By, Shrikant Pratyush
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बिहार लोकसभा चुनाव में दिखेंगे कई सियासी रंग, लालकृष्ण आडवाणी की राह पर शरद यादव

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बिहार के 40 लोकसभा सीटों के लिए सात चरण में चुनाव होने वाले हैं। खासकर देश में यूपी और बिहार का चुनाव काफी रोमांचक होने वाला है। इस चुनाव में अनन्य सियासी रंग और दांव-पेंच देखने को मिलेंगे। बिहार में एनडीए ने अपने उम्मीदवारों की तस्वीर साफ कर दी है। 17 सीट पर भाजपा, 17 सीट पर जदयू और 6 सीट पर लोजपा चनाव लड़ रही है।

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बिहार लोकसभा चुनाव में दिखेंगे कई सियासी रंग, लालकृष्ण आडवाणी की राह पर शरद यादव

सिटी पोस्ट लाइव “विशेष” : बिहार के 40 लोकसभा सीटों के लिए सात चरण में चुनाव होने वाले हैं। खासकर देश में यूपी और बिहार का चुनाव काफी रोमांचक होने वाला है। इस चुनाव में अनन्य सियासी रंग और दांव-पेंच देखने को मिलेंगे। बिहार में एनडीए ने अपने उम्मीदवारों की तस्वीर साफ कर दी है। 17 सीट पर भाजपा, 17 सीट पर जदयू और 6 सीट पर लोजपा चनाव लड़ रही है।महागठबन्धन में सीट बंटवारे के बाद भी रार अभीतक बरकरार है। राजद महागठबन्धन में फ्रंटफ्रूट पर खेल रहा है। महागठबन्धन में राजद के तेजस्वी यादव ने सीटों का बंटवारा कर दिया है। राजद 20,कांग्रेस 9, रालोसपा 6, हम 3 और भीआईपी 3 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। बिहार के इस चुनाव में कांग्रेस ना केवल बैकफुट पर है बल्कि वह तेजस्वी के मन माफिक उम्मीदवार को टिकट देने के लिए भी विवश रही है।

बिहार के सभी सीटों पर अलग-अलग घोषित तिथियों को मतदान सात चरण में होंगे। पहले चरण में बिहार के चार संसदीय सीट गया, औरंगाबाद,नवादा और जमुई में चुनाव होंगे। नामांकन की प्रक्रिया 18 मार्च से शुरू होगी और 25 तक नामांकन होगा। 28 मार्च तक नाम वापसी की आखिरी तिथि है। बिहार की कई सीट अब हॉट सीट में तब्दील हो गयी है। मंडल कमीशन के पुरोधा बी.पी. मंडल की धरती मधेपूरा से तीन नामी और एक युवा चार यादव उम्मीदवार एक साथ चुनावी समर में उतर रहे हैं। मधेपुरा सीट से देश के सबसे पुराने सांसद शरद यादव अपनी पार्टी लोजद की जगह राजद के लालटेन से खड़े किये गए हैं। जदयू से दिनेश चंद्र यादव और जाप से बाहुबली पप्पू यादव चुनाव मैदान में हैं। चौथे यादव उम्मीदवार डॉक्टर गौतम कृष्ण हैं, जो बीडीओ की नौकरी छोड़कर राजनीति में अपना भाग्य आजमा रहे हैं ।इस सीट पर देश की नजर टिकी हुई है।

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इधर राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद को लेकर बड़ी खबर आ रही है ।लालू प्रसाद यादव अभी रांची के होटवार जेल में बन्द हैं।बहुचर्चित चारा घोटाला मामले में लालू प्रसाद यादव की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बीते कल 25 मार्च को सी.बी.आई. को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। सी.बी.आई. को दो हफ्ते में जवाब देने को कहा है। दरअसल,लालू प्रसाद यादव ने मेडिकल ग्राउंड पर तीन मामलों में जमानत मांगी है। लालू की तरफ से कहा गया कि वह एक मामले में 22 महीने,दूसरे मामले में 13 महीने और एक मामले में 21 महीने की सजा काट चुके हैं। आपको बता दें कि बहुचर्चित चारा घोटाले के तीन मामलों में सुप्रीम कोर्ट आर.जे.डी. अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहा है।वैसे सच कहें तो, लालू प्रसाद यादव को सी.बी.आई.और सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत मिलती नहीं दिख रही है।

मधेपुरा से लालू प्रसाद यादव भी सांसद रह चुके हैं। राजद ने वाम दल को कोई सीट नहीं दिया है। राजद ने माले से कहा है कि वे लालटेन सिंम्बल पर एक सीट से चुनाव लड़ें। नवादा से सांसद रहे गिरिराज सिंह को बीजेपी ने बेगूसराय से टिकट दिया है, जहां उनकी टक्कर भारत तेरे टुकड़े होंगे के नायक कन्हैया कुमार से है। बक्सर से अश्वनी चौबे, महाराजगंज से जनार्दन सिंह सिग्रीवाल और छपरा से राजीव प्रताप रुढ़ी बीजेपी के उम्मीदवार हैं। ये सभी गर्म सीटें हैं ।इसके अलावे पटना साहिब से रविशंकर प्रसाद और पाटलिपुत्रा से रामकृपाल यादव बीजेपी के उम्मीदवार हैं। आरा से आर.के.सिंह बीजेपी से खड़े हैं। पटना साहिब से रविशंकर प्रसाद का मुकाबला शत्रुघ्न सिन्हा का मुकाबला के कयास हैं और पाटलिपुत्रा से रामकृपाल यादव का मुकाबला लालू प्रसाद यादव की पुत्री मीसा भारती से है।

