By, Shrikant Pratyush
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ऑटो इंडस्ट्री संकट में, नहीं मिल रहे कारों के खरीददार, राहत पॅकेज की मांग

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घरेलू बाज़ार में 51 फ़ीसदी हिस्सा रखने वाली मारुति सुज़ुकी ने जनवरी में 1.42 लाख कारें बेचीं. लेकिन छह महीने में ही 31% की गिरावट आ गई और जुलाई में उसकी सिर्फ़ 98,210 कारें बिकीं.घरेलू बाज़ार में दूसरी बड़ी कार निर्माता कंपनी हुंदई की बिक्री में भी ख़ासी गिरावट हुई है. ऑटो इंडस्ट्री में मचा हाहाकार .

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ऑटो इंडस्ट्री संकट में, नहीं मिल रहे कारों के खरीददार, राहत पॅकेज की मांग

सिटी पोस्ट लाइव : देश में ऑटो इंडस्ट्री की हालत अचानक बेहद खराब हो चुकी है.पिछले एक साल से गाड़ियों की बिक्री में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है. जुलाई महीना में तो सबसे बुरा हाल रहा .आंकड़े के अनुसार पिछले 18 सालों में कारों की खरीद में इतनी गिरावट नहीं देखी गई.इस दौरान बिक्री में 31% की गिरावट से ऑटो इंडस्ट्री हिल गया है.

सोसाइटी ऑफ़ इंडियन ऑटोमोबिल मैन्युफैक्चरर्स के आंकड़े बताते हैं कि  जुलाई में केवल 2,00,790 वाहनों की बिक्री हुई. इसके मुताबिक़ स्पोर्ट्स यूटिलिटी वीकल की बिक्री में 15% तो सवारी कार में 36% की गिरावट दर्ज की गई है.हालत इतनी ख़राब हो गई है कि ऑटो इंडस्ट्री के लिए सरकार से तुरंत एक राहत पैकेज की मांग की जाने लगी है. जीएसटी की दरों में अस्थायी कटौती की मांग सोसाइटी ऑफ़ इंडियन ऑटोमोबिल मैन्युफैक्चरर्स के द्वारा किया जा रहा है.

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गौरतलब है कि ऑटो इंडस्ट्री की ख़राब हालत से सरकार भी वाकिफ है.ऑटो इंडस्ट्रीज से जुड़े लोगों के सरकार की बातचीत हो चुकी है .इस बैठक में ऑटो इंडस्ट्रीज की तरफ से गाड़ियों पर जीएसटी की दर घटाने, स्क्रैपेज पॉलिसी लाने और वित्तीय क्षेत्र- ख़ासकर ग़ैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों- को मज़बूत करने की मांग की गई थी.लेकिन अबतक सरकार ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया है.

इस मंदी की वजह से बीते तीन महीने में दो लाख लोगों का रोज़गार छिन गया है.बीते एक वर्ष के दौरान एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत में गाड़ियों की ख़रीद में भारी कमी आई है, इसकी वजह ग़ैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों में क्रेडिट की कमी का होना बताया गया है.इसकी वजह से इस दौरान देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुज़ुकी और टाटा मोटर्स ने अपने उत्पादन में कटौती की. लिहाजा हज़ारों की संख्या में नौकरियां भी ख़त्म हुई हैं. इनकी वजह से ऑटो इंडस्ट्री अपने सबसे बड़ी गिरावट के दौर में पहुंच गई है.

घरेलू बाज़ार में 51 फ़ीसदी हिस्सा रखने वाली मारुति सुज़ुकी ने जनवरी में 1.42 लाख कारें बेचीं. लेकिन छह महीने में ही 31% की गिरावट आ गई और जुलाई में उसकी सिर्फ़ 98,210 कारें बिकीं.घरेलू बाज़ार में दूसरी बड़ी कार निर्माता कंपनी हुंदई की बिक्री में भी ख़ासी गिरावट हुई है. हुंदई की क़रीब 45 हज़ार कारें जनवरी में बिकी थीं लेकिन जुलाई में केवल 39 हज़ार कारों की बिक्री के साथ इसमें 15% की गिरावट हो गई.

शेयर बाज़ार में इन कंपनियों के शेयर में तेज़ गिरावट देखी गई है. जनवरी से अब तक मारुति के शेयर की क़ीमतों में 22% की गिरावट हुई है तो टाटा मोटर्स के शेयर इसी अवधि में 29% गिरे.इनकी तुलना में मुंबई शेयर सूचकांक सेंसेक्स इस अवधि के दौरान 2.4% बढ़ा है.मंदी की वजह से कई डीलरशिप बंद हो गए हैं, इसलिए अब इस उद्योग में जीएसटी की दरों में कटौती जैसे उपायों की मांग तेज़ हुई है.ऑटो इंडस्ट्री के लोगों ने मांग की है कि सरकार को ऑटोमोबिइल सेक्टर में जीएसटी की दर 28% से घटाकर 18% करनी चाहिए.

फ़रवरी से अब तक रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में लगातार चार बार कटौती की है. लेकिन इंडस्ट्री पर नज़र रखने वाले जानकारों का मानना है कि नक़दी की कमी को पूरा करने के लिए अभी और उपाय करने होंगे.बीते हफ़्ते ऑटो सेक्टर के प्रतिनिधियों ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाक़ात कर उन्हें वर्तमान हालात से अवगत कराया.सरकार ने ऑटो इंडस्ट्री की मंदी को दूर करने के लिए परामर्श कर रही है, लेकिन अब तक इसकी मांग को लेकर किसी भी उपाय की घोषणा नहीं की है.

इस महीने से शुरू होने वाले त्योहारी सीजन में भी ज़्यादा छूट नहीं मिल रही है. जुलाई में सभी सेगमेंट की गाड़ियों की बिक्री में गिरावट हुई है.26% की कमी के साथ इस दौरान महज 56,866 ट्रक और बस बिके जबकि क़रीब 15 लाख यूनिट बिक्री के साथ दोपहिया वाहनों में यह कमी 17% दर्ज की गई है.

इस मंदी का प्रभाव गाड़ियों के कलपुर्जे बनाने वाली सहायक कंपनियों पर भी हुआ है. टाटा मोटर्स और अशोक लेलैंड के लिए सस्पेंशन बनाने वाली जमना ऑटो इंडस्ट्री ने कहा कि कमज़ोर मांग के चलते अगस्त में वो अपने सभी नौ उत्पादन संयंत्रों को बंद कर सकते हैं.इस इंडस्ट्री पर दोहरी मार तब पड़ी जब जून में बजट के दौरान ऑटो पार्ट्स पर ड्यूटी बढ़ाई गई और पेट्रोल, डीज़ल पर अतिरिक्त टैक्स लगाया गया.

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