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शाह के बाद नड्डा से कुशवाहा की मुलाक़ात को लेकर अटकलें तेज.

नीतीश से अलग होकर बनाई है नई पार्टी, इसके बाद मिली थी केंद्र सरकार से वाई प्लस सुरक्षा.

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सिटी पोस्ट लाइव : पिछले दिनों गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करने के बाद उपेंद्र कुशवाहा ने शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की. दिल्ली में हुई इस मुलाकात को लेकर अभी राष्ट्रीय लोक जनता दल के तरफ से कोई अधिकारिक बयान तो नहीं आया है, लेकिन उपेंद्र कुशवाहा के आधिकारिक ट्विटर से जेपी नड्डा के साथ मुलाकात की तस्वीरें सामने आई हैं.जेपी नड्डा के साथ उपेंद्र कुशवाहा और उनकी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव माधव आनंद भी मुलाकात कर रहे हैं. माना जा रहा है कि उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी एनडीए में शामिल होगी और 2024 का चुनाव वह एनडीए के बैनर तले ही लड़ेंगे.

उपेंद्र कुशवाहा ने जदयू छोड़ने से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर कई गंभीर आरोप लगाए थे. उन्होंने कहा था कि नीतीश कुमार कुछ चंद नेताओं से घिर गए हैं और उन्हीं के मुताबिक काम कर रहे हैं. जबकि उपेंद्र कुशवाहा जदयू में शामिल हुए थे और अपनी पार्टी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी का विलय जदयू में किया था, तो उन्होंने कहा था कि वह आजीवन जदयू में रहेंगे.इसके कुछ ही दिनों के बाद उपेंद्र कुशवाहा ने नीतीश कुमार पर अपनी उपेक्षा करने का आरोप लगाया और जदयू से किनारा कर लिया. अपनी पार्टी राष्ट्रीय लोक जनता दल बनाया। हालांकि जेडीयू ने इसको लेकर पहले से भी आरोप लगाया था कि उपेंद्र कुशवाहा भाजपा के कहने पर ही इस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं.

जदयू छोड़ने के बाद उपेंद्र कुशवाहा को भाजपा ने हाथों-हाथ लिया. उनकी सुरक्षा बढ़ा दी गई. वाई प्लस कैटेगरी की सुरक्षा दी गई. उपेंद्र कुशवाहा लगातार भाजपा के नेताओं से मिल रहे हैं. सूत्र बता रहे हैं कि 2024 में बिहार एनडीए में उपेंद्र कुशवाहा भाजपा के प्रमुख घटक दल रहेंगे.इससे पहले उपेंद्र कुशवाहा 2014 में एनडीए के घटक दल थे. उनकी पार्टी आरएलएसपी ने 3 सीटों पर चुनाव लड़ा था. तीनों सीटें उपेंद्र कुशवाहा ने जीती थीं. उपेंद्र कुशवाहा को केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री बनाया गया था.

हालांकि 2018 आते-आते उपेंद्र कुशवाहा ने एनडीए से दरकिनार कर लिया और महागठबंधन में शामिल हो गए. 2019 में एक भी सीट नहीं जीत पाने के बाद 2020 में विधानसभा चुनाव में भी सफलता नहीं मिली तो उन्होंने जदयू का दामन थाम लिया था. अब वह एक बार फिर से भाजपा के करीब हैं और माना जा रहा है कि वह एनडीए के घटक दल बनेंगे.

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