By, Shrikant Pratyush
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“जब किसानों की मौत को चुनावी मुद्दा बनाया जा सकता है तो सैनिकों का बलिदान क्यों नहीं”

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव में जीत के लिए अपने भाषणों में सेना के नाम का उपयोग करने के आरोपों को खारिज किया है. उन्होंने सोमवार को कहा कि राष्ट्रवाद और सैनिकों का बलिदान भी उतने ही महत्वपूर्ण चुनावी मुद्दे हैं जितना किसानों की मौत.

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“जब किसानों की मौत को चुनावी मुद्दा बनाया जा सकता है तो सैनिकों का बलिदान क्यों नहीं”

सिटी पोस्ट लाइव : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव में जीत के लिए अपने भाषणों में सेना के नाम का उपयोग करने के आरोपों को खारिज किया है. उन्होंने सोमवार को कहा कि राष्ट्रवाद और सैनिकों का बलिदान भी उतने ही महत्वपूर्ण चुनावी मुद्दे हैं जितना किसानों की मौत. दूरदर्शन को दिए एक साक्षात्कार में मोदी ने कहा कि देश पिछले 40 साल से आतंकवाद से जूझ रहा है. कांग्रेस की न्यूनतम आय योजना ”न्याय” पर टिप्पणी करते हुए मोदी ने कहा कि इस घोषणा के साथ ही कांग्रेस ने यह मान लिया है कि पिछले 60 साल में उसने देश के लोगों के साथ ‘महान अन्याय किया है। उन्होंने कहा, ”यदि हम लोगों को नहीं बताएंगे कि इस पर (आतंकवाद पर) हमारे विचार क्या हैं तो फिर इसमें क्या तर्क रह जाएगा। क्या कोई देश बिना राष्ट्रवाद की भावना के आगे बढ़ सकता है?”

खबर के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘यदि हम लोगों को नहीं बताएंगे कि इस पर (आतंकवाद पर) हमारे विचार क्या हैं तो फिर इसमें क्या तर्क रह जाएगा. क्या कोई देश बिना राष्ट्रवाद की भावना के आगे बढ़ सकता है? एक ऐसे देश में जहां हजारों की संख्या में सैनिकों ने बलिदान दिया हो, क्या यह चुनावी मुद्दा नहीं होना चाहिए? जब किसान की मौत होती है तो वह चुनावी मुद्दा बन जाता है, लेकिन जब एक सैनिक शहीद होता है तो वह चुनावी मुद्दा नहीं बन सकता? यह कैसे हो सकता है?’

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पिछले हफ्ते मोदी ने एक चुनावी सभा में पहली बार मताधिकार का उपयोग करने वाले मतदाताओं से प्रश्न किया था कि क्या वह अपना पहला मत पाकिस्तान के बालाकोट में किए गए हवाई हमले को समर्पित कर सकते हैं. साथ ही उन्होंने लोगों से उनका वोट पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए सैनिकों को समर्पित करने का भी अनुरोध किया था। उनके इस बयान पर विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री चुनाव में जीत के लिए सुरक्षा बलों के नाम का उपयोग कर रहे हैं.

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