By, Shrikant Pratyush
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सत्ता का संग्राम 2019 : गया में 1952 से 2014 तक रहा कांग्रेस का राज, इस बार किसकी बारी

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बोधगया वह भूमि है, जहां ज्ञान पाकर राजकुमार सिद्धार्थ भगवान बुद्ध बने। यहां बड़े कल-कारखाने नहीं हैं। यहां की पटवा टोली में बुनकरों की बड़ी तादाद है, जहां कपड़े तैयार किए जाते हैं।

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सत्ता का संग्राम 2019 : गया में 1952 से 2014 तक रहा कांग्रेस का राज, इस बार किसकी बारी

सिटी पोस्ट लाइव : बोधगया वह भूमि है, जहां ज्ञान पाकर राजकुमार सिद्धार्थ भगवान बुद्ध बने। यहां बड़े कल-कारखाने नहीं हैं। यहां की पटवा टोली में बुनकरों की बड़ी तादाद है, जहां कपड़े तैयार किए जाते हैं। सैकड़ों लोग कुटीर उद्योग से जुड़े हैं। गया संसदीय क्षेत्र की अर्थव्युवस्थाा कृषि आधारित है। झारखंड की सीमा से सटा यह क्षेत्र नक्सल प्रभावित भी है। जिले के 24 प्रखंडों में शहर को छोड़कर लगभग सभीक्षेत्रों में नक्सल समस्या व्याप्त है। नक्सालियों पर नकेल के लिए सीआरपीएफ की स्थाेयी बटालियन भी तैनात है। यहां सेना की ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी और अंतरराष्ट्रीीय हवाई अड्डा भी है। गया संसदीय सीट अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित है। गया जिले में कुल 10 विधानसभा क्षेत्र हैं। इनमें छह विधानसभा क्षेत्र गया संसदीय क्षेत्र में आते हैं। गया संसदीय क्षेत्र में गया, बोधगया, बेलागंज, शेरघाटी, बाराचट्टी और वजीरगंज विस क्षेत्र शामिल है।जिले की 10 विधानसभा सीटों में चार पर राजद, एक पर हम, दो पर भाजपा, दो पर जदयू, एक पर कांग्रेस काबिज है।

 इतिहास और बड़ी घटनाएं

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1952 से 2014 तक यहां से छह बार कांग्रेस, एक बार प्रजातांत्रिक सोशलिस्टट पार्टी, एक बार जनसंघ, एक बार जनता पार्टी, तीन बार जनता दल, एक बार राजद औरचार बार भाजपा विजयी रही है। गया में कुल मतदाताओं की संख्यार 28,62,060 है। यह देश के अति पिछड़े जिलों में शामिल है, जिसके लिए विशेष योजनाएं दी गई हैं।जिले की कुल जनसंख्या0 43,91,418 है और साक्षरता दर 52.38 फीसद है।

बड़ी घटनाएं, विकास और मुद्दे

19 जनवरी 2018 को दलाईलामा के बोधगया प्रवास और सूबे के तत्कालीन राज्यपाल के बोधगया आगमन के दौरान आतंकियों द्वारा बम विस्फोाट किया गया था। 2013 में भी बोधगया में सीरियल ब्लास्ट  किया गया था। 2005 के विधानसभा चुनाव के दौरान नक्सीलियों ने बाराचट्टी में वेंकैया नायडू का हेलीकाप्ट्र जला दिया था।बोधगया में आईआईएम की स्थाचपना, पंचानपुर मेंदक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वकविद्यालय औरबिजली के क्षेत्र में सुधार यहां होने वाले प्रमुख कार्य हैं। हालांकि डोभी-पटना फोर लेन का काम बंद है। फल्गुा में वियर बांध, फोर लेन निर्माण, हवाई अड़़डा का विस्तायर और उत्तनर कोयल परियोजना से जुड़े काम की लोग मांग कर रहे हैं। इस तरह ये काम इस संसदीय क्षेत्र के प्रमुख मुद्दे हैं। स्वाोस्य् का और शिक्षा की हालत गंभीर है। मगध मेडिकल कॉलेज एंड हास्पिटल के लिए घोषणाएं तो बहुत हुईं, पर यह धरातल पर नहीं उतर सका।

गया की खास बातें

गया बिहार के 40 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है। इस लोकसभा क्षेत्र में 6 विधानसभा क्षेत्रों को समाहित किया गया है। फाल्गुनी नदी के तट पर बसा यह शहर झारखंड की सीमा से जुड़ता है। ऐतिहासिक और धार्मिक रूप से यह बिहार का सबसे महत्वपूर्ण नगर है। पितृपक्ष पर हजारों लोग पिंडदान के लिए यहां जुटते हैं। इस क्षेत्र से कुछ दूरी पर बोधगया स्थित है जहां भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। यहां का विष्णुपद मंदिर पर्यटकों के बीच लोकप्रिय है। इस क्षेत्र का उल्लेख महाकाव्य रामायण में भी मिलता है। गया मौर्य काल में एक महत्वपूर्ण नगर था। मध्यकाल में यह शहर मुगल सम्राटों के अधीन था।

चुनाव परिणाम

हरी मांझी BJP, 326,230
21%

रामजी मांझी RJD, 210,726

14%

जीतन राम मांझी, JDU, 131,828

8%

महिला मतदाता

702,311

पुरुष मतदाता

799,210

कुल मतदाता

1,501,521

पूर्व सांसद

  1. हरी मांझी, बीजेपी  2009
  2. राजेश कुमार मांझी, राजद  2004
  3. रामजी मांझी, बीजेपी 1999
  4. कृष्णा कुमार चौधरी, बीजेपी  1998
  5. भगवती देवी, जेडी  1996
  6. राजेश कुमार, जेडी  1991
  7. इनस्वसर चौधरी, जेडी  1989
  8. रामस्‍वरूप राम, कांग्रेस  1984
  9. रामस्वरूप राम, कांग्रेस  1980
  10. ईश्वर चौधरी बीएलडी  1977
  11. ईश्वर चौधरी, बीजेएस 1971
  12. आर दास,कांग्रेस  1967
  13. बृजेश्वर प्रसाद, कांग्रेस  1962
  14. ब्रजेश्वर प्रसाद, कांग्रेस  1957 हरी मांझी
  15. विजयी सांसद – 2014.

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