इन सभी सीटों पर देश की नजर टिकी हुई है। वैसे जमुई से चिराग पासवान,हाजीपुर से पशुपति कुमार पारस,पुर्णिया से पप्पू सिंह और कटिहार से तारिक अनवर पर भी सभी की नजरें टिकी हुई हैं। बांका सीट से जदयू ने पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत दिग्विजय सिंह की पत्नी पुतुल कुमारी को टिकट नहीं दिया है। पुतुल कुमारी बांका से निर्दलीय चुनाव लड़ेंगी। इस सीट पर भी सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। खगड़िया सीट से लोजपा के महबूब अली कैसर को लेकर धूंध बरकरार थी लेकिन लोजपा ने एकबार फिर मोती रकम वसूल कर कैसर पर भरोसा जताया है। इस सीट पर भी सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। सुपौल से रंजीता रंजन का कांग्रेस से लगभग टिकट फाईनल है लेकिन इस सीट पर राजद के विधायक यदुवंश यादव के नेतृव में राजद ने मोर्चा खोल दिया है।

नेता और कार्यकर्ता का कहना है कि रंजीता रंजन और उनके पति पप्पू यादव ने राजद को बहुत नुकसान पहुंचाया है, इसलिए रंजीता रंजन को राजद कभी अपना उम्मीदवार स्वीकार नहीं करेगा। सूत्रों की मानें, तो यह सारा खेल तेजस्वी यादव के इशारे पर खेला जा रहा है। अगर रंजीता रंजन यःहाँ से कांग्रेस के टिकट पर खड़ी भी होती हैं, तो राजद उनके विरोध में विभीषण की भूमिका निभाएगा। इस सीट पर भी अब सभी की निगाहें जम गई हैं। शिवहर सीट से पूर्व सांसद बाहुबली आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद का टिकट कांग्रेस से लगभग फिक्स था। लेकिन सियासी दांव-पेंच में लवली आआनंद को शिवहर से उम्मीदवार नहीं बनाया गया है।अब लवली आनंद शिवहर से निर्दलीय चुनाव लड़ेंगी, एनडीए को नैतिक समर्थन करेंगी, या फिर कोई और रणनीति बनाएंगी, इसपर भी सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। पूर्व सांसद आनंद मोहन अभी सहरसा जेल में बन्द हैं।

लेकिन आनंद मोहन का पूरे बिहार में जनाधार है। वे बहुतों का खेल बिगाड़ने का माद्दा रखते हैं। सभी सियासी जानकार अभी आनंद मोहन के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं। इधर सियासी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बिहार में भी बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित साह का जादू चलेगा। सूत्रों की मानें तो,तेजस्वी यादव बिहार में महागठबन्धन के सभी साथियों को नचा रहे हैं और जदयू की सहमति से बीजेपी तेजस्वी यादव को नचा रही है। चूंकि चुनाव सात चरणों में हो रहा है और चुनाव परिणाम 23 मई को देखने को मिलेंगे, इसलिए इस बीच में कई तरह की राजनीतिक कुश्ती से जनता का सीधा सामना होगा। जानकारी के मुताबिक विभिन्य दलों के उम्मीदवारों को टिकट देने में भी करोड़ों का वारा-न्यारा हुआ है।

गौरतलब है कि टिकट बंटवारे का कोरम सभी दलों ने जब पूरा कर लिया है तो, इस विषय पर ज्यादा लिखना बेमानी है। अभीतक की जो तस्वीर सामने है, उसके मुताबिक बिहार में टक्कर महागठबन्धन और एनडीए के बीच जरूर है लेकिन पलड़ा एनडीए का भारी दिख रहा है। वैसे जैसे-जैसे चुनाव का समय निकट आता जाएगा, तस्वीर और भी साफ-साफ दिखेगी। मधेपुरा सीट से तीन दिग्गज यादव उम्मीदवारों का मुकाबला काफी रोचक होगा। इस सीट से लोजद के संस्थापक शरद यादव खड़े हैं। जदयू से दिनेश चंद्र यादव हैं और महागठबन्धन में नो एंट्री के बाद पप्पू यादव अपनी पार्टी जाप से चुनाव लड़ेंगे। पप्पू यादव ने 28 मार्च को नामांकन की घोषणा भी कर दी है ।सबसे बुरी और लाचार स्थिति शरद यादव की है।

महागठबन्धन ने उनकी पार्टी को कोई तवज्जो नहीं दिया और शरद यादव के हाथ में राजद का सिंम्बल लालटेन थमा दिया गया है।संभावना जताई जा रही है कि लोकसभा चुनाव के बाद लोजद का राजद में विलय हो जाएगा। यह बेहद बड़ी और चौंकाने वाली बात है कि जिस शरद यादव को अभी देश का समाजवाद का सबसे बड़ा नेता माना जाता है, आज वे राजद की वैशाखी के सहारे चुनाव मैदान में खड़े हैं। राजनीतिक समीक्षकों का कहना है कि शरद यादव की राजनीति अब अवसान पर है। अगले कुछ साल में वे जदयू के जार्ज फर्नांडिश और बीजेपी के लाल कृष्ण आडवाणी की तरह निरीह प्राणी हो जाएंगे और राजनीति की मुख्यधारा से उन्हें विलुप्त कर दिया जाएगा। शरद यादव के राजनीतिक भविष्य के अवसान की पटकथा लिखने की शुरुआत हो चुकी है। अहम बात यह है कि आगे शरद यादव की राजनीति के अवसान का स्क्रिप्ट राईटर,तेजस्वी यादव को ठहराया जाएगा।

पीटीएन न्यूज मीडिया ग्रुप के सीनियर एडिटर मुकेश कुमार सिंह की “विशेष” रिपोर्ट

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