्री की तख्ती लगाने के बाद बैकफुट पर आए पप्पू यादव सुपौल के इस नए तमाशे से बेहद आहत हैं। पप्पू यादव ने कहा है कि अगर सुपौल से उनकी पत्नी रंजीता रंजन का कांग्रेस से टिकट कटा और इसी तरह रंजीता के खिलाफ राजद का यह तेवर रहा, तो वे उन तमाम सीटों पर जहां से राजद अपने उम्मीदवार उतार रहा है,वे भी अपनी पार्टी जाप से अपना उम्मीदवार खड़ा कर के राजद को सीधा करेंगे।

यानि पप्पू यादव का बगावती तेवर अब जमीन पर दिखना शुरू हो गया है। हांलांकि यह बगावती तेवर कोसी-सीमांचल या बिहार हित के लिए नहीं बल्कि उनकी पत्नी प्रेम की वजह से है। पप्पू यादव के सूत्रों से यह खास जानकारी मिली है कि पप्पू यादव ने महागठबन्धन का हिस्सा बनने के लिए लालू प्रसाद यादव से बात की थी लेकिन लालू प्रसाद यादव ने पप्पू यादव से बिफरे और तल्ख लहजे में बात करते हुए कहा कि उनके बेटे तेजस्वी यादव को राहुल गांधी, ममता बनर्जी, मायावती, अखिलेश यादव सहित देश के कई बड़े नेता अब नेता मान रहे हैं लेकिन तुम उसके बारे में अनाप-शनाप बोल रहे हो। तुम्हें महागठबन्धन के कभी इंट्री नहीं मिलेगी। अब तुम्हें अधिक फड़फड़ाने की वजह से औकात में लाकर सबक सिखाया जाएगा। लालू प्रसाद की इस तिरस्कृत बातचीत के बाद भी पप्पू यादव ने लालू प्रसाद का गुणगान नहीं छोड़ा। उन्हें उम्मीद थी कि लालू प्रसाद यादव पिघल जाएंगे और वे तेजस्वी को उनके लिए कोई खास निर्देश देंगे। लेकिन लालू प्रसाद यादव के साथ-साथ राजद खेमा पप्पू से निकटता बढ़ाने की जगह और उग्र ही होते चले गए है। जब कहीं से कोई रास्ता नहीं बचा, तब लाचार और बेबस होकर पप्पू यादव ने मधेपुरा से अपनी पार्टी जाप से अपनी उम्मीदवारी की घोषणा की है।

कहते हैं कि राजनीति में कोई किसी का दोस्त और दुश्मन नहीं होता है बल्कि सारे रिश्ते नफा-नुकसान देखकर तय होते हैं। राजनीतिक फायदे के लिए अक्सर गहरे दोस्त भी जानी दुश्मन बन जाते हैं तो, अलग-अलग धरा के दो खांटी दुश्मन भी गले मिलते हैं। राजनीति में कब कैसी तस्वीर उभर कर सामने आ जाये,इसपर किसी का जोर नहीं चलता है । इधर विगत 12 वर्षों से सहरसा जेल में बन्द आनंद मोहन के समर्थक शिवहर से लवली आनंद को कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने से अगिया-बेताल हैं ।हांलांकि आनंद मोहन समर्थकों और खुद आनंद मोहन के भीतर खाने से जो जानकारी मिल रही है,उसके मुताबिक अब लवली आनंद के चुनाव मैदान में उतरने की जगह जेल से आनंद मोहन की ससम्मान रिहाई कैसे सम्भव हो सकेगा,सभी का ध्यान इस बात पर केंद्रित हो गया है ।पूर्वोत्तर बिहार के लोगों ने क्रांतिवीर आनंद मोहन की सम्मानजनक रिहाई को अब “जन अभियान” बनाने का फैसला लिया है ।आनंद मोहन को चाहने वाले इस सराहनीय पहल को पूरे बिहार में जन आंदोलन का रूप देने में समर्पित होकर जुट गए हैं ।इस अभियान को व्यापक फलक देने की गरज से हर गाँव के चौराहे पर एक बड़ा बैनर और हर दरवाजे पर एक पोस्टर चस्पां करने की योजना बनाई गई है जिसमें  “जो आनंद मोहन की बात करेगा, वही बिहार पर राज करेगा “का स्लोगन रहेगा ।आनंद मोहन के समथकों का कहना है कि अब सर से पानी ऊपर बहने लगा है और हद की इंतहा हो गयी है ।

