By, Shrikant Pratyush
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“विशेष” : सहरसा में एम्स निर्माण को लेकर नीतीश कुमार की बेफिक्री का शरद यादव ने किया खुलासा

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सहरसा में बीते चार वर्षों से एम्स निर्माण संघर्ष समिति के बैनर तले दर्जनों सामाजिक संगठन साझा तरीके से आंदोलन कर रहे हैं। इलाके लोग विभिन्य संगठनों के माध्यम से धरना, प्रदर्शन, सड़क जाम, बाजार बंद, मौन जुलूस, सत्याग्रह और भूख हड़ताल तक कर चुके हैं।

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“विशेष” : सहरसा में एम्स निर्माण को लेकर नीतीश कुमार की बेफिक्री का शरद यादव ने किया खुलासा

सिटी पोस्ट लाइव “विशेष” : सहरसा में बीते चार वर्षों से एम्स निर्माण संघर्ष समिति के बैनर तले दर्जनों सामाजिक संगठन साझा तरीके से आंदोलन कर रहे हैं। इलाके लोग विभिन्य संगठनों के माध्यम से धरना, प्रदर्शन, सड़क जाम, बाजार बंद, मौन जुलूस, सत्याग्रह और भूख हड़ताल तक कर चुके हैं। अभी सहरसा स्टेडियम परिसर के बाहर नारी शक्ति का सात दिवसीय सत्याग्रह चल रहा है। सत्याग्रह का आज पांचवा दिन है। यह नारी सत्याग्रह जिला पार्षद प्रियंका आनंद के नेतृत्व में चल रहा है। बीते 30 जनवरी को सामाजिक कार्यकर्ता डॉक्टर गौतम कृष्ण के नेतृत्व में सहरसा स्टेडियम परिसर के बाहर एम्स का निर्माण सहरसा में हो, इसके लिए महापंचायत का आयोजन हुआ था जिसमें हजारों की संख्यां में लोगों ने हिस्सा लिया था। पिछले साल पिछड़ा वर्ग सम्मेलन के दौरान एम्स निर्माण को लेकर युवाओं ने नीतीश कुमार को काले झंडे भी दिखाए थे।

यही नहीं सहरसा के सिहौल में इसी साल जनवरी माह में पॉवर ग्रिड के शिलान्यास के दौरान मंच पर ही मधेपुरा के सांसद पप्पू यादव ने नीतीश कुमार से एम्स का निर्माण सहरसा में हो इसकी चर्चा की थी। सहरसा में एम्स निर्माण हो इसके लिए खगड़िया के सांसद महबूब अली कैसर ने इसी वर्ष 7 जनवरी को ही केंद्रीय स्वास्थ्य और समाज कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा को पत्र लिखा था। राजनीतिक मजबूरी की वजह से 16 जनवरी को राजद के राज्यसभा सांसद प्रोफेसर मनोज झा ने केंद्रीय मंत्री जे.पी.नड्डा को सहरसा में एम्स निर्माण हो, इसके लिए पत्र लिखा है। यही नहीं राज्यसभा सांसद शरद यादव ने भी माननीय केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जे.पी.नड्डा को पत्र लिखा था। शरद जी के पत्र का जबाब आया है जिसने बिहार सरकार के मुखिया नीतीश कुमार की बड़ी उदासीनता पर से पर्दा उठा दिया है।

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को लिखे पत्र में शरद जी ने कहा था कि कोशी देश का सबसे पिछड़ा और दुर्गम इलाका है। विकृत जलवायु और लौह रसायन युक्त जल के कारण यह इलाका जटिल रोग की फसल तैयार करती है। गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को ईलाज के लिए बड़ी कठिनाइयों और तकलीफ का सामना करना पड़ता है। शरद यादव के मुताबिक एम्स निर्माण हेतु आवश्यक 217 एकड़ जमीन उपलब्ध होने की सूचना सहरसा के तत्कालीन डी. एम. विनोद सिंह गुंजियाल ने सरकार तक पहुँचा दी है। इसके बावजूद एम्स निर्माण सहरसा में हो, इसकी घोषणा नहीं हुई। उन्होंने कहा है कि सहरसा में एम्स खुलेगा तो विकास के कई रास्ते खुलेंगे।केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने शरद यादव के पत्र को गंभीरता से लेते हुए एम्स की घोषणा संबंधी जानकारी दी है। केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव सुनील शर्मा ने जारी पत्र में कहा है कि राज्य सरकार ने बिहार में दूसरे एम्स के लिए कोई उपयुक्त स्थल की जानकारी अभी तक नहीं ढ़ी है।

