By, Shrikant Pratyush
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बिहार चुनाव विशेष : अंतिम चरण के चुनाव में एनडीए का पलड़ा है भारी

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2019 के लोकसभा चुनाव के सातवें और आखिरी चरण का मतदान 19 मई को होना है। बिहार में अब 8 सीटों पर मतदान होने शेष रह गए हैं।

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बिहार चुनाव विशेष : अंतिम चरण के चुनाव में एनडीए का पलड़ा है भारी

सिटी पोस्ट लाइव : 2019 के लोकसभा चुनाव के सातवें और आखिरी चरण का मतदान 19 मई को होना है। बिहार में अब 8 सीटों पर मतदान होने शेष रह गए हैं। सातवें और अंतिम चरण के इस मतदान में नालंदा सीट से महागठबंधन से अशोक कुमार आजाद चंद्रवंशी और एनडीए से वर्तमान जदयू सांसद कौशलेंद्र कुमार, पटना साहिब से कांग्रेस से शत्रुघ्न सिन्हा और बीजेपी से केन्द्री मंत्री रवि शंकर प्रसाद, पाटलिपुत्र से राजद मुखिया लालू प्रसाद यादव की बड़ी बेटी राजद से डॉक्टर मीसा भारती और बीजेपी से केन्द्रीय मंत्री सह निवर्तमान बीजेपी सांसद राम कृपाल यादव, आरा से महागठबन्धन के राजद से राजू यादव और बीजेपी से निवर्तमान सांसद राजकुमार सिंह, बक्सर से राजद के जगदानंद सिंह और बीजेपी के निवर्तमान सांसद अश्विनी कुमार चौबे, सासाराम से कांग्रेस से मीरा कुमार और बीजेपी से निवर्तमान सांसद छेदी पासवान, काराकाट से आरएलएसपी मुखिया उपेंद्र कुशवाहा और जदयू से महाबली सिंह, जहानाबाद से राजद से सुरेंद्र यादव और एनडीए से चंद्रेश्वर प्रसाद चुनावी समर में हैं।

इन सीटों पर अभी मैराथन महाप्रचार का दौर शुरू है। सभी प्रत्याशियों के समर्थक जनता को अपने पाले में लेने के लिए हर तरह का छल, प्रपंच और तिकड़म के वार कर रहे हैं। इन तमाम सीटों में पाटलिपुत्र, पटना साहिब, बक्सर, काराकाट और आरा बेहद हाईप्रोफाईल सीट है। लेकिन सासाराम सीट भी कम हाईप्रोफाईल सीट नहीं है। इस सीट से बाबू जगजीवन राम की बेटी मीरा कुमार कांग्रेस से प्रत्याशी हैं। सभी सीटों पर एनडीए और महागठबन्धन में बीच सीधी टक्कर है। 2009 में परिसीमन के बाद पटना साहिब सीट से शत्रुघ्न सिन्हा लगातार दो बार बीजेपी से सांसद चुने गए हैं। लेकिन इस बार शत्रुघ्न सिन्हा ने पार्टी बदलकर कांग्रेस का दामन थाम लिया है। कांग्रेस के लिए पटना साहिब और सासाराम की सीट बेहद प्रतिष्ठा का विषय है।

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पटना साहिब से शत्रुघ्न सिन्हा के खिलाफ बीजेपी के केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद चुनावी मैदान में हैं। इस सीट पर भी रवि शंकर प्रसाद भारी हो गए हैं। “छेनू आया था”और “खामोश” जैसे फिल्मी डायलॉग से अब जनता गुमराह होने वाली नहीं है। वैसे पटना साहिब सीट पर शत्रुघ्न सिन्हा और रवि शंकर प्रसाद दोनों कायस्थ जाति से आते हैं। लेकिन रविशंकर प्रसाद के लिए इस लोकसभा सीट पर कायस्थ समाज विलेन बने हैं? यह सवाल इसलिए है क्योंकि कायस्थ समाज के संगठन चित्रांत्र वंधुगण के द्वारा एक अपील सोशल मीडिया पर वायरल की जा रही है। अपील में कहा गया है कि अन्य जातियां भी अपने हितों में रखकर वोट देती हैं।कायस्थ जाति प्रबुद्ध समुदाय होने का दावा करती है। इसलिए हमें उम्मीद है कि वह इस चुनाव में राजनीतिक सूझ-बूझ से काम लेगी। रवि शंकर प्रसाद की राज्यसभा में सदस्यता के अभी 4 साल शेष बचे हुए हैं।

