By, Shrikant Pratyush
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एकाउंट नम्बर, पासवर्ड, ओटीपी साझा न करें, जालसाजी से बचें : महेश गोयल

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भारतीय स्टेट बैंक के मुख्य महाप्रबंधक (बिहार-झारखंड) महेश गोयल ने कहा है कि ऑनलाइन बैंकिंग कारोबार में जालसाजी से बचने के लिए ग्राहक कभी भी अपना एकाउंट नम्बर पासवर्ड और ओ.टी.पी. किसी कीमत पर किसी अन्य व्यक्ति से साझा न करें।

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एकाउंट नम्बर, पासवर्ड, ओटीपी साझा न करें, जालसाजी से बचें : महेश गोयल

सिटी पोस्ट लाइव : भारतीय स्टेट बैंक के मुख्य महाप्रबंधक (बिहार-झारखंड) महेश गोयल ने कहा है कि आॅन लाइन बैंकिंग कारोबार में जालसाजी से बचने के लिए ग्राहक कभी भी अपना एकाउंट नम्बर पासवर्ड और ओ.टी.पी. किसी कीमत पर किसी अन्य व्यक्ति से साझा न करें। अगर वे इन शत्र्तों का पालन करेंगे तो जालसाजी की संभावना नहीं रहेगी। बैंक कभी भी किसी ग्राहक से उनका एकाउंट नम्बर पासवर्ड और ओ.टी.पी. साझा करने की मांग नहीं करता है। अगर बैंक द्वारा इन चीजों की मांग की जाती है, तो वे बिना किसी चीज को साझा किये बैंक शाखा में आकर इसकी शिकायत करें। इस पर तत्क्षण कार्रवाई की जायेगी।

उन्होंने कहा कि बैंक के योनो एप का ग्राहक अधिक से अधिक इस्तेमाल करें। इस एप पर जालसाजी की गुंजाइश नहीं है। हम अपने ग्राहकों को योनो कैश की भी सुविधा दे रहे हैं जिसके जरिए लोग ओटीपी द्वारा बिना एटीएम कार्ड के पैसा निकाल सकते हैं। यह सुविधा फ्राॅड की गुंजाइश पूरी तरह से खत्म कर देती है। अभी तक हमारे बैंक के एक करोड़ से अधिक ग्राहक इस एप से जुड़ चुके हैं और हमारी ये कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लोग इसका इस्तेमाल करें। ऋण वसूली जैसे महत्वपूर्ण विषय पर उन्होंने कहा कि ग्राहक समय पर ऋण का ई.एम.आई. अदा करेंगे तो मनी का फ्लो बना रहेगा तथा दूसरों को ऋण देने में बैंक को कोई परेशानी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि ग्राहक जिस उद्देश्य से ऋण लेते हैं उसे वे दूसरे काम में लगा देते हैं जिससे उनके पास ई.एम.आई. देने का पैसा नही रह जाता।

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पर्सनल लोन लेने वाले कई वेतनभोगी ग्राहक ऐसे पकड़े गये हैं जो ई.एम.आई. चुकाने के डर से अपना खाता नम्बर बदल लेते है। ऐसे ग्राहकों को चिन्हित कर कार्रवाई की प्रक्रिया की जा रही है। ई.एम.आई. में डिफाॅल्टर होने पर ग्राहक का सिबिल स्कोर खराब हो जाता है। ऐसे में किसी बैंक से उन्हें ऋण नहीं मिलेगा। इसलिए ग्राहक अपना सिबिल स्कोर ठीक रखें। गोयल ने कहा कि ग्राहक सेवा हमारी प्राथमिकता सूची में है। इसके लिए हमने बिहार-झारखंड के 1500 में से 100 शाखाओं को रिडिजाइन का काम करने के लिए चुना है। इन शाखाओं में ग्राहकों के बैठने की सुविधा पर्याप्त नहीं है, साथ ही और भी कई अन्य असुविधाएं है।

इसलिए हमने शाखायें को रिडिजाइन करने का जिम्मा लिया है। झारखंड के बारे में गोयल ने कहा कि इस राज्य में बैंक की 560 शाखाएं, 1050 एटीएम और 2000 सी.एस.पी है। झारखंड की आबादी के 32 फीसदी लोग हमारे ग्राहक हैं जिनकी संख्या एक करोड़ 17 लाख से अधिक है। झारखंड के सात जिलों में स्टेट बैंक अग्रणी बैंक के रूप में अपनी सेवा प्रदान कर रहा है। बिहार की तुलना में झारखंड में एम.एस.एम.ई. काफी एडवांस है। वहां सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योगों को बैंक की ओर से त्वरित ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। माइनिंग और स्टील सेक्टर के उद्योगों को बैंक की ओर से सबसे अधिक वित्त उपलब्ध कराया जा रहा है।

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