By, Shrikant Pratyush
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मुखिया प्रत्याशी के समर्थन का आरोप लगा मंत्री श्रवण कुमार को ग्रामीणों ने बैरंग गांव से लौटाया

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बिहार सरकार मंत्री श्रवण कुमार को गांव वालों ने मुखिया प्रत्याशी के समर्थन में आने का आरोप लगाकर गांव से लौटा दिया, गांववालों ने चुनाव के दौरान आने से नाराज होकर जमकर इस बात का विरोध भी किया गया। पंचायत चुनाव में मुखिया प्रत्याशी का समर्थन करवाने को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी दिखी.

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सिटी पोस्ट लाइव : बिहार सरकार मंत्री श्रवण कुमार को गांव वालों ने मुखिया प्रत्याशी के समर्थन में आने का आरोप लगाकर गांव से लौटा दिया, गांववालों ने चुनाव के दौरान आने से नाराज होकर जमकर इस बात का विरोध भी किया गया। पंचायत चुनाव में मुखिया प्रत्याशी का समर्थन करवाने को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी दिखी. पूरा मामला शेखपुरा सदर प्रखंड पंचायत क्षेत्र अंतर्गत जीएन विघा गांव का है. जहां के ग्रामीणों ने कहा है कि दस साल मुखिया के कार्यकाल में गांव का विकास नदारद रहा. अब समर्थन में मंत्री का आना ग्रामीणों को नाबगबार गुजरा।

दरअसल गांव के लोगों ने मंत्री पर आरोप लगाया है कि मुखिया प्रत्याशी निवास राय की पत्नी मैबुल सिन्हा के समर्थन में मंत्री श्रवण कुमार आये थे. हालांकि गांववालों के विरोध के बीच मंत्री श्रवण कुमार के द्वारा बताया गया कि वे अपने निजी कार्य से जीएन विघा गांव आये थे और गांव वालों को लगातार समझाया गया कि वह इस गांव में निजी तौर पर आते रहते हैं। उनका पंचायत चुनाव से कोई संबंध नहीं. परंतु गांव वाले मुखिया प्रत्याशी के विरोध में जमकर नारेबाजी करते रहे। उधर मीडिया की टीम ने मंत्री से बात की, तब मंत्री श्रवण कुमार ने बताया है कि वे जदयू के पूर्व जिलाध्यक्ष डॉक्टर अर्जुन प्रसाद की पत्नी की तबियत ख़राब थी.

उन्हीं को देखने पहुँचे थे बताते चले कि जदयू के पूर्व जिलाध्यक्ष का घर बरबीघा के मधेपुर गांव में है तो मंत्री जी का आगमन अभी पंचायत चुनाव के दौरान आखिर जीएन विघा क्यों बड़ा सवाल है हालांकि मंत्री ने कहा है कि पंचायत चुनाव से उनका कोई लेना-देना नहीं. उधर ग्रामीणों ने मुखिया के बिरोध में जमकर मुर्दा बाद के नारे लगाए। ग्रामीणों ने साफ तौर पर कहा है की वर्तमान मुखिया मैबुल सिन्हा के प्रतिनिधि निवास राय के समर्थन में आकर प्रचार करना बिल्कुल गलत है वर्तमान मुखिया दस वर्ष मुखिया पद पर कायम रहे लेकिन गांव का विकास नदारद रहा है ।अब देखना यह लाजमी होगा कि पंचायत चुनाव के दौरान लागू अचार संहिता के दौरान एक मुखिया के आवास पर जाकर एक मंत्री का कार्यक्रम का मकसद को प्रशासन किस स्तर से लेती है और क्या कुछ कार्रवाई हो पाता है बड़ा सवाल है ।

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शेखपुरा से धीरज कुमार की रिपोर्ट

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