By, Shrikant Pratyush
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नौकरी से इस्तीफा देने की भ्रामक खबर लिखना, पत्रकारिता के खोते वजूद का हिस्सा है : डीजीपी

नौकरी से इस्तीफा देने की भ्रामक खबर लिखना, आखिर कैसी पत्रकारिता है

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शांत, शालीन शौम्य और ईमानदार पुलिसिंग के जरिये, जनता के डीजीपी कहे जाने वाले बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय सुशांत सिंह राजपूत की मौत मामले में राष्ट्रीय स्तर पर अपने बेबाक बयानबाजी के लिए खासे सुर्खियों में हैं। लेकिन बीते रविवार की शाम में बिहार के एक बेब पोर्टल ने डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय के सरकारी नौकरी से इस्तीफे देने की एक फर्जी खबर चलाकर ना केवल सनसनी फैला दी बल्कि भूचाल ला दिया।

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सिटी पोस्ट लाईव : शांत, शालीन शौम्य और ईमानदार पुलिसिंग के जरिये, जनता के डीजीपी कहे जाने वाले बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय सुशांत सिंह राजपूत की मौत मामले में राष्ट्रीय स्तर पर अपने बेबाक बयानबाजी के लिए खासे सुर्खियों में हैं। लेकिन बीते रविवार की शाम में बिहार के एक बेब पोर्टल ने डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय के सरकारी नौकरी से इस्तीफे देने की एक फर्जी खबर चलाकर ना केवल सनसनी फैला दी बल्कि भूचाल ला दिया। हमने तुरन्त इस मुतल्लिक डीजीपी से बात की। डीजीपी ने इस खबर का खंडन करते हुए कहा कि भ्रामक, तथ्यहीन, झूठी और बिना सर-पैर वाली खबर चलाकर, एक बड़ी अफवाह फैलाई गई है। उन्होंने कहा कि वे अपने पद की गरिमा समझते हैं और निष्ठा और ईमानदारी से वे अपना फर्ज और कर्तव्य निभा रहे हैं।

इसको लेकर बिहार के डीजीपी ने अपने ऑफिशियल ट्विटर पर ट्वीट कर के लिखा है कि बिहार के एक न्यूज पोर्टल ने उनकी नौकरी से इस्तीफा देने की झूठी खबर चला सनसनी फैला दी है। इसको किस स्तर की पत्रकारिता कहेंगे आप ?सूत्रों की मानें तो, इस खबर को लेकर डीजीपी काफी खफा हैं और संबंधित वेब पोर्टल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी प्रारंभ कर दी गई है। इस बीच में वेब जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष आनंद कौशल ने कहा है कि ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई में उनका संगठन भी शासन-प्रशासन का साथ देगा। किसी भी आधारहीन, तथ्यहीन, झूठी और भ्रामक खबर को बढ़ावा देने के पक्ष में वेब जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया नहीं है। कयास यह भी लगाया जा रहा है कि डीजीपी के रूप में, लगातार सुर्खियाँ बटोरने वाले और काफी लोकप्रियता हासिल करने वाले गुप्तेश्वर पांडेय की छवि को दूसरी तरफ धकेलने और उनकी लोकप्रियता में सेंधमारी का यह प्रयास भी हो सकता है।

आगे डीजीपी की तरफ से जैसी भी करवाई की पहल हो लेकिन इस तरह की पत्रकारिता बेहद शर्मनाक और शर्मशार करने वाली है। आज महाभारत के संजय की आंखें रखने वाली पत्रकारिता, जिसे शासन और प्रशासन को हांकने के अधिकार हैं, वह पत्रकारिता, भौतिक तृष्णा और दुम हिलाने की नई ईबारत लिखने में बहुत आगे निकल चुकी है। वैसे डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय पत्रकारों के प्रति काफी नरम दिल रहे हैं और पत्रकारों को काफी सम्मान भी करते हैं । ऐसे में, यह देखना बेहद जरूरी है कि डीजीपी, इस मामले में कौन सा कदम उठाते हैं।

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सिटी पोस्ट के मैनेजिंग एडिटर मुकेश कुमार सिंह

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