By, Shrikant Pratyush
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विशेष : एनडीए बनाम महागठबंधन, सीट शेयरिंग पर सुनामी अभी बाकी है

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एनडीए के बिहार में सीट शेयरिंग का मामला लगभग तय है। जदयू 17, बीजेपी 17 और लोजपा 6 के साथ राज्यसभा की एक सीट। यहाँ के माहौल के अनुसार बीजेपी  ने फैसला लिया है। राजनीतिक समीक्षकों का कहना है कि बीजेपी को बिहार में मुंह की खानी पड़ी है।

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विशेष : एनडीए बनाम महागठबंधन, सीट शेयरिंग पर सुनामी अभी बाकी है

सिटी पोस्ट लाइव “विशेष” : देश की राजनीति में अधिक उठापटक के लिए बिहार सबसे आगे है। अति महत्वाकांक्षी नेताओं से लेकर उन्मादी और जातीय समीकरण वाले नेताओं की बिहार में भरमार है। समाजवाद की धरा से निकले मौजूदा सभी राजनेता जातीय गोलबंदी की बुनियाद पर खड़े हैं। नीतीश कुमार,लालू प्रसाद यादव,रामविलास पासवान, सुशील मोदी, उपेंद्र कुशवाहा सबके सब वही हैं। बिहार के वामपंथी नेताओं की भी कोई खास अजीम विरासत नहीं रही है। एनडीए के बिहार में सीट शेयरिंग का मामला लगभग तय है। जदयू 17, बीजेपी 17 और लोजपा 6 के साथ राज्यसभा की एक सीट। यहाँ के माहौल के अनुसार बीजेपी  ने फैसला लिया है। राजनीतिक समीक्षकों का कहना है कि बीजेपी को बिहार में मुंह की खानी पड़ी है। लेकिन राजनीतिक जानकारों को यह भी समझना होगा कि केंद्र में फिर से सत्तासीन होने के लिए बीजेपी ने बहुत तौलकर फैसले लिए हैं।

एनडीए के एक साथी उपेंद्र कुशवाहा राजनीतिक महत्वाकांक्षा और अधिक सीट की अपेक्षा में ही एनडीए के दामन को छोड़ने को विवश हुए हैं। इधर महागठबंधन में अभीतक की सूचना के मुताबिक राजद 20, कांग्रेस 12 और उपेंद्र कुशवाहा के खाते में 4 सीटें जाती दिख रही हैं। यानि 36 सीटों का बंटवारा लगभग हो चुका है। शेष चार सीटें बच रही हैं और दावेदार अभी कई हैं। खासकर के हम के जीतन राम मांझी, सन ऑफ मल्लाह मुकेश सहनी और वामदल। अब शेष चार सीटों में से किन्हें क्या मिलेगा, इसपर धूंध बरकरार है। यानि आने वाले दिनों में महागठबंधन के भीतर राजनीतिक सुनामी आने का अंदेशा बरकरार है। वैसे राजद की कमान संभाले तेजस्वी यादव, अपने पिता लालू यादव से भी चार कदम आगे जाकर विराट महागठबंधन तैयार कर चुके हैं जिससे उन्हें जरूरत से ज्यादा सियासी फायदे के कयास लगाए जा रहे हैं। लेकिन महागठबंधन में सीट शेयरिंग की पूरी तस्वीर अभी तक साफ नहीं हो पाई है। अभी गुस्से और विवाद की कई तस्वीरें सामने आएंगी।

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एनडीए ने अपना फार्मूला स्पष्ट कर दिया है। बस लोगों तक यह जानकारी आनी शेष है कि कौन सी सीट पर कौन से उम्मीदवार खड़े किए जाएंगे। लेकिन महागठबंधन में अभी कई पेंच फंसे हुए हैं, जिनसे निपटना तेजस्वी यादव और कांग्रेस के लिए आसान नहीं होगा। वैसे आगे यह भी देखना बेहद अहम होगा कि लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव किस-किस तरह के गुल खिलाते हैं। महागठबंधन के लिए सीट शेयरिंग की डगर आसान नहीं दिख रही है। हमारी समझ से सुनामी तो आकर रहेगी लेकिन उसका असर कितना व्यापक होगा,अभी उसपर शब्द देना,जल्दबाजी होगी।

पीटीएन न्यूज मीडिया ग्रुप के सीनियर एडिटर मुकेश कुमार सिंह की “विशेष” रिपोर्ट

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