By, Shrikant Pratyush
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विशेष : पूर्व मंत्री और पार्टी से निष्काषित मंजू वर्मा ने बड़ी फजीहत के बाद किया सरेंडर

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मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड से उनके पति के तार जुड़ने के बाद पहले तो, मंत्री मंजू वर्मा काफी बिफरी थीं और लगातार काफी तल्ख बयानबाजी करती रही थीं। लेकिन मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड के मास्टर माइंड और मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर पर जैसे-जैसे शिकंजा कसता गया मंजू वर्मा के पति चंद्रशेखर वर्मा और समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा के तेवर नरम पड़ते गए।

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विशेष : पूर्व मंत्री और पार्टी से निष्काषित मंजू वर्मा ने बड़ी फजीहत के बाद किया सरेंडर

सिटी पोस्ट लाइव : विगत कई महीनों से आँख मिचौली और राजनीतिक रस्साकसी के बाद आज घर में कारतूस रखने के मामले में  पूर्व मंत्री मंजू वर्मा ने मंझौल अनुमंडल न्यायालय में सरेंडर कर दिया। सरेंडर के दौरान पहचान छिपाने की गरज से मोहतरमा ने बुर्का पहनकर सरेंडर किया। गौरतलब है कि मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड से उनके पति के तार जुड़ने के बाद पहले तो, मंत्री मंजू वर्मा काफी बिफरी थीं और लगातार काफी तल्ख बयानबाजी करती रही थीं। लेकिन मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड के मास्टर माइंड और मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर पर जैसे-जैसे शिकंजा कसता गया मंजू वर्मा के पति चंद्रशेखर वर्मा और समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा के तेवर नरम पड़ते गए। आखिरकार पुलिस की तफ्तीश ज्यों-ज्यों आगे बढ़ी चंद्रशेखर वर्मा की बालिका गृह कांड में परोक्ष अथवा अपरोक्ष संलिप्ता की बदबू बाहर निकलने लगी।

पुलिस ने इसी दौरान तत्कालीन समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा के घर पर छापेमारी की, जहां से कई आपत्तिजनक कागजात और दस्तावेज सहित जिंदा कारतूस बरामद हुए। इस छापामारी के दौरान मंजू वर्मा का रसूख हिलोरें ले रहा था। लेकिन पुलिस की शख्ती और विरोधी दल के आक्रामक रवैये की वजह से पति चंद्रशेखर वर्मा के साथ-साथ मंजू वर्मा पुलिस से बचने के लिए कहीं छुप गए। इधर सूबे के मुखिया नीतीश कुमार पर विरोधी दल ने जबरदस्त हमले शुरू कर दिए। नीतीश कुमार की इस जघन्य अपराध मामले में खूब किरकिरी होने लगी ।पुलिस की लगातार दबिश की वजह से बीते 29 अक्टूबर को चंद्रशेखर वर्मा ने बेगूसराय के मझौल अनुमंडल न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया ।इधर मंजू वर्मा के प्रति सरकार का रुख भी बेहद कड़ा हो गया जिस कारण से मंजू वर्मा को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा ।लेकिन इधर घर में कारतूस रखने के मामले में पुलिस और अदालत के रुख काफी शख्त हो गए ।

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सरकार ने पहले तो अपनी नाक बचाने के लिए मंजू वर्मा को पार्टी से निष्काषित कर दिया। पार्टी का हाथ अपने सर से हटते ही मंजू वर्मा काफी कमजोर हो गयी। इधर उनके घर पर पहले कुर्की-जब्ती का इश्तेहार चस्पां किया गया। लेकिन फिर भी मंजू वर्मा सामने नहीं आईं। थक-हारकर पुलिस ने बड़ी बेदर्दी से उनके घर कुर्की-जब्ती की कार्रवाई की। घर में सिर्फ कारतूस मिले लेकिन उसको जिन हथियारों में इस्तेमाल किया जाता, वे हथियार नहीं मिले। चंद कारतूस मंजू वर्मा के गले की हड्डी बन गयी। बड़ी फजीहत और किरकिरी के बाद लगातार पुलिसिया दबिश से तंग आकर आज मंजू वर्मा ने मझौल अनुमंडल न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया। मंजू वर्मा के पति पहले से जेल में हैं। बताना लाजिमी है कि मंजू वर्मा की फरारी को लेकर विरोधी दल लगातार यह आरोप लगा रहे थे कि मंजू वर्मा सूबे के मुखिया नीतीश कुमार के घर में छुपी हुई है।

अब जबकि मंजू वर्मा समर्पण कर चुकी हैं, तो आगे यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि पुलिस उन्हें कब रिमांड पर लेती है और आगे उनसे क्या-क्या पूछताछ करती है। राजनीतिक समझ वाले लोगों की निगाह इस बात पर भी टिकी है कि मंजू वर्मा को अदालत कहीं बालिका गृह मामले में भी तो नहीं घसीटती है और कितना दोषी मानती है। निगाहें इस बात पर भी टिकी है कि न्यायालय मंजू वर्मा के लिए क्या सजा मुकर्रर करती है। वैसे मंजू वर्मा के आत्मसमर्पण से जदयू ने राहत की गहरी सांस ली है।जाहिर तौर पर आगामी 2019 चुनाव पर भी मंजू वर्मा प्रकरण अपना कुछ ना कुछ असर जरूर छोड़ती। अब मंजू वर्मा को भी जेल भेजने की तैयारी चल रही है। यह बिल्कुल सच है कि पाप का घड़ा एक दिन जरूर फूटता है। मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड बिहार की बेहद दर्दनाक घटना है। बिहार के दामन पर इस कांड ने गहरा दाग लगाया है। उस कांड से जुड़े प्यादे से लेकर वजीर और राजा को भी कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

पीटीएन न्यूज मीडिया ग्रुप के सीनियर एडिटर मुकेश कुमार सिंह का समाचार विश्लेषण

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