By, Shrikant Pratyush
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विशेष : देश में पहली बार एम्स निर्माण को लेकर हो रहा है चरणबद्ध आमरण अनशन

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आपने देश में कई आंदोलन देखे होंगे लेकिन सहरसा में हो रहा आमरण अनशन बिल्कुल नए तरीके और बेहद गम्भीरता से चल रहा है। यूँ तो विगत कई महीनों से, सहरसा में विभिन्य सामाजिक संगठनों के बैनर तले सहरसा में एम्स निर्माण हो, इसके लिए विभिन्य तरीके से आंदोलन होते रहे हैं और आवाज बुलंद होती रही है। लेकिन इस बार आंदोलन ने “हक लेकर ही रहेंगे” का रुख अख्तियार कर लिया है।

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विशेष : देश में पहली बार एम्स निर्माण को लेकर हो रहा है चरणबद्ध आमरण अनशन

सिटी पोस्ट लाइव, विशेष : आपने देश में कई आंदोलन देखे होंगे लेकिन सहरसा में हो रहा आमरण अनशन बिल्कुल नए तरीके और बेहद गम्भीरता से चल रहा है। यूँ तो विगत कई महीनों से, सहरसा में विभिन्य सामाजिक संगठनों के बैनर तले सहरसा में एम्स निर्माण हो, इसके लिए विभिन्य तरीके से आंदोलन होते रहे हैं और आवाज बुलंद होती रही है। लेकिन इस बार आंदोलन ने “हक लेकर ही रहेंगे” का रुख अख्तियार कर लिया है। बीते 24 दिसम्बर से एम्स निर्माण संघर्ष समिति के बैनर तले समिति के अध्यक्ष विनोद झा और समिति के संयोजक लोजद के प्रदेश महासचिव सह समाजसेवी प्रवीण आनंद सहित 14 लोगों ने सात दिवसीय आमरण अनशन किया था। 31 दिसम्बर को समिति के जब सात दिन पूरे हो गए तो आमरण अनशनकारियों का जत्था बदला। 31 दिसम्बर से पीपुल्स पॉवर के बैनर तले एक्स बीडीओ डॉक्टर गौतम कृष्ण के नेतृत्व में छः लोगों ने आमरण अनशन की शुरुआत कर दी है। एम्स निर्माण के लिए हुए पहले आंदोलन में भी आंदोलनकारियों ने यह स्पष्ट कर दिया था कि सबसे पिछड़े इलाके कोसी के सहरसा में ही एम्स का निर्माण हो।

एम्स निर्माण संघर्ष समिति ने अपनी भगीरथ कोशिश से सरकार द्वारा तय भूमि 217 एकड़ भूमि भी खोज निकाली और सरकारी अधिकारी की देखरेख में उसकी माँपी भी करवाई। बात उससे भी आगे बढ़ी और तत्कालीन जिलाधिकारी विनोद सिंह गुंजियाल ने भूमि उपलब्धता की लिखित जानकारी राज्य सरकार को सौंप दी। लेकिन इतना सब होने के बाद एक अफवाह फैली की अब एम्स का निर्माण दरभंगा में होगा। आंदोलनकारियों के साथ इलाके के लोग भी इस जानकारी से बेहद आहत हुए। अब आलम यह है कि लोकतंत्र में सबसे आखिरी आंदोलन भूख हड़ताल पर लोग उतर गए हैं। बीते 24 दिसम्बर से भूख हड़ताल जारी है और अनशनकारियों का साफ कहना है कि इसबार यह आमरण अनशन तबतक जारी रहेगा, जबतक सरकार सहरसा में एम्स निर्माण की घोषणा नहीं कर देती है। आमरण अनशन के दूसरे चरण में अपने छःसाथियों के साथ नौकरी छोड़कर समाजसेवा में आये एक्स बीडीओ गौतम कृष्ण ने कहा कि एम्स सहरसा की जरूरत है।यहाँ छोटी बीमारी भी मौत की वजह बन जाती है।

