By, Shrikant Pratyush
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सहरसा का ऐतिहासिक कोसी महोत्सव अब खो-खो और मजाकिया महोत्सव में हुआ तब्दील

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बिहार सरकार के पर्यटन विभाग से सरकारी महोत्सव घोषित कोसी इलाके का ऐतिहासिक कोसी महोत्सव अब अपने औचित्य से ना केवल भटक गया है बल्कि यह महज खानापूर्ति और कोरम पूरा करने वाला महोत्सव बनकर रह गया है।

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सहरसा का ऐतिहासिक कोसी महोत्सव अब खो-खो और मजाकिया महोत्सव में हुआ तब्दील

सिटी पोस्ट लाइव “विशेष” : बिहार सरकार के पर्यटन विभाग से सरकारी महोत्सव घोषित कोसी इलाके का ऐतिहासिक कोसी महोत्सव अब अपने औचित्य से ना केवल भटक गया है बल्कि यह महज खानापूर्ति और कोरम पूरा करने वाला महोत्सव बनकर रह गया है। पहले यह महोत्सव तीन दिवसीय हुआ करता था लेकिन शासन और प्रशासन की उपेक्षा और उदासीनता की वजह से यह दो दिवसीय महोत्सव में सिमट गया। आज इस महोत्सव का उद्देश्य और महात्म्य खत्म हो गया है। कोसी के पौराणिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहरों के संवर्धन और उसकी ख्याति के लिए कोसी महोत्सव का आयोजन शुरू हुआ था। लेकिन यह बेपटरी होकर, आज बस आधिकारिक खानापूर्ति का कोरम भर है।

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बीते 9 और 10 मार्च को आयोजित हुआ यह महोत्सव दर्शकों का इंतजार करता रहा लेकिन महोत्सव में दर्शकों का सिर्फ टोंटा रहा और यह महोत्सव उपहास बनकर रह गया। दो दिवसीय इस कोसी महोत्सव की शुरुआत राज्य के आपदा प्रबंधन मंत्री दिनेश चंद्र यादव, सहरसा डीएम शैलजा शर्मा और एसपी राकेश कुमार सहित कुछ नेताओं के द्वारा 9 मार्च के दोपहर बाद सहरसा स्टेडियम परिसर में दीप प्रज्ज्वलित कर के किया था। पहले कोसी महोत्सव का खासा महत्व था ।लोग इस महोत्सव की शुरुआत होने की एक साल तक इंतजार करते थे और आगे का एक साल महोत्सव की ताजगी को संजो कर रखते थे। लेकिन अब आलम यह है कि इसकी स्थिति गाँव के मेले से भी कमतर हो चुकी है।

दो दिवसीय आयोजित इस महोत्सव में कई मंत्री, सांसद, विधायक और नेता आमंत्रित थे लेकिन किसी ने इस महोत्सव में शिरकत करना मुनासिब नहीं समझा। इस महोत्सव का उद्घाटन राज्य के पर्यटन मंत्री प्रमोद कुमार को करना था लेकिन सहरसा की धरती पर आना, उन्होंने उचित नहीं समझा। इस महोत्सव की खासियत यह थी कि इसमें देश के कई प्रसिद्ध गायक और गायिकाओं के साथ नृत्यांगनाओं का जमावड़ा लगता था और लोग गायकी की हर विधा के आनंद के साथ नृत्य का भरपूर मजा लेते थे। दिन से लेकर रात तक क्षेत्रीय कलाकार से लेकर नामचीन कलाकारों के बीच लोगों का कारवां झूमते और नाचते रहता था। इस महोत्सव में ऐसा जन सैलाब उमड़ता था कि स्टेडियम परिसर में एक परिंदा के लिए भी जगह नहीं बचती थी। स्टेडियम परिसर के बाहर लोग प्रोजेक्टर पर कार्यक्रम देखने को विवश होते थे। यही नहीं, इस कार्यक्रम में कोई उत्पात ना मचे, इसके लिए बगल के जिलों से अतिरिक्त पुलिस बल मंगाए जाते थे।

लेकिन इसबार स्थिति बिल्कुल उलट और शर्मसार करने वाली रही। बड़े कलाकार के तौर पर गजल गायक चंदन दास को बुलाया गया था, जो उम्र के इस पड़ाव पर युवा पीढ़ी को नचाने का माद्दा नहीं रखते हैं। इस कार्यक्रम में सिर्फ सभी विभागों के अधिकारी, कर्मी, पत्रकार और पुलिस बल की संख्यां सबसे अधिक थी। दर्शकों का बिल्कुल टोंटा था ।पूरा स्टेडियम परिसर वीरान था। बस पांडाल में लोगों की कुछ संख्यां थी, जो कोसी महोत्सव के अवसान के गवाह बने हुए थे। चंदन दास के गजलों को उपस्थित लोगों ने मन छोटा कर बस सुनते रहे और बीच-बीच में जबरदस्ती ताली बजाते रहे।

इस मौके पर हमने चंदन दास से खास बातचीत की ।वे 2014 में भी इस महोत्सव में सहरसा आ चुके हैं। उन्हें यहाँ आना बहुत अच्छा लगा। कुल मिलाकर कोसी महोत्सव अपनी राह से पूरी तरह भटक चुका है जिसके लिए शासन और प्रशासन दोनों जिम्मेवार हैं। हम डंके की चोट पर कहते हैं कि इस महोत्सव से बहुत बड़ा मेला मधेपुरा सांसद पप्पू यादव अपने गाँव खुर्दा में हर साल लगवाते हैं।
आखिर में हम यह भी जरूर कहेंगे कि इलाके के ज्ञानवान, सम्मानित, ख्यातिलब्ध, पुरोधा और चर्चित हस्तियों को इस महोत्सव में निमंत्रित नहीं किया जाना, अतिशय दुर्भाग्यपूर्ण है। सही मायने में कोसी महोत्सव के आयोजन की प्रासंगिकता अब खत्म हो चुकी है।

पीटीएन न्यूज मीडिया ग्रुप के सीनियर एडिटर मुकेश कुमार सिंह की “विशेष” रिपोर्ट

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