By, Shrikant Pratyush
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बेगूसराय की लड़ाई में कहाँ खड़े हैं कन्हैया कुमार, कौन दे रहा गिरिराज को चुनौती

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बिहार के बेगूसराय लोक सभा सीट पर पुरे देश दुनिया की नजर टिकी हुई है. यहाँ से लोक सभा चुनाव जेएनयू के छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार सीपीआइ के टिकेट पर चुनाव लड़ रहे हैं.

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बेगूसराय की लड़ाई में कहाँ खड़े हैं कन्हैया कुमार, कौन दे रहा गिरिराज को चुनौती

सिटी पोस्ट लाइव : बिहार के बेगूसराय लोक सभा सीट पर पुरे देश दुनिया की नजर टिकी हुई है. यहाँ से लोक सभा चुनाव जेएनयू के छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार सीपीआइ के टिकेट पर चुनाव लड़ रहे हैं. मोदी के कट्टर विरोधी कन्हैया कुमार का मुकाबला मोदी के कट्टर समर्थक बीजेपी के गिरिराज सिंह के साथ है. लेकिन कन्हैया की मुश्किल लालू यादव ने बढ़ा दी है. लालू यादव ने कन्हैया कुमार का समर्थन करने की बजाय इस सीट से तनवीर हसन को अपना उम्मीदवार बना दिया है. तनवीर हसन के चुनाव मैदान में उतने की वजह से यहाँ लड़ाई कन्हैया बनाम गिरिराज सिंह होने की बजाय त्रिकोणात्मक हो गई है. आमने सामने तनवीर हसन और गिरिराज सिंह हैं तो तीसरे नमबर पर कन्हैया कुमार हैं.

देशभर की मीडिया की नजर कन्हैया कुमार पर टिकी है. उनके चुनाव मैदान में उतरने को लेकर देश दुनिया की मीडिया की नजर बेगूसराय सीट पर है.सबसे ज्यादा चर्चा में हैं कन्हैया कुमार. बेगूसराय के लोगों की नजर में सबसे योग्य उम्मीदवार हैं कन्हैया कुमार लेकिन उनकी परेशानी ये है कि उनकी लड़ाई तनवीर हसन और गिरिराज सिंह से नहीं बल्कि सीधे पीएम मोदी के साथ हो गई है.कन्हैया कुमार को चाहने वाले भी BJP और महागठबंधन यानी RJD के पक्ष में खड़े दिख रहे हैं. कन्हैया कुमार को अल्पसंख्यकों का साथ तो मिल सकता है लेकिन तभी जब वो गिरिराज सिंह को टक्कर देने की स्थिति में दिखेगें.जबतक लड़ाई बीजेपी के गिरिराज और RJD के तनवीर हशन के बीच दिखेगी अल्पसंख्यक खुलकर कन्हैया कुमार के साथ खड़े नहीं हो पायेगें.

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आज की तारीख में मीडिया के अनुसार लड़ाई गिरिराज सिंह और कन्हैया कुमार के बीच भले दिख रही है लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि अभीतक लड़ाई गिरिराज और तनवीर हसन के बीच ही है. कन्हैया कुमार तीसरे नंबर  पर दिख रहे हैं. कन्हैया कुमार को चुनाव जीतने के लिए सबसे पहले ये भरोसा अल्पसंख्यकों और यादवों को दिलाना पड़ेगा कि तनवीर हसन तीसरे नम्र पर हैं और गिरिराज के साथ उनकी सीधी टक्कर है. जाहिर है कन्हैया कुमार को और जोर लगाना पड़ेगा. चुनाव में माहौल बदलने में ज्यादा समय नहीं लगता है. रातों रात समीकरण बदल जाते हैं.

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