By, Shrikant Pratyush
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“राजस्थान चुनाव विशेष” चुरू में शीला शेखावत और नागौर में सुखदेव सिंह गोगामेड़ी ने बदली राजनीतिक तस्वीर

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पाँचवें चरण का मतदान 6 मई को शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न हो गया ।इस चरण में राजस्थान की दो सीटें बेहद खास मानी जा रही हैं ।पहली सीट है चुरू,जहाँ से श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की पत्नी शीला शेखावत निर्दलीय चुनाव मैदान में ताल ठोंक रही थीं ।

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“राजस्थान चुनाव विशेष” चुरू में शीला शेखावत और नागौर में सुखदेव सिंह गोगामेड़ी ने बदली राजनीतिक तस्वीर

सिटी पोस्ट लाइव : पाँचवें चरण का मतदान 6 मई को शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न हो गया ।इस चरण में राजस्थान की दो सीटें बेहद खास मानी जा रही हैं ।पहली सीट है चुरू,जहाँ से श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की पत्नी शीला शेखावत निर्दलीय चुनाव मैदान में ताल ठोंक रही थीं ।यहाँ से बीजेपी के प्रत्याशी राहुल कस्वां हैं जिनपर वंशवाद की राजनीति का आरोप है ।बीजेपी चुरू से बीते 25 सालों से इस सीट पर कस्वां परिवार को ही टिकट देती आ रही है ।कांग्रेस से रफीक मंडेलिया चुनावी समर में हैं ।उनपर यह आरोप है की 2014 में चुनाव हारने के बाद,वे एकबार भी क्षेत्र की जनता से ना तो कभी मिलने आये और ना ही किसी के दुख-दर्द का हिस्सा ही बने ।

शीला शेखावत इन तमाम चीजों को समेटकर चुरू लोकसभा की बुनियादी और जरूरी समस्याओं से निजात दिलाने और समाज में मिल्लत कायम करने को मुद्दा बनाकर चुनाव प्रचार के दौरान लोगों के बीच जाती रही थीं ।खास बात यह है कि राजपूत,ब्राह्मण,सवर्ण के साथ-साथ सभी जाति और धर्म के लोग उनके प्रचारक बने हुए थे ।शीला शेखावत का सरल व्यवहार लोगों को बहुत भा रहा था ।लेकिन चुनाव से एक दिन पहले शीला शेखवात ने अपना समर्थन बसपा प्रत्याशी हरि सिंह चाहर को दे दिया ।स्थानीय बसपा कार्यालय में बसपा प्रत्याशी हरि सिंह चाहर समेत अनेक पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में शीला शेखावत ने बसपा प्रत्याशी को अपना समर्थन दिया ।

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गौरतलब है कि 2013 के विधानसभा चुनाव में भादरा से बसपा प्रत्याशी के रूप में सुखदेव सिंह गोगामेड़ी ने भी चुनाव लड़े थे,जिसमें उन्हें करीब 35 हजार मत मिले थे ।निर्दलीय प्रत्याशी शीला शेखावत के बसपा को समर्थन दिए जाने से कांग्रेस प्रत्याशी रफीक मंडेलिया और भाजपा के प्रत्याशी राहुल कस्वां को तगड़ा झटका लगा है । यही वजह है कि चुरू में चुनावी संघर्ष पूरी तरह से त्रिकोणीय है ।अब जीत कौन रहा है,इसपर शब्द देना अभी बेमानी है ।वैसे हरि सिंह चाहर की दावेदारी बेहद मजबूत है,इससे कतई इनकार नहीं किया जा सकता है ।

नागौर की हवा के रुख को सुखदेव सिंह गोगामेड़ी ने बदला

नागौर से लोकसभा चुनाव लड़ रहीं निवर्तमान सांसद डॉ. ज्योति मिर्धा जाट जाति से आती हैं ।इस बार वह बेहद भग्यशाली साबित हो रही हैं कि सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की वजह से राजपूत, ब्राह्मण और सवर्ण समाज के सारे लोग और सर्वसमाज के अधिक से अधिक लोग उनके पक्ष में चले गए हैं ।डॉक्टर ज्योति मिर्धा के खिलाफ राजस्थान के कद्दावर जाट नेता हनुमान बेनीवाल राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी से उम्मीदवार हैं ।बीजेपी ने हनुमान बेनीवाल को अपना समर्थन दिया है ।बताना लाजिमी है कि हनुमान बेनीवाल 2008 में बीजेपी के टिकट पर खींवसर से विधायक चुने गए थे । लेकिन हनुमान बेनीवाल की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से नहीं बनी तो उन्‍होंने अपनी अलग पार्टी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी बना ली थी ।

राजस्थान के खींवसर से विधायक और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संस्थापक और राजस्थान प्रदेश के दिग्गज जाट नेता हनुमान बेनीवाल के लिए इसबार के लोकसभा चुनाव में,भारतीय जनता पार्टी ने एक लोकसभा सीट नागौर पर चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया था ।लोकसभा चुनाव के प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर ने बीते 4 अप्रैल को ही इसका ऐलान करते हुए कहा था कि नागौर सीट पर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी और बीजेपी गठबंधन के तहत चुनाव लड़ा जाएगा ।यहां से हनुमान बेनीवाल चुनाव लड़ेंगे और बीजेपी उनको समर्थन देगी ।हनुमान बेनीवाल नागौर से बीजेपी समर्थित उम्मीदवार थे ।कांग्रेस प्रत्याशी ज्योति मिर्धा को इसबार भाजपा के पक्ष में पड़ने वाले राजपूत समुदाय के वोट,थोक में,कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रही, मिर्धा परिवार की बेटी ज्योति मिर्धा के पक्ष में पड़ गए ।

राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखदेव सिंह गीगामेडी के ज्योति मिर्धा को समर्थन दिए जाने के बाद, राजपूत करणी सेना के संस्थापक लोकेंद्र सिंह कालवी,महिपाल सिंह मकराणा के अलावा डिडवाना नागौर से राजपूत समाज के मुख्य नेता श्यामप्रताप सिंह रूआँ,शेखावाटी क्षेत्र से राजपूत नेता उम्मेद सिंह करीरी,क्षत्रिय ज्योति मंच से राजेन्द्र सिंह नरूका,खींवसर से छत्तीस कौम के नेता माने जाने वाले दुर्ग सिंह खींवसर आदि सभी प्रमुख नेताओं ने एक स्वर ज्योति मिर्धा को समर्थन दे दिया ।डॉ.ज्योति मिर्धा के पक्ष में श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेड़ी ने लाइव उद्दबोधन से नागौर जिले के राजपूत मतदाताओं एवं समस्त करणी सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा था कि ज्योति मिर्धा को अपना समर्थन देते हुए,हर प्रयास से मिर्धा परिवार की बेटी और बहन ज्योति मिर्धा को विजयी बनाने की अपील की ।

करणी सैनिकों को,मुखिया गोगामेड़ी ने यह आदेश एवं निर्देश भी दिए थे कि किसी भी सूरत में भाजपा समर्थन से चुनाव लड़ रहे,घोर जातिवादी प्रत्याशी हनुमान बेनीवाल को जीतना नहीं चाहिए ।ऐसा प्रत्याशी बिल्कुल नहीं जीत पाए,जो हर एक समाज को गालियां दे रहा हो ।बेनीवाल ने तो अपने विपक्षी दल की प्रत्याशी ज्योति मिर्धा और स्थानीय विधायक श्रीमती मंजू मेघवाल के प्रति भी दुर्भावना से ग्रस्त होकर ओछी भाषा में टिप्पणी की ।यहीं नहीं इसने हमारे महापुरूषों विरुद्ध भी ओछी टिप्पणियां की ।रालोपा प्रत्याशी हनुमान बेनीवाल को बुरी तरह हराना हमसभी का एकल मकसद है ।गोगामेड़ी ने कहा कि हनुमान बेनीवाल, जातिवाद की ओछी और घिनौनी हरकतों से भोले-भाले युवा समर्थकों को अन्य जातियों से भाईचारा खत्म करने के लिए उकसा रहा है ।वह प्रत्याशी हरगिज जीत नहीं पाए ।

डिडवाना, लाडनू, कुचामण, नांवा मकराणा, परबतसर, जायल, नागौर और खींवसर विधानसभा क्षेत्रों में पिछले दिनों राजपूत समाज की बड़ी बैठकें आयोजित करते हुए राजपूत समाज द्वारा एकमत से निर्णय लिया गया कि राजपूत मतों में किसी भी तरह का विभाजन नहीं होगा और हम इस बार एकजुटता के साथ कांग्रेस प्रत्याशी ज्योति मिर्धा के समर्थन में मतदान करते हुए, यह बता देंगे कि आम मतदाताओं की इच्छाओं के विरुद्ध जो अति जातिवादी प्रत्याशी हम पर एनडीए गठबंधन के नाम पर थोपना चाहते हैं, वो हमें मंजूर नहीं है ।हम ऐसे प्रत्याशी को समर्थन कर के अपना वोट व्यर्थ नहीं करेंगे। क्योंकि यही प्रत्याशी पूर्व में भाजपा को, भाजपा समर्थकों को और मोदी जी को भी गालियां देता रहा है और अब निरंतर कभी किसी के खिलाफ तो कभी किसी के खिलाफ जहर उगलता जा रहा है।

हनुमान बेनीवाल पर पुलिस ने अलग से आधा दर्जन से अधिक दर्ज संगीन मामलों की पुरानी फाइलें अलग से खोल दी है। कुल मिलाकर हनुमान बेनीवाल अपनी जातिवादी हरकत और बड़बोलेपन की वजह से चुनाव के दौरान काफी मुश्किलों में घिरे रहे ।राजपूत महापुरुषों और राजाओं की प्रतिमाओं को ध्वस्त करने का बेनीवाल ने एलान किया था ।यही नहीं बेनीवाल ने देवी-देवताओं पर भी फूहड़ टिप्पणी की थी ।निचोड़ के तौर पर डॉक्टर ज्योति मिर्धा की जीत,चुनाव से पहले ही सुनिश्चित दिख रही है ।वैसे अपनी तरफ से हम जीत की कतई घोषणा नहीं कर रहे हैं ।6 मई को चुनाव सम्पन्न होने के बाद,लोगों को अब 23 मई का इंतजार है, जिस दिन ईवीएम देवता चुनाव परिणाम की घोषणा करेंगे ।

पीटीएन न्यूज मीडिया ग्रुप के सीनियर एडिटर मुकेश कुमार सिंह का “चुनाव विश्लेषण”

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