By, Shrikant Pratyush
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नेता जी ने स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा तो फहराया, लेकिन राष्ट्र ध्वज का ज्ञान बिल्कुल नहीं

देखिए जदयू विधायक ने तिरंगे को उल्टा फहराया

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जब तिरंगे को सलामी देने के बाद सभी उसी अवस्था में तिरंगे को छोड़ चलते रहे. दरअसल 72 वें स्वतंत्रता दिवस पर पूरा हिंदुस्तान पूरे जोशो खरोश के साथ आजादी का जश्न माना रहा है. इसी जश्न को मानने के लीए जेडीयू विधायक वीरेंद्र सिंह अपने गृह आवास डेहरी पहुंचे और अपने घर के छत पर झंडा फहराया.

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सिटी पोस्ट लाइव : वैसे तो अक्सर नेताओं को ज्ञान बांटते सुना और देखा होगा. लेकिन कुछ ऐसी नेता होते हैं जिन्हें राष्ट्र ध्वज का तनिक भी ज्ञान नहीं होता. उन्ही नेताओं में से एक हैं जनता दल यूनाइटेड से औरंगाबाद के नवीनगर विधायक वीरेंद्र कुमार सिंह, जिन्होंने ने बड़े शान से सीना चौड़ा कर अपने गृह आवास पर तिरंगा तो फहराया लेकिन वो भी उल्टा. इस बात पर न उनके कार्यकर्ताओं की नजर गई और न ही विधायक जी की.

हद तो तब हो गई जब तिरंगे को सलामी देने के बाद सभी उसी अवस्था में तिरंगे को छोड़ चलते रहे. दरअसल 72 वें स्वतंत्रता दिवस पर पूरा हिंदुस्तान पूरे जोशो खरोश के साथ आजादी का जश्न माना रहा है. इसी जश्न को मानने के लीए जेडीयू विधायक वीरेंद्र सिंह अपने गृह आवास डेहरी पहुंचे और अपने घर के छत पर झंडा फहराया. लेकिन अफसोस ये रहा कि विधायक वीरेंद्र कुमार सिंह को इस बात का ज़रा सा भी एहसास नहीं हुआ कि झंडा उल्टा बांधा गया है.लिहाज़ा जदयू विधायक वीरेंद्र कुमार सिंह ने जैसे ही झंडतोलन किया वैसे ही भारत की शान तिरंगा आसमान में उल्टा हवाओं के बीच लहराने लगा. बहरहाल विधायक जी ने बड़ी शान से झंडा फहराते समय झंडे को सलामी देते रहे. उन्हें इस बात का ज़रा सा भी एहसास नहीं हुआ कि जिस तिरंगें को वो सलामी दे रहे हैं,  वैसे लहरते तिरंगे को सलामी देना हमारा संविधान इजाज़त नही देता है.

 
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बहरहाल विधायक जी ने अपने आलीशान बगलें पर राष्ट्र ध्वज को उल्टा लहराने के लिए छोड़ दिया. हद तो तब हो गई कि इतना वक़्त गुज़रने के बाद भी वीरेंद्र कुमार सिंह को इस बात का की कोई खबर नहीं कि उन्होंने तिरंगे को उल्टा फहरा दिया है. इसे अज्ञानता कहे या राष्ट्र ध्वज के प्रति संवेदनहीनता. भला कोई नेता जो लोगों का प्रतिनिधित्व करता है. उसे ये समझ नहीं आया कि झंडा उल्टा है या सीधा. इस बात से जाहिर होता है कि कुछ नेता बस दिखावे के लिए अपने आप को बुद्धिजीवी और ज्ञानी बताते हैं, लेकिन वो होते नहीं हैं.

रोहतास से विकाश चन्दन की रिपोर्ट 

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