By, Shrikant Pratyush
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“विशेष” : शहीद की शहादत पर राजनीति परवान पर, अब घर पहुंचा नेताओं का रैला

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इस देश में मुर्दे पर भी राजनीति की रिवायत रही है। नफा-नुकसान देखकर सियासतदां कुछ भी कर गुजरने को आमदा रहते हैं। लेकिन शहीदों की शहादत पर होने वाली राजनीति को देश कभी ना तो स्वीकार करेगा और ना ही इसकी ईजाजत देगा।

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“विशेष” : शहीद की शहादत पर राजनीति परवान पर, अब घर पहुंचा नेताओं का रैला

सिटी पोस्ट लाइव “विशेष” : इस देश में मुर्दे पर भी राजनीति की रिवायत रही है। नफा-नुकसान देखकर सियासतदां कुछ भी कर गुजरने को आमदा रहते हैं। लेकिन शहीदों की शहादत पर होने वाली राजनीति को देश कभी ना तो स्वीकार करेगा और ना ही इसकी ईजाजत देगा। बीते 1 मार्च को जम्मू-कश्मीर के हंदवारा में आतंकियों से मुठभेड़ करते हुए बिहार के बेगूसराय जिले के बखरी थान के ध्यानचक टोला निवासी सीआरपीएफ के डीएसपी पिन्टू कुमार सिंह वीरगति को प्राप्त हुए। पहले तो उनकी शहादत को सीआरपीएफ कंट्रोल रूम ने सार्वजनिक नहीं किया। उसके बाद मीडिया की नजरों में इस शहादत की कोई अहमियत नहीं रही ।बांकि सारी कोर-कसर केंद्र और राज्य के नेताओं ने उपेक्षा के चरम से पूरी कर दी।

3 मार्च को पटना में आयोजित एनडीए की संकल्प रैली ने इस शहीद की शहादत को कुचल कर रख दिया। पटना एयरपोर्ट पर दिवंगत शहीद का पार्थिव शरीर पड़ा रहा लेकिन ताल ठोंकने वाले और बयानवीर नेताओं में से कोई भी एक नेता इस शूरवीर शहीद को श्रद्धांजलि देने पटना एयरपोर्ट नहीं पहुंचे। बाद में हेलीकॉप्टर से सेना के अधिकारी शहीद के पार्थिव शरीर को लेकर उनके पैतृक गाँव पहुँचे, जहां सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इलाके के हजारों लोगों ने अपने इस वीर सपूत को नम आंखों से अंतिम विदाई दी। शहीद पिन्टू सिंह अब पंचतंत्र में विलीन हो चुके हैं। अब बिहार सरकार की नींद टूटी है। सबसे पहले जदयू के रणनीतिकार सह जदयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने संकल्प रैली की वजह से किसी के शहीद तक नहीं पहुंचने के लिए शहीद के परिजनों से मांफी मांगी।

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अब दिवंगत शहीद के घर शहीद को श्रद्धांजलि देने और मर्माहत परिवार को राजनीतिक मरहम-पट्टी के लिए नेताओं का रैला पहुंच रहा है। राज्य के उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी और पूर्व मंत्री जमशेद अशरफ रश्म अदायगी कर लौट चुके हैं। बीते कल मधेपुरा के सांसद पप्पू यादव भी शहीद के घर पहुँचे और राज्य और केंद्र की सरकार को जमकर लताड़ा। पप्पू यादव ने तत्काल शहीद के परिजन को एक लाख रुपये की आर्थिक मदद की और शहीद की पांच वर्षीय पुत्री के नाम से एक लाख रुपये अलग से जमा करने की घोषणा की। पप्पू यादव ने वाकई वह किया, जो अन्य तथाकथित बड़े नेताओं को करना चाहिए। पप्पू यादव की इस सामाजिक सरोकार को हम सेल्यूट करते हैं ।

बेगूसराय में पप्पू यादव को तत्काल कोई राजनीतिक लाभ नहीं मिलने वाला है। उन्होंने वाकई मजबूत राजनीतिक, सामाजिक, राजधर्म और इंसानियत का धर्म निभाया है। हम उनके इस कार्य से सिद्दत से मुरीद हुए हैं। आगे अभी लोकसभा का चुनाव है और नेताओं के लिए शहीद पिन्टू सिंह बिहार में एक राजनीतिक रेवड़ी हैं ।जाहिर सी बात है कि अभी बड़े, मझौले और छुटभैये नेताओं का काफिला शहीद के परिजन से मिलकर खूब विधवा प्रलाप करेंगे और अपनी राजनीतिक रोटी सेंकेंगे। नेताओं के इस छल,प्रपंच और मतलबी व्यवहार से शहीद का सीना मरकर भी छलनी हो रहा होगा। हम चाहते हैं कि आप राजसिंहासन के लिए किसी भी हद तक गिर जाईये लेकिन शहीद की शहादत पर राजनीति मत कीजिये। देश पर मरने वाले, हमसभी के लिए पूज्यनीय हैं। उनकी गरिमा और महात्म को बरकरार रखा जाना चाहिए।

पीटीएन न्यूज मीडिया ग्रुप के सीनियर एडिटर मुकेश कुमार सिंह की “विशेष” रिपोर्ट

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