By, Shrikant Pratyush
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“विशेष” : सैन्य कार्रवाई का सबूत मांगना, मानसिक दिवालियेपन का इजहार

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पुलवामा फियादीन हमले के बाद भारतीय वायु सेना की कारवाई पर विपक्षी दलों के शूरवीर नेताओं के द्वारा लगातार सबूत मांगना, एक बेहद निंदनीय परिपाटी की शुरुआत है। वैसे देश के अंदर और बाहर क्या हो रहा है, यह देश की जनता से लेकर सभी दल के नेताओं को जानने और समझने का अधिकार है।

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“विशेष” : सैन्य कार्रवाई का सबूत मांगना, मानसिक दिवालियेपन का इजहार

सिटी पोस्ट लाइव “विशेष” : पुलवामा फियादीन हमले के बाद भारतीय वायु सेना की कारवाई पर विपक्षी दलों के शूरवीर नेताओं के द्वारा लगातार सबूत मांगना, एक बेहद निंदनीय परिपाटी की शुरुआत है। वैसे देश के अंदर और बाहर क्या हो रहा है, यह देश की जनता से लेकर सभी दल के नेताओं को जानने और समझने का अधिकार है। लेकिन भारतीय वायु सेना की कारवाई के बाद विपक्ष जिस मजाकिया लहजे में सबूत मांग रहा है,यह देश की सेना के पराक्रम पर एक तरह से हमला है। वोट की राजनीति, नेताओं की विवशता है लेकिन राजनेता और नेत्री को अपने देश के सैन्य बल और उनकी कारवाई को लेकर किसी तरह का संदेह और भ्रम नहीं फैलाना चाहिए। जब वायु सेना के हमले को लेकर वायु सेना प्रमुख ने देश को यह बता दिया कि वायु सेना की बड़ी कारवाई के बाद ही पाकिस्तान ने एफ 16 से हिंदुस्तान पर हमला करने की कोशिश की थी जिसे वीर अभिनंदन ने बेहद पुराने पड़ चुके मारक विमान से उसे मार गिराया था।

सेना प्रमुख के जबाब के बाद किसी तरह का सबूत मांगना,सेना के मनोबल को कम करने की नापाक कोशिश है। कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी कहते हैं कि एयर स्ट्राईक का उन्हें सबूत चाहिए। दिग्विजय सिंह कहते हैं कि अगर एयर स्ट्राईक हुआ है तो, सरकार सबूत दिखाए। मणिशंकर अय्य्यर और कपिल सिंम्बल को सबूत की अलग जरूरत है। नवजोत सिंह सिद्धू का कहना है कि पाकिस्तान में अगर एक कौआ भी मरा हो तो, भारत सरकार उसे सार्वजनिक करे। ममता बनर्जी कह रही हैं कि बालाकोट में हुए एयर स्ट्राईक का सबूत दिखाओ। कितने आतंकी मारे,उसकी पूरी जानकारी दो। अरविंद केजरीवाल सरकार पर आरोप लगाते हुए कहते हैं कि नरेंद्र मोदी सेना की लाशों पर राजनीति कर रहे हैं। देश के कई और नेताओं को सबूत की तलब है। हद हो गयी राजनीति की। उधर ईरान पाकिस्तान पर हमले की तैयारी कर रहा है।

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भारत पहले से युद्ध के लिए तैयार बैठा है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री दया की भीख मांगते हुए, भारत से युद्ध नहीं लड़ने की मन्नत कर रहे हैं। इमरान खान भारत से हर मसले पर शांतिपूर्ण तरीके से बातचीत करना चाहते हैं। यह वक्त देश की तीनों सेना के अलावे आंतरिक सुरक्षा में लगे सभी बलों के हौसले को बढ़ाने वाला है। लेकिन कम पढ़े-लिखे नेता और देशहित से ईतर व्यक्तिगत और पार्टी हित की राजनीति करने वाले नेता देश की सेना पर ही सवाल खड़े कर रहे हैं। एक तो देश के विपक्षी दल के नेता अपना देश धर्म भूल चुके हैं,दूजा मीडिया भी विलेन की भूमिका में है। मीडिया इस तरह से सैन्य गतिविधियों की जानकारी परोस रहा है, गोया वह पाकिस्तानी जासूस हो। जो काम पाकिस्तान अपने जासूसों से करवाने की कोशिश कर रहा है, मीडिया आगे बढ़कर उसे परोसने में जुटा हुआ है। अभी देश में एकजुटता की जरूरत है। ऐसे नाजुक समय में कोई ऐसा बयान नहीं देना चाहिए और ना ही ऐसा कुछ करना चाहिए, जिसका असर सेना के मनोबल पर हो।

मसला यहीं खत्म नहीं होता है। कश्मीर समस्या का असली समाधान भी इसी कड़ी में करने की जरूरत है। जब राम मंदिर के निर्माण के मुद्दे पर से अभी देश का ध्यान हट सा गया है, तो पहले सरकार को कश्मीर में लागू धारा 370 और 35 क के लिए सभी विपक्षियों के साथ मिलकर ऐतिहासिक काम करना चाहिए। शहीदों की शहादत पर राजनीति करने वालों को ना तो आने वाली पीढ़ी माफ करेगी और ना ही ईश्वर। इस वक्त सबूत मांगने वाले गैंग को, सरकार की तरफ से करारा जबाब मिलना चाहिए ।बहुत भारतीय नेता इमरान खान को बधाई दे रहे हैं। अब देशद्रोही की परिभाषा भी बदली जानी चाहिए। भारत को पाकिस्तान को निसन्देह सबक सिखाना चाहिए लेकिन उससे पहले देश के भीतर बैठे गद्दार और आतंकियों का सफाया पहले है।

पीटीएन न्यूज मीडिया ग्रुप के सीनियर एडिटर मुकेश कुमार सिंह की “विशेष” रिपोर्ट

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