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जज-वकील, सरकार अपने गिरेबां में झांके:कानून मंत्री.

पटना में CJI के सामने कानून मंत्री रिजिजू बोले, 10 से 15 साल तक केस पेंडिंग रहता है.

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सिटी पोस्ट लाइव :पटना के बापू सभागार में बिहार स्टेट बार काउंसिल और बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित नेशनल सेमिनार एंड ट्रेनिंग प्रोग्राम के उद्घाटन सत्र में पहुंचे केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि जस्टिस डिलीवरी मैकेनिज्म मजबूत कैसे हो? इस पर फोकस करें. सिर्फ जज की संख्या बढ़ाने से यह मजबूत नहीं होगा. केस के डिले होने से चिंता बढ़ती है. हमारे लिए दुःख की बात है कि 10 से 15 साल तक केस पेंडिंग रहता है. जज-वकील और सरकार को अपने गिरेबां में झांककर देखना चाहिए.

किरण रिजिजू ने कहा कि जब मंत्री बना तो 4 करोड़ 25 लाख केस पेंडिंग थे. कोरोना की वजह से इसकी संख्या बढ़कर 4 करोड़ 80 लाख हो गई है.कानून मंत्री ने कहा कि मेरे पास कई वीडियो आते हैं. हाईकोर्ट के वीडियो को मैं ऑब्जर्व करता हूं. कई खामियां दिखीं. सोशल मीडिया में जजों पर जो टिप्पणी होती है, वो सही नहीं है. इस मामले में ठोस कदम उठाना होगा. कार्रवाई होनी चाहिए. लाइव स्ट्रीमिंग में ध्यान देना होगा.उन्होंने कहा कि पिछले 8 साल में नरेंद्र मोदी की सरकार ने एक भी ऐसा कदम नहीं उठाया, जिससे ज्यूडिशियरी को नुकसान हो. ज्यूडिशियरी से हम उम्मीद करते हैं कि अपने दायरे और संविधान में रहकर सम्मान भाव से काम करें ताकि मधुर संबंध बना रहे.

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया यूयू ललित ने कहा, ‘वकील वो आदमी होता है जो रूल ऑफ लॉ को संभाले. उसका मान रखे. दूसरा वो हर बात में कारण खोजता है. इसकी वो हमेशा कोशिश करता है. तीसरी वो हर बात को नेशनल स्तर पर सोचता है. यही वजह है कि महात्मा गांधी ने दांडी यात्रा के वक्त सिर्फ नमक को ही क्यों चुना? क्योंकि, नमक आदमी की जिंदगी में बहुत अहम है. वकीलों के पास काफी ताकत . इसी के आधार पर आपको आगे बढ़ना होगा. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजय किशन कॉल ने अपील की कि जब कोर्ट और बार के बीच मतभेद होता है तो वकील हड़ताल पर न जाएं क्योंकि, इससे जस्टिस सिस्टम पर असर पड़ता है. क्लाइंट को टाइम पर न्याय नहीं मिला पाता है.

पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजय करोल ने इस कार्यक्रम की तारीफ करते हुए कहा कि बिहार राज्य बार काउंसिल देश का तीसरा बड़ा काउंसिल है.इस कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के 6 जज जस्टिस संजय किशन कॉल, एमआर शाह, बीआर गवई, जेके महेश्वरी, एमएम सुंदरेश और पीए नरसिम्हा शामिल हुये. इनके साथ ही पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजय करोल और कई जज शामिल हुए. कई पूर्व जज भी मौजूद थे. सभी राज्यों के बार काउंसिल के अधिकारी, सदस्यों के साथ ही अकेले बिहार से करीब 7 से 8 हजार वकील शामिल हुए.

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