By, Shrikant Pratyush
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पुरी में भगवान जगन्‍नाथ की रथ यात्रा शुरू,श्रद्धालु और पर्यटक लगे पहुँचने

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भगवान् जगन्नाथ की रथ यात्रा तीर्थ नगरी पुरी में शुरू हो गई है. इस यात्रा में पुरी दुनियाँ से आये श्राधालु भाग ले रहे हैं. यह जगन्नाथ पुरी यात्रा हर साल आषाढ़ माह के शुक्लपक्ष की द्वितीया तिथि को ओडिशा के पुरी में आयोजन किया जाता है. यह एक बड़ा उत्सव है, जो महज भारत के ही नहीं दुनिया के सबसे विशाल और महत्वपूर्ण धार्मिक उत्सवों में से एक है

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पुरी में भगवान जगन्‍नाथ की रथ यात्रा शुरू ,श्रद्धालु और पर्यटक लगे पहुँचने

सिटी पोस्ट लाइव- भगवान् जगन्नाथ की रथ यात्रा तीर्थ नगरी पुरी में शुरू हो गई है. इस यात्रा में पुरी दुनियाँ से आये श्राधालु भाग ले रहे हैं. यह जगन्नाथ पुरी यात्रा हर साल आषाढ़ माह के शुक्लपक्ष की द्वितीया तिथि को ओडिशा के पुरी में आयोजन किया जाता है. यह एक बड़ा उत्सव है, जो महज भारत के ही नहीं दुनिया के सबसे विशाल और महत्वपूर्ण धार्मिक उत्सवों में से एक है. इस उत्सव में भाग लेने के लिए पूरी दुनिया से लाखों श्रद्धालु और पर्यटक आते यहां आते हैं.

यह भव्‍य आयोजन शुक्‍ल पक्ष के 11वें दिन भगवान की घर वापसी के साथ समाप्‍त होता है. रथ यात्रा की तैयारी महीनों पहले शुरू कर दी जाती है. इस रथयात्रा में हिस्‍सा लेने के लिए देश भर के अलावा विदेश से भी श्रृद्धालु आते हैं. इस दौरान भगवान जगन्‍नाथ को उनके बड़े भाई बलराम और छोटी बहन सुभद्रा के साथ अलग-अलग रथ पर उनकी मौसी के घर गुंडीचा मंदिर ले जाया जाता है. तीनों रथ को बड़ी भव्‍यता के साथ सजाया जाता है. भगवान जगन्नाथ मंदिर से जुड़ी कुछ ऐसी चमत्कारी बातें हैं जो सभी के लिए आकर्षण का केन्द्र हैं.

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इस यात्रा से जुड़ी कुछ बातें हैं जो काफी रोचक हैं. जगन्नाथ मंदिर के शिखर पर लगा झंडा हमेशा हवा के विपरीत दिशा में लहराता है. जबकि मंदिर के शिखर पर एक सुदर्शन चक्र भी लगा हुआ है . इस चक्र को किसी भी स्थान से देखने पर चक्र का मुंह हमेशा आपकी तरफ ही दिखाई देता है. भक्तों के लिए प्रसाद तैयार करने के लिए मंदिर की रसोई में सात बर्तन को एक दूसरे के ऊपर रखकर पकाया जाता है. इस दौरान सबसे ऊपर रखे बर्तन का पकवान पहले पकता है फिर ऊपर से नीचे की तरफ से एक के बाद प्रसाद पकता है.

ऐसा भी देखा गया है कि मंदिर शिखर के ऊपर से कोई पक्षी भी उड़ता दिखाई नही देता है. यहां तक कि हवाई जहाज भी मंदिर के ऊपर से नहीं गुजरता है. दिन के किसी भी समय में मंदिर के मुख्य शिखर की परछाई नही दिखाई देती है . मंदिर के शिखर पर लगे झंडे को रोज बदला जाता है,ऐसी मान्यता है कि अगर एक भी दिन झंडा न बदला तो मंदिर 18 सालो के लिए बंद हो जाएगा . इस प्रकार से यह जग्गनाथ यात्रा देश के तमाम श्रधा के केन्द्रों में एक अलग स्थान रखता है.

जे.पी.चंद्रा की रिपोर्ट 

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