विगत 12 वर्षों से एक निर्दोष नायक लौह-सलाखों में उस गुनाह की सजा भुगत रहा है, जो उन्होंने किया ही नहीं है ।सदैव ही आनंद मोहन लड़ाई वर्ग, जाति, पंथ, सम्प्रदाय और धर्म से ऊपर की रही है। वे हमेशा शोषण और अन्याय के खिलाफ चट्टान की तरह अड़कर लड़ते रहे हैं। चूंकि आनंद मोहन बिहार के सहरसा जिले के पंचगछिया गाँव के रहने वाले हैं और अभी सहरसा जेल में बन्द हैं,इसीलिए इस अभियान की शुरुआत सहरसा की धरती से ही हो रही है। आगामी 31 मार्च को सहरसा के रेनबो रिसॉर्ट में आनंद मोहन समथकों का एक बड़ा सम्मेलन होने जा रहा है जिसमें  आनंद मोहन की ससम्मान रिहाई की आवाज को बुलंद करने के लिए “जन अभियान” की शुरुआत पर गहन विचार-विमर्श होगा। वैसे विश्वस्त सूत्रों से यह जानकारी भी मिल रही है कि पूर्व सांसद आनंद मोहन और पप्पू यादव के बीच लगातार गुप्त वार्ता हो रही है। अब इन दोनों के बीच कौन से सियासी खिचड़ी पक रही है, वह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। मोटे तौर पर बिहार के राजनीतिक हालात अभी ठीक नहीं हैं। लोकसभा या कोई भी चुनाव बेहद संवेदनशील मसला होता है। ऐसे समय में राजनेताओं के जातीय और धार्मिक उन्माद से सने बयानों पर चुनाव आयोग और माननीय सुप्रीम कोर्ट को शख्त कारवाई करने की जरूरत है।

हमें तो यह समझ में नहीं आ रहा है कि बाप-दादे के नाम पर कम पढ़े-लिखे लोग राजनीति में आकर इस लोकसभा चुनाव में संविधान बचाने का नारा दे रहे हैं। जिसने संविधान के चार पन्ने भी नहीं पढ़े हैं,वे संविधान की रक्षा के सिपाही बन रहे हैं ।बड़ा सवाल है कि आखिर संविधान को हो क्या रहा है? आमलोगों के बीच इस तरह की भ्रामक जानकारियां साझा करना,बहुत बड़ा अपराध है ।माननीय सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग को इस मसले पर गम्भीर होना चाहिए। सामान्य वर्ग पर जुबानी हमले हो रहे हैं। एक विरोधी दल का बड़ा नेता कह रहा है कि सवर्ण कभी उनकी पार्टी को वोट नहीं दिया है ।लेकिन हद की इंतहा देखिए कि इसी पार्टी ने सवर्ण उम्मीदवार भी खड़े किए हैं। सत्ताधारी दल के एक नेता कहते हैं कि सवर्ण, गरीब तबके के पिछड़े परिवारों के बीच नहीं जाते हैं ।उनके हाथों का पानी नहीं पीते हैं ।ऐसे बयानवीरों पर समय रहते बड़ी कारवाई की जरूरत है ।सामान्य वर्ग के लोग भी इसी देश के नागरिक हैं। वे विदेशी नहीं हैं ।सवर्ण जातियों के पूर्वजों ने इस देश के लिए बहुतों कुर्बानियां दी हैं और यह सिलसिला आज भी जारी है।

खबर की समीक्षा की कड़ी में हम फिर एकबार कांग्रेस और राजद के बीच पनपे विवाद पर लौटते हैं ।अभी राजद और कांग्रेस के बीच जो खटास आ रही है उसकी वजह राजद की अति महत्वाकांक्षा है ।राजद आनंद मोहन,पप्पू यादव,अनंत सिंह, अरुण कुमार और राजनीतिक पारी की शुरुआत कर रहे कन्हैया कुमार को पूरी तरह से कुचलने का मन बना बैठी है ।राजद की इस एकल नीति का खामियाजा कांग्रेस सहित महागठबन्धन के सभी दलों को भोगना होगा ।वैसे बिहार में कांग्रेस दीन-हीन पार्टी की तरह राजद का किट संभाल रही है ।अभीतक किसी कांग्रेसी नेता ने तेजस्वी के बारे में कोई तल्ख बयान नहीं दिया है ।इससे यह साफ जाहिर होता है कि कांग्रेस वही करेगी,जो राजद के नेता तेजस्वी यादव चाहेंगे ।राजनीतिक समीक्षकों के साथ-साथ जहां तक हमारी समझ जा रही है,उसके मुताबिक कोई बड़ा कारण है जिसकी वजह से बिहार में महागठबन्धन खुद से अपना नुकसान कराता दिख रहा है ।निसन्देह,कांग्रेस और राजद की इस किचकिच का फायदा एनडीए को मिलकर रहेगा ।

पीटीएन न्यूज मीडिया ग्रुप के सीनियर एडिटर मुकेश कुमार सिंह का “विशेष समाचार विश्लेषण”

-sponsered-

;

-sponsored-

Comments are closed.