वैकल्पिक स्थलों की पेशकश की जिम्मेदारी सरकार की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2015 -16 के बजट भाषण में भारत सरकार के वित्त मंत्री ने 5 नए एम्स की स्थापना की घोषणा की थी। इस में जम्मू-कश्मीर, पंजाब,तमिलनाडु,हिमाचल प्रदेश और असम शामिल हैं। बिहार में एम्स के समान इंस्टीट्यूट स्थापना का प्रस्ताव है। विभाग ने 8 जून 2015 को ही बिहार के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर 3 से 4 क्षेत्रों के चयन की रिपोर्ट तलब किया गया था। जिसमें 200 एकड़ जमीन के साथ फोर लेन सड़क संपर्क, पर्याप्त पानी की आपूर्ति, जरूरत के अनुरूप विद्युत कनेक्शन एवं अन्य बुनियादी ढांचे को ध्यान में रखकर रिपोर्ट मांगी गई थी। सहरसा में आवश्यकता अनुरूप जमीन, पानी का प्रचुर भंडार, विद्युत स्रोत, हवाई अड्डा और सड़क सम्पर्क मौजुद हैं।

सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, पुर्णिया, अररिया कटिहार समेत आसपास के जिलों में स्वास्थ्य सुविधा नदारद हैं। शरद यादव के द्वारा सहरसा के आम जनमानस की एम्स की मांग के लिए लागातार किए जा रहे प्रयास को जायज ठहराते हुए, अब नीतीश कुमार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। शरद यादव ने सीधे तौर पर सहरसा में एम्स निर्माण की घोषणा में देरी के लिए नीतीश कुमार को दोषी ठहराया है। आगे लोकसभा चुनाव है। आखिर क्या वजह है कि नीतीश कुमार केंद्र को सहरसा का प्रस्ताव नहीं भेज रहे हैं? बेहतर और समृद्ध कोसी बनाने के लगातार दावे करने वाले नीतीश कुमार को कौन सा राजनीतिक लोभ सहरसा के प्रति उदासीन बना रहा है? अब सीधे तौर पर नीतीश कुमार की हीला-हवाली और उनकी बेरुखी सहरसा में एम्स निर्माण की घोषणा के अवरोधक हैं।

जाहिर तौर पर अब नीतीश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोलने और उनके विरुद्ध आंदोलन तेज करने की जरूरत है। धरदार आंदोलन ही नीतीश कुमार को सहरसा का प्रस्ताव केंद्र को भेजने के लिए विवश कर सकता है। इधर शरद यादव के इस महाप्रयास के लिए लोकतांत्रिक जनता दल के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य नवल किशोर, प्रदेश युवा महासचिव उमर हयात उर्फ गुड्डू, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश महासचिव नूर अहमद राईन, युवा अध्यक्ष धीरेंद्र यादव प्रदेश, उपाध्यक्ष रितेश रंजन, प्रदेश महासचिव प्रवीण आनंद, सहरसा जिलाध्यक्ष धनिकलाल मुखिया, वीरेंद्र शेखर पासवान, शिवेंद्र कुमार यादव, धीरेंद्र प्रसाद यादव, रमेश यादव, नवीन राम, मानवेंद्र ठाकुर खोखा, शुभंकर शर्मा, अभिनंदन मंडल, श्रीकांत शाह उदय चंद्र साह, सुरेंद्र पासवान, झमेली दास, प्रभात रंजन यादव, रणविजय यादव, रविंद्र,संजीव, जयसवाल, बृज किशोर पौदार, बिजेंद्र प्रसाद यादव, राजनीति प्रसाद यादव, रतन यादव सहित अन्य लोगों ने शरद यादव के प्रति आभार व्यक्त किया है।

पीटीएन न्यूज मीडिया ग्रुप से सीनियर एडिटर मुकेश कुमार सिंह की “विशेष” रिपोर्ट

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