By, Shrikant Pratyush
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विचार-पेट्रोल-डीजल की कीमत में बढ़ोतरी और कटौती का सच समझिए

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विचार-पेट्रोल-डीजल की कीमत में बढ़ोतरी और कटौती का सच समझिए

सिटी पोस्ट लाइव : गुरुवार को केंद्र सरकार ने डीजल पेट्रोल की कीमत में ढाई रुपये की कमी लाने का एलान ऐसे किया मानों उसने जनता को कितनी बड़ी राहत दे दी है.लेकिन जिस मंत्री ने आज ढाई रुपये की कमी का एलान किया जब वो विपक्ष में थे तो उनका कहना था कि अंतराष्ट्रीय बाज़ार में अगर कच्चे तेल की कीमत  90 डालर प्रति बैरल है तो पेट्रोल 50 रुपये लीटर होना चाहिए . कच्चे तेल की कीमत 90 से 50 डालर प्रति बैरल से कम तो  हो गई लेकिन पेट्रोल की कीमत 50 रुपये नहीं हुई. जाहिर है तेल को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्थिति जो पहले थी वैसी ही आज भी

है. लेकिन डीजल पेट्रोल की कीमत अपने देश में आसमान छो रही है.देखते देखते देश के कई शहरों में 90 रुपये लीटर से अधिक दाम पर पेट्रोल बिकने लगा था. सरकार ने आज सरकार ने पेट्रोल और डीज़ल पर डेढ़ रुपया कम कर दिया है. तेल कंपनियां अपनी तरफ से एक रुपया प्रति लीटर दाम कम करेंगी.कुल मिलाकर केंद्र सरकार और तेल कंपनियों ने मिलकर ढाई रुपये प्रति लीटर दाम कम किए हैं.राज्य सरकारों का जो वैट है, वो परसेंटेज में है, कुछ का 31 परसेंट है कुछ का कम है. क्रूड का दाम बढ़ता है तो सेंटर का रेवेन्यू उतना ही रहता है. क्योंकि सेंटर जो एक्साइज़ ड्यूटी लगाती है वह पिछले साल अक्तूबर से अबतक 19 रुपये 48 पैसे पर फिक्स ही है.  क्रूड ऑयल का दाम बढ़ने से स्टेट्स का रेवेन्यू बढ़ता जाता है. राज्यों की कमाई इसलिए बढ़ती है क्योंकि डीलर को जिस दाम पर तेल कंपनियां देती हैं उस पर वैट लगाती हैं.तेल कंपनियां जितना महंगा तेल डीलर को देंगी, वैट से उतनी ही कमाई राज्य सरकारों की बढ़ती जाएगी.

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हम आपको बता दें कि मोदी सरकार के कार्यकाल के पहले चार साल में पेट्रोलियम सेक्टर से कुल कमाई कितनी हुई. कस्टम, एक्साइज, वैट, क्रूड ऑयल सेस सहित कई प्रकार के टैक्स से 18 लाख 23, हज़ार 760 करोड़ कमा चुके हैं. इसमें से भारत सरकार की कमाई 11 लाख 4 हज़ार 72 करोड़, राज्यों की कुल कमाई 7 लाख 19,688 करोड़ रही.ये आंकड़े मार्च 2018 तक के हैं. ये सारे आंकड़े पेट्रोलियम मंत्रालय के हैं. अप्रैल 2014 में पेट्रोल पर सेंटर का उत्पाद शुल्क 9 रुपये 48 पैसे था. 4 अक्तूबर को ढाई रुपये की कटौती के बाद भी 16 रुपये 98 पैसे है. अप्रैल 2014 के हिसाब से देखें तो पेट्रोल पर करीब 70 परसेंट टैक्स बढ़ा है. जबकि अप्रैल 2014 में डीज़ल पर एक्साइज़ ड्यूटी 3 रुपये 65 पैसे लीटर थी जो आज की कटौती के बाद भी 12 रुपये 83 पैसे लीटर है. अप्रैल 2014 की तुलना में आज केंद्र सरकार डीज़ल पर करीब 300 परसेंट ज़्यादा टैक्स ले रही है.

1 जनवरी 2018 से अब तक दिल्ली और मुंबई में पेट्रोल करीब 14 रुपया महंगा हुआ है. आज की कटौती के बाद 5 रुपये सस्ता होगा तो कितनी राहत होगी. 1 जनवरी 2018 को मुंबई में पेट्रोल 77.87 रुपये लीटर था. 31 अगस्त को मुंबई में पेट्रोल 85 रुपया 93 पैसे लीटर था. 4 अक्तूबर को मुंबई में पेट्रोल 91.34 पैसे लीटर है. सेंटर, तेल कंपनियां और महाराष्ट्र ने मिलकर 5 रुपये कम किए हैं. 5 अक्तूबर से मुंबई में पेट्रोल 86 रुपये 34 पैसे हो जाएगा.

बिहार ने जल्दबाज़ी नहीं दिखाई है. उप मुख्यमंत्री ने कहा है कि वित्त मंत्री का पत्र मिलने पर विचार करेंगे. अन्य पक्षों के बारे में सोचेंगे.मध्य प्रदेश, गुजरात, यूपी, छत्तीसगढ़, असम और त्रिपुरा ने भी ढाई रुपये कम कर दिए हैं. जबकि झारखंड ने डीज़ल की कीमतों में ढाई रुपये की कमी तो की मगर पेट्रोल के दाम नहीं घटाए हैं.क्या सरकार इतना ही कर सकती थी, आने वाले दिनों में जब दाम बढ़ेंगे तो तब क्या करेगी.

सोचिए कितना टैक्स दिया है जनता ने. यही नहीं रुपये को लेकर जिस तरह की राजनीति हुई उसे भी याद रखना चाहिए. किस तरह से उसे आर्थिक संदर्भों से काटकर सम्मान और स्वाभिमान से जोड़ दिया गया. चुनाव से पहले और चुनाव के दौरान ही नहीं हुआ बल्कि सरकार में आने के बाद भी प्रधानमंत्री ने रुपये की मज़बूतों को सम्मान और स्वाभिमान से जोड़ते रहे. सवाल है कि अब किससे जोड़ना चाहेंगे.

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