By, Shrikant Pratyush
News 24X7 Hour

Monkey Virus ने ली अबतक 3 की जान, 15 लोग इस जानलेवा फीवर की चपेट में

Above Post Content
0

इस बीमारी ने कर्नाटक में अपने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं. जहां कर्नाटक के शिमोगा जिले में 15 लोग मंकी फीवर के शिकार पाए गए हैं. इन सभी लोगों के टेस्ट में मंकी फीवर पाया गया. इस बीमारी के चलते शहर के लोगों में जबरदस्त खौफ का माहौल है

Below Featured Image

Monkey Virus ने ली अबतक 3 की जान, 15 लोग इस जानलेवा फीवर की चपेट में

सिटी पोस्ट लाइव : एकबार फिर Monkey Virus ने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं. इस जानलेवा वायरस ने अबतक कर्नाटक में तीन लोगों की जिन्दगी छीन ली है. बता दें पिछले कुछ सालों में भारत में कई प्रकार के वायरस और बीमारियां पैदा हुई हैं. कुछ देशी है तो कुछ विदेशी. कई वायरस का इलाज मुमकिन है तो कई अब भी ला इलाज है. कुछ इसी प्रकार का एक वायरस है मंकी वायरस. बंदरों से फैलने वाले इस वायरस से पहले लोग बुखार की चपेट में आते हैं, फिर धीरे धीरे शारीर कमजोर होने लगता है. और अंत में मरीज की मौत हो जाती है. बताते चलें इस बीमारी ने कर्नाटक में अपने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं.

जहां कर्नाटक के शिमोगा जिले में 15 लोग मंकी फीवर के शिका पाए गए हैं. इन सभी लोगों के टेस्ट में मंकी फीवर पाया गया. इस बीमारी के चलते शहर के लोगों में जबरदस्त खौफ का माहौल है. दिसंबर से लेकर अबतक इस बीमारी की वजह से 3 लोगों की मौत हो चुकी है. कैसनूर फॉरेस्ट डिजीज को मंकी फीवर के नाम से भी जाना जाता है. अभी तक इस बीमारी ने कुल 15 लोगों को अपना शिकार बनाया है, जिनके टेस्ट सकारात्मक पाए गए हैं.

Also Read

संबंधित राज्य के  स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मंकी फीवर का टीकाकरण किया जा रहा है, यह टीकाकरण अभियान मुख्य रूप से अरालगुडू ग्राम पंचायत में दिसंबर 2018 से चल रहा है, अभी तक इस बीमारी की वजह से तीन लोगों की मौत हो चुकी है. इलाके में एक बंदर की मौत के बाद यह बीमारी सामने आई थी, जिसके तुरंत बाद ही पांच किलोमीटर के दायरे में टीकारण अभियान शुरू कर दिया गया है. यही नहीं प्रशासन की ओर से इलाके में जो भी लोग बीमार हुए हैं उनपर नजर रखी जा रही है.

वहीं जिला प्रशासन की ओर से लोगों को यह निर्देश दिया गया है कि अगर कहीं किसी बंदर की मौत होती है तो उसके 50 मीटर तक कोई नहीं जाए. आपको बता दें कि मंकी फीवर मुख्य रूप से हनुमान लंगूर और बंदरों की एक और प्रजाति मकाका रैडियाटा से फैलता है. इनके काटने से यह बीमारी अन्य लोगों में फैलती है. यह वायरस सबसे पहले 1957 में कर्नाटक कैसनूर जंगल इलाके में पाया गया था. इसकी वजह से सैकड़ों बंदरों की मौत हो गई थी. इस बीमारी की वजह से ना सिर्फ बंदरों बल्कि लोगों की भी मौत हुई थी.वैसे इस वायरस से लोगों में भय का माहौल है. वहीं प्रदेश की सरकार इस पर नजर रखे हुए  है तथा एहतियात के तौर पर जो भी कदम उठाये जा सकते हैं वह उठा रही है.

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Leave A Reply

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More