By, Shrikant Pratyush
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“विशेष”: पप्पू यादव मधेपुरा सीट से अपनी पार्टी जाप से लड़ेंगे लोकसभा चुनाव

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बिहार के सबसे हॉट मधेपुरा संसदीय सीट पर से लगभग धुंध छंट चुकी है। जदयू ने जहां दिनेश चंद्र यादव पर अपना दांव खेला है, वहीं सभी पार्टियों के द्वारा नकारे जा चुके पप्पू यादव अपनी पार्टी जाप से मधेपुरा सीट से चुनाव लड़ने का मन बना चुके हैं।

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“विशेष”: पप्पू यादव मधेपुरा सीट से अपनी पार्टी जाप से लड़ेंगे लोकसभा चुनाव

सिटी पोस्ट लाइव : बिहार के सबसे हॉट मधेपुरा संसदीय सीट पर से लगभग धुंध छंट चुकी है। जदयू ने जहां दिनेश चंद्र यादव पर अपना दांव खेला है, वहीं सभी पार्टियों के द्वारा नकारे जा चुके पप्पू यादव अपनी पार्टी जाप से मधेपुरा सीट से चुनाव लड़ने का मन बना चुके हैं। जाप के भीतरखाने से मिली पुख्ता जानकारी के मुताबिक, पप्पू यादव बस चुनाव लड़ने की घोषणा करने ही वाले हैं।महागठबंधन के प्रत्यासी के तौर पर शरद यादव पहले से तयशुदा हैं। अब एक ही लोकसभा सीट से तीन यादव उम्मीदवार के चुनावी समर में उतरने से चुनाव ना केवल त्रिकोणीय होगा बल्कि इस चुनाव में बहुतों उठा-पटक की गुंजाईश है। जनता अपने क्षेत्र के समुचित विकास नहीं होने से,पहले से ही तीनों प्रत्याशियों से बेहद खफा है। ऐसे में चुनाव के अंतिम समय में जनता का मिजाज कैसा और किसकी तरफ रुख करेगा, इसपर कयास लगाना, फिलवक्त बेमानी है। शरद यादव का शुमार देश के शीर्ष नेताओं में होता है लेकिन क्षेत्र उनके कद के हिसाब से कोई फायदा नहीं उठा पाया। दिनेश चंद्र यादव को कोसी की जनता विकास पुरुष कहती है लेकिन उनके द्वारा किया गया कोई बड़ा विकास कहीं दिख नहीं रहा है।

सहरसा की सबसे पहली जरूरत बैजनाथपुर पेपर मिल को आजतक शुरू नहीं कराया जा सका है। सहरसा के बंगाली बाजार रेलवे ओवरब्रिज की मांग ढ़ाई दशक से की जा रही है लेकिन इन बीते वर्षों में इस ओवरब्रिज का सिर्फ पांच बार शिलान्यास हुआ है लेकिन काम आजतक शुरू नहीं हो सका है। कोसी के पीएमसीएच कहे जाने वाले सदर अस्पताल में स्वीपर और दलाल ईलाज करते हैं ।इस अस्पताल को अपग्रेड नहीं किया जा सका है। 2008 की कुसहा त्रासदी के बाद अमान परिवर्तन नहीं होने की वजह से सहरसा से फारविसगंज के लिए आजतक ट्रेन नहीं चल सकी है। यही नहीं वर्ष 2015-16 में जब बिहार में दूसरे एम्स निर्माण की घोषणा हुई,तब से सहरसावासी विभिन्य संगठन के माध्यम से सहरसा में एम्स का निर्माण हो, इसके लिए आंदोलनरत हैं। लेकिन इस मुद्दे पर किसी क्षेत्रीय नेता ने सिद्दत से आवाज नहीं उठाई है। एम्स का निर्माण कहाँ होगा,इसपर संशय बरकरार है। बदहाल सड़कें और ड्रेनेज सिस्टम का नहीं होना सहरसा की बेहद बड़ी समस्या है। अब जब प्रत्यासी वोट मांगने जाएंगे,तो जनता के तल्ख सवाल होंगे,जिसका जबाब उन्हें देना होगा।

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पप्पू यादव अपने कार्यकाल में, सहरसा में विकास का कोई बड़ा काम नहीं करवा पाए। जनहित एक्सप्रेस,हमसफर एक्सप्रेस और वैशाली एक्सप्रेस ट्रेन चलवाने का वे श्रेय जरूर ले रहे हैं। यह सच भी है कि वे लगातार रेल मंत्रालय और रेल मंत्री के संपर्क में थे ।वैसे इस सफलता में खगड़िया के लोजपा सांसद महबूब अली कैसर भी अपनी महती भूमिका बता रहे हैं। पप्पू यादव में यह खासियत है कि ये लोगों को आसानी से सुलभ हैं। उनमें सांसद होने का कोई अहंकार नहीं है। लेकिन उनकी जुबान अक्सर फिसलने की आदी रही है। वे जनता से लेकर तकरीबन सभी पेशे वालों को कुकर्मी और ना जानें क्या-क्या कहते रहे हैं। वैसे इनकी खासियत है कि किसी भी जाति, वर्ग, पंथ, सम्प्रदाय और धर्म के लोगों के यहाँ शादी, विवाह या फिर कोई खुशी वाले कार्यक्रम से लेकर मातमपुर्सी के मौके पर भी ये बिना किसी हिचक के जाते रहे हैं। दिल्ली में इनका आवास सेवा सदन में तब्दील है। वहां सैंकड़ों मरीज ईलाज के लिए ठहरते हैं और पप्पू यादव से हर तरह की मदद पाते हैं। पप्पू यादव जरूरतमंद लोगों को दिल खोलकर आर्थिक मदद भी करते हैं। सदन में वे सहरसा में बड़े बदलाव के लिए लगातार आवाज भी उठाते रहे हैं लेकिन इसमें उन्हें आंशिक कामयाबी भी हासिल नहीं हुई।

कुल मिलाकर मधेपुरा संसदीय चुनाव बेहद रोमांचक होने वाला है। चुनाव में नाना प्रकार के दांव और पेंच देखने को मिलेंगे ।हर चुनाव में जनता ओहदेदार हो जाती है ।जनता से वह जनार्दन बन जाती है। आगे यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि चुनाव मोदी के नाम पर केंद्रित होगा, या फिर क्षेत्रीय मुद्दे हावी रहेंगे। मधेपुरा सीट से तीनों प्रत्याशियों को जनता बाखूबी जानती और समझती है।अब आगे जनता तय करेगी कि उन्हें किस प्रत्यासी पर ज्यादा भरोसा है। अभी तो मौसम ठीक ढंग से चुनावी रंग में रंगा भी नहीं है।

पीटीएन न्यूज मीडिया ग्रुप के सीनियर एडिटर मुकेश कुमार सिंह की रिपोर्ट

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