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वे अपने छः साथियों के साथ सात दिनों तक आमरण अनशन पर रहेंगे और उसके बाद फिर एक अलग सामाजिक टीम आमरण अनशन पर बैठेगी और यह सिलसिला तबतक चलेगा, जबतक सरकार सहरसा में एम्स निर्माण की घोषणा नहीं कर देती है। आमरण अनशन पर ना तो सुरक्षा की कोई व्यवस्था थी और ना ही रात्रि में बिजली की। हमने पहले इस बाबत डॉक्टर गौतम कृष्ण से सवाल किए तो उन्होंने कहा कि एसपी राकेश कुमार से हमने बात करनी चाही लेकिन एसपी ने हमसे बात नहीं की। उनका कहना था कि कुछ दिन पहले बढ़ते अपराध के खिलाफ हमने एसपी का पुतला फूंका था,इसलिए वे हमसे बात नहीं करेंगे। हमने कोसी रेंज के डीआईजी सुरेश प्रसाद चौधरी से भी बात की और कहा कि सहरसा में रोज गोलीबारी की घटना घट रही है,उससे उन्हें भी जान का खतरा लग रहा है। इसपर डीआईजी बोले कि बताइए कौन है आपका दुश्मन जो आपपर गोली चलाएगा। अब आप ही बताइए कि कोई हमसे ईजाजत लेकर हमें गोली मारेगा।

डीआईजी भी संवेदनहीनता की पराकाष्ठा से हमसे बात कर रहे थे। उनकी नजर में एक आम इंसान की जिंदगी की कोई कीमत हमें नहीं दिखी। हमने अनशन स्थल का रात्रि के साढ़े ग्यारह बजे जायजा लिया, तो हमें सभी अनशनकारी बेहद असुरक्षित लगे। डॉक्टर की टीम एकबार जरूर आयी लेकिन उनका रवैया भी महज खानापूर्ति वाला था। हमने डॉक्टर गौतम कृष्ण से यह सवाल भी किया कि आपने एक अच्छी नौकरी क्यों छोड़ी और समाजसेवा या फिर राजनीति का क्षेत्र क्यों चुना? इसके जबाब में श्री कृष्ण ने कहा कि वे बेहद गरीबी में पढ़े थे। उनके मामा ने उन्हें पढ़ाया था। वे बीडियो बने। एक पद उन्हें जरूर मिला लेकिन सिस्टम के काम करने के तरीके से वे बेहद परेशान थे। वे भ्रष्टाचार के दलदल में फंसना नहीं चाहे, इसलिए नौकरी को ठोकर मार दी और समाजसेवा की राह पकड़ ली।

वे सहरसा के रहने वाले हैं और इलाके के सभी जनप्रतिनिधि को वे जनता हित में जगाकर रहेंगे। सहरसा को लगातार चला जा रहा है। बीते 25 वर्षों के दौरान सहरसा रेलवे ओवर ब्रिज का चार बार शिलान्यास हुआ है लेकिन निर्माण कार्य आजतक शुरू नहीं हुआ है। बरसात के मौसम में सहरसावासी घर से निकलना छोड़ देते हैं। एक पर्यटन स्थल मत्स्यगंधा झील है, जिसका पानी कब का सुख चुका है और वहां सैर-सपाटे की जगह लोग कबड्डी खेल रहे हैं। वाकई जिस अंदाज में इस अनशन का आगाज हुआ है और इसके चरणबद्ध चलने की बात की जा रही है, इससे यह ना केवल देश का बेहद नया आंदोलन प्रतीत हो रहा है बल्कि यह भी लग रहा है कि यह अनशन सरकार की कुर्सी को हिलाकर रखेगा। अब आगे यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि सूबे के मुखिया नीतीश कुमार इस अनशन को कितनी गम्भीरता से लेते हैं और केंद्र सरकार तक इस अनशन को कैसे पहुंचाते हैं?लेकिन इतना तो जरूर है कि कोसी के सहरसा में एम्स के निर्माण होने से इस इलाके के विकास के कई पट एक साथ खुल जाते।

पीटीएन न्यूज मीडिया ग्रुप से सीनियर एडिटर मुकेश कुमार सिंह की “विशेष” रिपोर्ट

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