By, Shrikant Pratyush
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“विशेष” : एम्स निर्माण के लिए नारी शक्ति का हल्ला बोल

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बीते चार साल से, जब से बिहार में दूसरे एम्स की घोषणा हुई है, तब से सहरसा में विभिन्य सामाजिक संगठनों के द्वारा सिलसिलेवार तरीके से आंदोलन जारी है। खासकर “एम्स निर्माण संघर्ष समिति” के बैनर तले हस्ताक्षर अभियान, धरना-प्रदर्शन, सांकेतिक धरना, महाधरना और आमरण अनशन के जरिये लगातार आंदोलन हो रहे हैं।

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“विशेष” : एम्स निर्माण के लिए नारी शक्ति का हल्ला बोल

सिटी पोस्ट लाइव : बीते चार साल से, जब से बिहार में दूसरे एम्स की घोषणा हुई है, तब से सहरसा में विभिन्य सामाजिक संगठनों के द्वारा सिलसिलेवार तरीके से आंदोलन जारी है। खासकर “एम्स निर्माण संघर्ष समिति” के बैनर तले हस्ताक्षर अभियान, धरना-प्रदर्शन, सांकेतिक धरना, महाधरना और आमरण अनशन के जरिये लगातार आंदोलन हो रहे हैं। इसी कड़ी में एम्स निर्माण संघर्ष समिति के बैनर तले नारी शक्ति ने पहले सात दिवसीय सत्याग्रह किया फिर उसके बाद सड़कों पर हल्ला बोल कर “हमें एम्स चाहिए” के नारे से पूरे शहर को गुंजायमान कर दिया। सहरसा स्टेडियम परिसर के बाहर नारी शक्ति बड़ी संख्यां में पहले तो सात दिवसीय सत्याग्रह पर बैठीं और फिर बड़ी तायदाद में सड़कों पर उतरकर राज्य और केंद्र सरकार से सहरसा में एम्स का निर्माण हो इसकी मांग की। स्टेडियम परिसर के बाहर सत्याग्रह स्थल से उठने के बाद महिलाओं का यह जत्था एस.पी.,डी.एम.और कोसी प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय से होते हुए बाबू वीर कुँवर सिंह चौक पर पहुँचा।

वहाँ पर माताएं और बहनों ने हमें क्या चाहिए? हमें एम्स चाहिए के नारे से सारे माहौल को एम्स मय बना डाला। हमें सिर्फ एम्स चाहिए के समवेत नारे से यह पता चल रहा था कि यह आंदोलन बिना एम्स निर्माण की घोषणा कराए, रुकने वाला नहीं है। राह चलते आमलोग भी हमें एम्स चाहिए के नारे लगाने को ना केवल विवश थे बल्कि उन्हें एम्स क्यों चाहिए का वे जबाब भी दे रहे थे।बताना जरूरी है कि राज्य सरकार ने दूसरे एम्स निर्माण के लिए सिर्फ एक जिला दरभंगा का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था, जिसे टेक्निकल वजहों से केंद्र के स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण मंत्री जे.पी.नड्डा ने खारिज कर दिया। हद तो यह है कि दो साल पूर्व ही सहरसा के तत्कालीन जिलाधिकारी विनोद सिंह गुंजियाल ने सहरसा में 217 एकड़ भूमि सहित तमाम आवश्यक जानकारी राज्य सरकार को पत्र के माध्यम से दे दी थी। लेकिन राज्य सरकार की अनदेखी की इंतहा देखिए कि राज्य सरकार ने सहरसा को लेकर कोई प्रस्ताव केंद्र को नहीं भेजा।

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इधर लोकसभा सांसद शरद यादव ने जे.पी.नड्डा को पत्र लिखा था जिसका जबाब भी उनके निजी सचिव ने शरद यादव को भेजा है। जबाब में राज्य सरकार द्वारा सहरसा का प्रस्ताव नहीं भेजे जाने की बात लिखी हुई है। बेशर्मी की इंतहा है कि जिस नीतीश कुमार ने 2008 की कुसहा त्रासदी के बाद पहले से बेहतर कोसी बनाने का वादा किया था, उन्हें कोसी के विकास की कोई चिंता नहीं रही ।सहरसा में लगातार हो रहे आंदोलन की धमक दिल्ली तक पहुंच गई है और सहरसा में एम्स का निर्माण हो, इसके लिए दिल्ली में भी आंदोलन हो रहे हैं। सहरसा की नारी की जोरदार पहल का कितना असर नीतीश कुमार पर होता है, इसपर धूंध बरकरार है।

वैसे विस्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक नीतीश कुमार सहरसा का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजने का मन बना चुके हैं।वैसे आपको यह बताना भी बेहद जरूरी है कि जे.पी.नड्डा भी कोसी इलाके में एम्स निर्माण हो, इसकी इच्छा जता चुके हैं। अब सबकी नजर नीतीश कुमार पर ठहरी हुई है। वैसे इतिहास गवाह है कि जब-जब नारी घर से बाहर सड़क पर निकली है “बड़ा बदलाव हुआ है और नया इतिहास बना है”। हम भी यह उम्मीद करते हैं कि राज्य सरकार का कलेजा पसीजे और राज्य सरकार केंद्र को सहरसा का प्रस्ताव भेजकर, सहरसा में एम्स निर्माण हो इसके लिए केंद्र पर दबाब भी बनाए। गौरतलब है कि कोसी के एक तिहाई लोग किसी ना किसी बीमारी से ग्रस्त हैं और ससमय उचित ईलाज के अभाव में थोक में काल कलवित भी हो रहे हैं।

पीटीएन न्यूज मीडिया ग्रुप के सीनियर एडिटर मुकेश कुमार सिंह की “विशेष” रिपोर्ट

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