अगर वे चुनाव जीतते हैं,तो उन्हें राज्यसभा से इस्तीफा देना होगा। तब राज्यसभा की सीट पर निश्चित है कि भाजपा किसी गैर कायस्थ को बिठाएगी। इसलिए कायस्थ हित में हमारा कर्तव्य है कि हमारे प्रत्याशी शत्रुध्न सिन्हा को वोट देकर विजयी बनाएं।अपील में कहा गया है कि रविशंकर प्रसाद हारते हैं, तब भी वे पहले की तरह राज्यसभा में बनें रहेंगे। इस तरह राज्यसभा में, कायस्थ समाज के दो लोग होंगे आर.के. सिन्हा और रविशंकर प्रसाद ।साथ ही लोकसभा में शत्रुध्न सिन्हा हमारा प्रतिनिधित्व अलग से करेंगे। शत्रुध्न सिन्हा की हार से संसद में हमारा प्रतिनिधित्व घट जाएगा। इसलिए सभी चित्रांशो से अपील है कि वे कायस्थ हित में शत्रुध्न सिन्हा को जितायें। लेकिन मोदी लहर के सामने यह समझ फीकी पर रही है और रवि शंकर प्रसाद इस सीट से भारी दिख रहे हैं।

पाटलिपुत्र से मीसा भारती के लिए थोड़ी हवा, सुप्रीम कोर्ट से शिक्षकों को समान काम के बदले समान वेतन नहीं दिए जाने के कठोर फैसले के बाद जरूर बनी लेकिन मोदी हवा यहाँ भी राम कृपाल की बेड़ा पार लगा देगी। काराकाट से अभीतक उपेंद्र कुशवाहा की स्थिति मजबूत नहीं हो सकी है। बक्सर से अश्वनी चौबे लगातार जीत की तरफ कदम बढ़ा रहे हैं। कुल मिलाकर अंतिम चरण में भी बिहार में एनडीए का पलड़ा भारी है। इसबार सासाराम से मीरा कुमार की राह भी आसान नजर नहीं आ रही है। बिहार में महागठबन्धन की झिकझिक और और कमजोर बुनियाद ने एनडीए को मनमाफिक फायदा पहुंचाया है ।

अंतिम चरण में भी आनंद मोहन का रहेगा निर्णायक इफेक्ट

पूर्व सांसद आनंद मोहन की राजनीतिक बाजीगरी ने महागठबन्धन को बेहद नुकसान पंहुंचाया है। महागठबन्धन के नायक तेजस्वी यादव ने आनंद मोहन को कमतर आंककर, उनको तवज्जो नहीं दिया। तेजस्वी यादव की यह राजनीतिक भूल, उन्हें अर्श से फर्श पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। अंतिम चरण में आनंद मोहन के निर्देश पर उनके समर्थक आरा से राजकुमार सिंह, काराकाट से महाबली सिंह, बक्सर से अश्वनी कुमार चौबे,पाटलिपुत्र से रामकृपाल यादव और सासाराम से छेदी पासवान को मदद कर रहे हैं। पूर्व सांसद आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद और बड़े बेटे चेतन आनंद आरा से प्रचार की शुरुआत कर रहे हैं।

राजद के सुरमा तेजस्वी यादव के सवर्ण विरोधी बयान और आनंद मोहन के समर्थन ने बिहार में राजद की कब्र खोदने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती दिख रही है। इस चुनाव में आनंद मोहन के सारे राजनीतिक विद्वेष खत्म दिख रहे हैं। लवली आनंद से नीतीश कुमार,अमित शाह, राजनाथ सिंह सहित जदयू और बीजेपी के बड़े नेताओं से बढ़ी निकटता, बिहार सहित देश में नई राजनीतिक धरा के उद्द्भव की मुखालफत कर रहे हैं। इसमें कोई शक नहीं है कि बिहार लोकसभा चुनाव में जेल में रहते हुए पूर्व सांसद आनंद मोहन ने राजनीति के कई मास्टर स्ट्रोक लगाकर, गेम चेंजर की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

पीटीएन न्यूज मीडिया ग्रुप के सीनियर एडिटर मुकेश कुमार सिंह का “विशेष चुनाव विश्लेषण”

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